प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के दक्षिणी जखोली रेंज के अंतर्गत योजना के तहत रौठिया गाँव में पांच दिवसीय वन उपज से आजीविका संवर्धन' कार्यशाला का आयोजन किया गया। 17 जनवरी से शुरू हुए इस प्रशिक्षण शिविर में ग्रामीणों को मशरूम उत्पादन और वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। मैसर्स अनंत हिमलयाज जखोली और मैसर्स ग्रीनहट ऑर्गेनिक ग्लोबल पहाड़ी के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस शिविर में स्थानीय महिलाओं और युवाओं को न केवल उत्पादन,बल्कि मशरूम का अचार बनाने और उसे सुखाकर संरक्षित करने के गुर भी सिखाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार,मशरूम की खेती और मधुमक्खी पालन ऐसे कृषि आधारित उद्योग हैं जिन्हें भूमिहीन किसान,महिलाएं और बुजुर्ग भी कम लागत में अपनाकर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। कार्यशाला में विशेष रूप से 'एपिस सेरेना' मधुमक्खी और 'ऑयस्टर' व 'बटन' मशरूम पर ध्यान केंद्रित किया गया है,जो उत्तराखंड की जलवायु के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान शहद के साथ-साथ पराग और रॉयल जेली जैसे बहुमूल्य उत्पाद तैयार करने की जानकारी भी दी जा रही है। उप प्रभागीय वनाधिकारी पुण्डीर ने बताया कि इस पहल का मुख्य लक्ष्य ग्रामीणों को वनों के संरक्षण से जोड़ते हुए उनकी आजीविका को सुरक्षित करना है,जिससे 'लोकल फॉर वोकल' का सपना साकार हो सके।प्रशिक्षण को लेकर स्थानीय महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रतिभागी कमला देवी व सुशीला देवी ने बताया कि आधुनिक तकनीकों को सीखकर वे न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारेंगी,बल्कि मधुमक्खियों के परागण के जरिए जंगलों और पर्यावरण के संरक्षण में भी योगदान देंगी। वन प्रभाग का मानना है कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ में इस तरह के स्टार्टअप स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बनेंगे और ग्रामीणों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में मददगार साबित होंगे। कार्यक्रम में रेंज अधिकारी हरीश थपलियाल,वन दरोगा गोविंद चौहान,ग्रामीण विजयपाल,बलबीर,काजल देवी,कमला देवी,अमारी देवी, योगिता देवी सुशील देवी आदि उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के दक्षिणी जखोली रेंज के अंतर्गत योजना के तहत रौठिया गाँव में पांच दिवसीय वन उपज से आजीविका संवर्धन’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। 17 जनवरी से शुरू हुए इस प्रशिक्षण शिविर में ग्रामीणों को मशरूम उत्पादन और वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। मैसर्स अनंत हिमलयाज जखोली और मैसर्स ग्रीनहट ऑर्गेनिक ग्लोबल पहाड़ी के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस शिविर में स्थानीय महिलाओं और युवाओं को न केवल उत्पादन,बल्कि मशरूम का अचार बनाने और उसे सुखाकर संरक्षित करने के गुर भी सिखाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार,मशरूम की खेती और मधुमक्खी पालन ऐसे कृषि आधारित उद्योग हैं जिन्हें भूमिहीन किसान,महिलाएं और बुजुर्ग भी कम लागत में अपनाकर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। कार्यशाला में विशेष रूप से ‘एपिस सेरेना’ मधुमक्खी और ‘ऑयस्टर’ व ‘बटन’ मशरूम पर ध्यान केंद्रित किया गया है,जो उत्तराखंड की जलवायु के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान शहद के साथ-साथ पराग और रॉयल जेली जैसे बहुमूल्य उत्पाद तैयार करने की जानकारी भी दी जा रही है। उप प्रभागीय वनाधिकारी पुण्डीर ने बताया कि इस पहल का मुख्य लक्ष्य ग्रामीणों को वनों के संरक्षण से जोड़ते हुए उनकी आजीविका को सुरक्षित करना है,जिससे ‘लोकल फॉर वोकल’ का सपना साकार हो सके।प्रशिक्षण को लेकर स्थानीय महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रतिभागी कमला देवी व सुशीला देवी ने बताया कि आधुनिक तकनीकों को सीखकर वे न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारेंगी,बल्कि मधुमक्खियों के परागण के जरिए जंगलों और पर्यावरण के संरक्षण में भी योगदान देंगी। वन प्रभाग का मानना है कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ में इस तरह के स्टार्टअप स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बनेंगे और ग्रामीणों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में मददगार साबित होंगे। कार्यक्रम में रेंज अधिकारी हरीश थपलियाल,वन दरोगा गोविंद चौहान,ग्रामीण विजयपाल,बलबीर,काजल देवी,कमला देवी,अमारी देवी, योगिता देवी सुशील देवी आदि उपस्थित रहे।