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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ द्वारा संचालित गंगा एवं उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता को लेकर चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियान स्पर्श गंगा अभियान के अंतर्गत इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के पूर्व तकनीकी अधिकारी और अभियान के संस्थापक सदस्य स्वर्गीय मोहन नैथानी को मरणोपरांत स्पर्श गंगा अभियान सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान स्पर्श गंगा महोत्सव 2025 के आयोजन के दौरान प्रदान किया गया। स्वर्गीय मोहन नैथानी का निधन कोविड महामारी के दौरान हुआ था। उन्होंने स्पर्श गंगा अभियान को सशक्त बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य और प्रयोग किए तथा अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। वे गढ़वाल विश्वविद्यालय के पहले सोशल मीडिया चैंपियन प्रभारी भी रहे। विश्वविद्यालय के आउटरीच कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ उन्होंने डॉक्यूमेंटेशन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।इतिहास एवं पुरातत्व विभाग में थ्री-डी प्रोडक्शन से जुड़े कार्यों में उनकी विशेष दक्षता रही। स्पर्श गंगा अभियान के संस्थापक समन्वयक और उत्तराखंड स्पर्श गंगा बोर्ड के पूर्व ओएसडी प्रोफेसर बड़ौनी ने जानकारी देते हुए बताया कि 17 दिसंबर को स्पर्श गंगा दिवस के अवसर पर यह सम्मान लेखक गांव थानों में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्वर्गीय मोहन नैथानी की पुत्री तनीषा नैथानी को प्रदान किया गया। इस अवसर पर पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉक्टर अनिल जोशी,पद्मश्री कल्याण सिंह रावत मैती स्पर्श गंगा अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका एवं फिल्म निर्मात्री डॉक्टर अरुषि निशंक,भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की अधिष्ठाता डॉक्टर रुचि बड़ोला सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।कार्यक्रम में देशभर से आए पांच सौ से अधिक स्पर्श गंगा स्वयंसेवक,राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र-छात्राएं,शिक्षक,अधिकारी,बाल प्रहरी,समाजसेवी और पर्यावरण प्रेमियों की सहभागिता रही।स्वर्गीय मोहन नैथानी के योगदान को स्मरण करते हुए वक्ताओं ने उनके कार्यों को अभियान के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

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