प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी स्वास्थ्य विभाग द्वारा राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत इंट्रायूटेरिन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (आईयूसीडी) के पांच दिवसीय प्रशिक्षण का 20 दिसंबर 2025 को समापन किया गया। यह प्रशिक्षण 16 दिसंबर से संचालित किया जा रहा था।प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर के रूप में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ.नवज्योति बोरा ने जनपद के विभिन्न ब्लॉकों से आए नर्सिंग अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया। इस दौरान प्रतिभागियों को आईयूसीडी के संबंध में विस्तृत जानकारी देने के साथ ही इसे लगाने की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। डॉ.नवज्योति बोरा ने बताया कि आईयूसीडी महिलाओं के लिए लंबे समय तक गर्भ निरोध का सुरक्षित और प्रभावी अस्थायी साधन है,जिसे गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि कॉपर टी 380ए दस वर्ष तक तथा कॉपर टी 375 पांच वर्ष तक गर्भ निरोध के लिए प्रभावी होती है,जो सरकारी चिकित्सा इकाइयों में निःशुल्क उपलब्ध है। इसे प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में लगाना और निकालना आवश्यक है। यह मासिक धर्म के चार से सात दिन के भीतर,प्रसव के तुरंत बाद या 48 घंटे के भीतर तथा गर्भपात के तुरंत बाद लगाया जा सकता है। स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी इसका उपयोग कर सकती हैं और इसे निकलवाने के बाद प्रजनन क्षमता तुरंत वापस आ जाती है। प्रशिक्षण समापन अवसर पर बेस चिकित्सालय श्रीनगर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.राकेश रावत ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लाभार्थियों की काउंसलिंग का विशेष महत्व है। उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए फील्ड स्तर पर बेहतर परिवार नियोजन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के जनसंपर्क अधिकारी योगेश रावत,परिवार नियोजन परामर्शदाता विजय लक्ष्मी,जिला आईईसी कोऑर्डिनेटर शकुंतला नेगी,पूजा रॉय,गीता नेगी सहित ब्लॉक स्तर से आए नर्सिंग अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी स्वास्थ्य विभाग द्वारा राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत इंट्रायूटेरिन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (आईयूसीडी) के पांच दिवसीय प्रशिक्षण का 20 दिसंबर 2025 को समापन किया गया। यह प्रशिक्षण 16 दिसंबर से संचालित किया जा रहा था।प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर के रूप में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ.नवज्योति बोरा ने जनपद के विभिन्न ब्लॉकों से आए नर्सिंग अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया। इस दौरान प्रतिभागियों को आईयूसीडी के संबंध में विस्तृत जानकारी देने के साथ ही इसे लगाने की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। डॉ.नवज्योति बोरा ने बताया कि आईयूसीडी महिलाओं के लिए लंबे समय तक गर्भ निरोध का सुरक्षित और प्रभावी अस्थायी साधन है,जिसे गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि कॉपर टी 380ए दस वर्ष तक तथा कॉपर टी 375 पांच वर्ष तक गर्भ निरोध के लिए प्रभावी होती है,जो सरकारी चिकित्सा इकाइयों में निःशुल्क उपलब्ध है। इसे प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में लगाना और निकालना आवश्यक है। यह मासिक धर्म के चार से सात दिन के भीतर,प्रसव के तुरंत बाद या 48 घंटे के भीतर तथा गर्भपात के तुरंत बाद लगाया जा सकता है। स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी इसका उपयोग कर सकती हैं और इसे निकलवाने के बाद प्रजनन क्षमता तुरंत वापस आ जाती है। प्रशिक्षण समापन अवसर पर बेस चिकित्सालय श्रीनगर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.राकेश रावत ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लाभार्थियों की काउंसलिंग का विशेष महत्व है। उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए फील्ड स्तर पर बेहतर परिवार नियोजन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के जनसंपर्क अधिकारी योगेश रावत,परिवार नियोजन परामर्शदाता विजय लक्ष्मी,जिला आईईसी कोऑर्डिनेटर शकुंतला नेगी,पूजा रॉय,गीता नेगी सहित ब्लॉक स्तर से आए नर्सिंग अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।