प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक दिवसीय शोधार्थी कौशल विकास कार्यशाला (द्वितीय संस्करण) का सफल आयोजन किया गया।कार्यशाला का आयोजन डॉ.अंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (डीएसीई) एवं इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) द्वारा प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ,जिसे प्रो.एम.एस.पंवार,डीन (भर्ती एवं पदोन्नति),हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय,भगवती प्रसाद राघव,क्षेत्र संयोजक प्रज्ञा प्रवाह (उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश) तथा डॉ.कविता भट्ट,दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा संयुक्त रूप से संपन्न किया गया। उद्घाटन सत्र में गुणवत्तापूर्ण,नैतिक एवं समाजोपयोगी अनुसंधान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। अपने संबोधन में प्रो.एम.एस.पंवार ने शोधार्थियों से शोध कौशल विकसित करने तथा उत्कृष्ट अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। डॉ.कविता भट्ट ने भारतीय शोध दृष्टि के दार्शनिक पक्ष को रेखांकित करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित मूल्यों और शोध की मौलिकता पर प्रकाश डाला।कार्यशाला के दौरान शोधार्थियों के कौशल विकास के लिए विभिन्न विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। डॉ.रोहित महर ने अकादमिक लेखन एवं आधुनिक अनुसंधान उपकरणों पर व्याख्यान दिया,जिसमें साहित्यिक चोरी जांच उपकरण,डेटा विश्लेषण सॉफ्टवेयर,गूगल स्कॉलर,रिसर्चगेट,मैटलैब,केमड्रॉ और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म के उपयोग पर जानकारी दी गई। डॉ.बलकृष्ण बधानी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत भाषा की भूमिका तथा दर्शन,विज्ञान,साहित्य और शिक्षा में इसके योगदान पर प्रकाश डाला।डॉ.आशीष बहुगुणा ने शोधार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध फेलोशिप और अनुदान योजनाओं की जानकारी दी,जिनमें सीएसआईआर,आईसीएसएसआर,आईसीपीआर,आईसीएआर, महिला शोध फेलोशिप,स्टार्टअप एवं इंटर्नशिप योजनाएं तथा उत्तराखंड सरकार की छात्रवृत्तियां शामिल रहीं।डॉ.वरुण बर्थवाल ने अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर सत्र प्रस्तुत किया,जिसमें पाइथन,मशीन लर्निंग,लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स और डेटा विश्लेषण में एआई के प्रयोग पर चर्चा की गई। कार्यशाला का एक विशेष सत्र भगवती प्रसाद राघव द्वारा संबोधित किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता पर बल देते हुए शोधार्थियों से भारतीय दृष्टिकोण के साथ अनुसंधान करने और राष्ट्र निर्माण में बौद्धिक योगदान देने का आह्वान किया। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा के आधुनिक संदर्भों में उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ.मनीष उनियाल,भौतिकी विभाग ने की तथा डॉ.प्रकाश कुमार सिंह,डॉ.अंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सह–सत्राध्यक्ष रहे। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ.विनीत मौर्य,सूक्ष्मजीवविज्ञान विभाग ने की और डॉ.अरविंद सिंह सह–सत्राध्यक्ष रहे।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से 60 से अधिक शोधार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन प्रश्न–उत्तर सत्र एवं प्रतिभागियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ हुआ। कार्यशाला में विश्वविद्यालय एवं सहयोगी संस्थाओं के अनेक शिक्षाविद् एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे,जिनमें प्रो.एम.एस.पंवार,भगवती प्रसाद राघव,डॉ.कविता भट्ट,डॉ.रोहित महर,डॉ.बलकृष्ण बधानी,डॉ.आशीष बहुगुणा,डॉ.वरुण बर्थवाल,डॉ.मनीष उनियाल,डॉ.प्रकाश कुमार सिंह,डॉ.विनीत मौर्य एवं डॉ.