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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर द्वारा आज बिरला परिसर के एसीएल हॉल में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पर एक महत्वपूर्ण अकादमिक विचार-विमर्श का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने भाग लिया और महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् से हुई जिसके पश्चात दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया गया। उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि नूपुर वर्मा एसडीएम श्रीनगर रहीं। कार्यक्रम की संयोजक प्रो.सीमा धवन ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और कहा कि इस प्रकार के अकादमिक मंच छात्रों को समकालीन संवैधानिक मुद्दों पर विचार करने का अवसर प्रदान करते हैं। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि नूपुर वर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं के शैक्षिक आर्थिक एवं कानूनी सशक्तिकरण के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं और नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के माध्यम से महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को भी सुनिश्चित किया गया है जो एक सराहनीय कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक रूप से भी सशक्त होना आवश्यक है ताकि वे अपने अधिकारों के लिए सशक्त रूप से खड़ी हो सकें। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो.एन.एस.पंवार कार्यवाहक कुलपति ने इस संवैधानिक परिवर्तन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में सदैव मजबूत महिला नेतृत्व रहा है लेकिन विधायिकाओं में उनकी भागीदारी अभी भी कम है। यह अधिनियम न केवल उनकी संख्या बढ़ाएगा बल्कि नेतृत्व को भी सुदृढ़ करेगा। प्रो.एम.एस.पंवार ने पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं की समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन क्षेत्रों की महिलाएं विशेष चुनौतियों का सामना करती हैं। यह अधिनियम उन्हें अपने मुद्दों को उठाने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो.एम.एम.सेमवाल ने अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया और इसके शीघ्र क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व एक गंभीर चिंता का विषय है और यह सुधार सामाजिक सोच में भी परिवर्तन लाएगा। अतिथि वक्ता प्रो.मंजू प्रकाश गुसाईं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जब समाज में असंतुलन होता है तब ऐसे विधेयकों की आवश्यकता होती है। यह अधिनियम समावेशिता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। कार्यक्रम में डॉ.अमरजीत सिंह परिहार ने कुलपति का संदेश पढ़ा जिसमें कहा गया कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीतिनिर्माण में मानवीय मूल्यों संवेदनशीलता और समावेशिता का समावेश होगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ.कविता भट्ट ने किया जबकि प्रो.आर.एस.फर्त्याल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की विशेषता लगभग 400 प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी रही जिन्हें पांच समूहों में विभाजित कर विभिन्न विषयों पर चर्चा कराई गई। सभी समूहों ने अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

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