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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के हिमालयन एक्वेटिक बायोडायवर्सिटी विभाग में आधुनिक उपकरण और शोध को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन आइडिया कैफे स्ट्रक्चर एंड क्लाइमेट सेल संस्थान नवाचार प्रकोष्ठ तथा हिमालयन एक्वेटिक बायोडायवर्सिटी विभाग के सहयोग से शोध एवं विकास जागरूकता और क्षमता निर्माण विषय के अंतर्गत किया गया। इसका उद्देश्य छात्रों और शोधार्थियों को विश्वविद्यालय में उपलब्ध उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों की जानकारी देना तथा शोध कार्य में उनके प्रभावी उपयोग के बारे में अवगत कराना था। कार्यक्रम का उद्घाटन विभागाध्यक्ष तथा आइडिया कैफे स्ट्रक्चर एंड क्लाइमेट सेल के समन्वयक डॉ.जसपाल सिंह चौहान ने किया। उन्होंने बताया कि इस सेल का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों के बीच एक सशक्त सेतु स्थापित करना है जिससे नए विचारों पर चर्चा हो सके उन्हें विकसित किया जा सके और बेहतर शोध कार्य के लिए नई पहलें सामने आ सकें।कार्यशाला के दौरान तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग विभाग के सहायक आचार्य डॉ.प्रशांत थपलियाल ने पदार्थ की विशेषताओं के अध्ययन में संरचनात्मक चित्रण एवं विद्युत-यांत्रिक तकनीकें विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शोध कार्य में एक्स-रे विवर्तन यंत्र स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी तथा पी-ई लूप ट्रेसर विद पायजोमीटर सहित केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण केंद्र में उपलब्ध विभिन्न उपकरणों के उपयोग और उनके वैज्ञानिक सिद्धांतों की जानकारी दी। दूसरे सत्र में रसायन विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ.सुरेन्द्र पुरी ने पृथक्करण का विज्ञान विषय पर व्याख्यान देते हुए आई-स्टेम पोर्टल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी इस मंच के माध्यम से विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों और सुविधाओं तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने फ्लैश क्रोमैटोग्राफी उच्च प्रदर्शन पतली परत क्रोमैटोग्राफी उच्च प्रदर्शन द्रव क्रोमैटोग्राफी तथा गैस क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री जैसी तकनीकों की उपयोगिता के बारे में भी जानकारी दी। तीसरे सत्र में रसायन विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ.रोहित महर ने उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों की बहुविषयी शोध को आगे बढ़ाने में भूमिका विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि गैस क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री द्रव क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री तथा परमाणु चुंबकीय अनुनाद जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग संरचनात्मक रसायन मेटाबोलाइट प्रोफाइलिंग संरचनात्मक जीवविज्ञान फॉरेंसिक विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान जैसे कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। कार्यशाला में लगभग 54 प्रतिभागियों ने भाग लिया।कार्यक्रम में डॉ.प्रशांत आर्य डॉ.पंकज कुमार डॉ.भास्करन और डॉ.आशीष बहुगुणा सहित अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे। अंत में डॉ.कोशल कुमार ने सभी अतिथियों वक्ताओं आयोजकों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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