अरविंद सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक दिवसीय शोधार्थी कौशल विकास कार्यशाला (द्वितीय संस्करण) का सफल आयोजन किया गया।कार्यशाला का आयोजन डॉ.अंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (डीएसीई) एवं इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) द्वारा प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ,जिसे प्रो.एम.एस.पंवार,डीन (भर्ती एवं पदोन्नति),हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय,भगवती प्रसाद राघव,क्षेत्र संयोजक प्रज्ञा प्रवाह (उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश) तथा डॉ.कविता भट्ट,दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा संयुक्त रूप से संपन्न किया गया। उद्घाटन सत्र में गुणवत्तापूर्ण,नैतिक एवं समाजोपयोगी अनुसंधान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। अपने संबोधन में प्रो.एम.एस.पंवार ने शोधार्थियों से शोध कौशल विकसित करने तथा उत्कृष्ट अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। डॉ.कविता भट्ट ने भारतीय शोध दृष्टि के दार्शनिक पक्ष को रेखांकित करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित मूल्यों और शोध की मौलिकता पर प्रकाश डाला।कार्यशाला के दौरान शोधार्थियों के कौशल विकास के लिए विभिन्न विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। डॉ.रोहित महर ने अकादमिक लेखन एवं आधुनिक अनुसंधान उपकरणों पर व्याख्यान दिया,जिसमें साहित्यिक चोरी जांच उपकरण,डेटा विश्लेषण सॉफ्टवेयर,गूगल स्कॉलर,रिसर्चगेट,मैटलैब,केमड्रॉ और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म के उपयोग पर जानकारी दी गई। डॉ.बलकृष्ण बधानी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत भाषा की भूमिका तथा दर्शन,विज्ञान,साहित्य और शिक्षा में इसके योगदान पर प्रकाश डाला।डॉ.आशीष बहुगुणा ने शोधार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध फेलोशिप और अनुदान योजनाओं की जानकारी दी,जिनमें सीएसआईआर,आईसीएसएसआर,आईसीपीआर,आईसीएआर, महिला शोध फेलोशिप,स्टार्टअप एवं इंटर्नशिप योजनाएं तथा उत्तराखंड सरकार की छात्रवृत्तियां शामिल रहीं।डॉ.वरुण बर्थवाल ने अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर सत्र प्रस्तुत किया,जिसमें पाइथन,मशीन लर्निंग,लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स और डेटा विश्लेषण में एआई के प्रयोग पर चर्चा की गई। कार्यशाला का एक विशेष सत्र भगवती प्रसाद राघव द्वारा संबोधित किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता पर बल देते हुए शोधार्थियों से भारतीय दृष्टिकोण के साथ अनुसंधान करने और राष्ट्र निर्माण में बौद्धिक योगदान देने का आह्वान किया। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा के आधुनिक संदर्भों में उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ.मनीष उनियाल,भौतिकी विभाग ने की तथा डॉ.प्रकाश कुमार सिंह,डॉ.अंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सह–सत्राध्यक्ष रहे। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ.विनीत मौर्य,सूक्ष्मजीवविज्ञान विभाग ने की और डॉ.अरविंद सिंह सह–सत्राध्यक्ष रहे।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से 60 से अधिक शोधार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन प्रश्न–उत्तर सत्र एवं प्रतिभागियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ हुआ। कार्यशाला में विश्वविद्यालय एवं सहयोगी संस्थाओं के अनेक शिक्षाविद् एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे,जिनमें प्रो.एम.एस.पंवार,भगवती प्रसाद राघव,डॉ.कविता भट्ट,डॉ.रोहित महर,डॉ.बलकृष्ण बधानी,डॉ.आशीष बहुगुणा,डॉ.वरुण बर्थवाल,डॉ.मनीष उनियाल,डॉ.प्रकाश कुमार सिंह,डॉ.विनीत मौर्य एवं डॉ.अरविंद सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे।