प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। राज्य मंत्री सुनील सैनी ने महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके जीवन और विचारों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले एक महान समाज सुधारक नारी शिक्षा के अग्रदूत लेखक और सामाजिक समानता के प्रबल समर्थक रहे। उन्होंने कहा कि ज्योतिबा फुले का उद्देश्य समाज में समानता न्याय और शिक्षा के अधिकार को बढ़ावा देना था। उन्होंने भारतीय समाज की उस व्यवस्था को चुनौती दी जहां जाति और वर्ग के आधार पर भेदभाव किया जाता था। उन्होंने अपना पूरा जीवन उन वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया जिन्हें लंबे समय तक समाज में दबाकर रखा गया। सुनील सैनी ने कहा कि महात्मा फुले का मानना था कि शिक्षा ही परिवर्तन की कुंजी है। शिक्षा के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त किया जा सकता है। उन्होंने लड़कियों और दलितों के लिए शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। वर्ष 1848 में पुणे में पहला महिला विद्यालय स्थापित कर उन्होंने समाज में एक नई दिशा दी जिससे महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने समाज में जागरूकता फैलाने के लिए लेखन और भाषण का प्रभावी उपयोग किया। उन्होंने कविता निबंध और अन्य माध्यमों से अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं ने समाज में चेतना जागृत की और लोगों को अपने अधिकारों के प्रति सजग किया। सुनील सैनी ने कहा कि महात्मा फुले महिलाओं के अधिकारों के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य किया। उनका मानना था कि सशक्त महिला ही मजबूत समाज की आधारशिला होती है। उन्होंने कहा कि ज्योतिबा फुले का उद्देश्य एक ऐसा समाज स्थापित करना था जहां सभी को समान अधिकार प्राप्त हों जाति और वर्ग का भेद समाप्त हो और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिले। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि संगठित प्रयासों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले का पूरा जीवन नारी उत्थान एवं वंचित शोषित और पीड़ित वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित रहा। उनके विचार आज भी समाज को भेदभाव रहित बनाने की प्रेरणा देते हैं।
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प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। राज्य मंत्री सुनील सैनी ने महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके जीवन और विचारों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले एक महान समाज सुधारक नारी शिक्षा के अग्रदूत लेखक और सामाजिक समानता के प्रबल समर्थक रहे। उन्होंने कहा कि ज्योतिबा फुले का उद्देश्य समाज में समानता न्याय और शिक्षा के अधिकार को बढ़ावा देना था। उन्होंने भारतीय समाज की उस व्यवस्था को चुनौती दी जहां जाति और वर्ग के आधार पर भेदभाव किया जाता था। उन्होंने अपना पूरा जीवन उन वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया जिन्हें लंबे समय तक समाज में दबाकर रखा गया। सुनील सैनी ने कहा कि महात्मा फुले का मानना था कि शिक्षा ही परिवर्तन की कुंजी है। शिक्षा के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त किया जा सकता है। उन्होंने लड़कियों और दलितों के लिए शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। वर्ष 1848 में पुणे में पहला महिला विद्यालय स्थापित कर उन्होंने समाज में एक नई दिशा दी जिससे महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने समाज में जागरूकता फैलाने के लिए लेखन और भाषण का प्रभावी उपयोग किया। उन्होंने कविता निबंध और अन्य माध्यमों से अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं ने समाज में चेतना जागृत की और लोगों को अपने अधिकारों के प्रति सजग किया। सुनील सैनी ने कहा कि महात्मा फुले महिलाओं के अधिकारों के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य किया। उनका मानना था कि सशक्त महिला ही मजबूत समाज की आधारशिला होती है। उन्होंने कहा कि ज्योतिबा फुले का उद्देश्य एक ऐसा समाज स्थापित करना था जहां सभी को समान अधिकार प्राप्त हों जाति और वर्ग का भेद समाप्त हो और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिले। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि संगठित प्रयासों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले का पूरा जीवन नारी उत्थान एवं वंचित शोषित और पीड़ित वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित रहा। उनके विचार आज भी समाज को भेदभाव रहित बनाने की प्रेरणा देते हैं।