प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। विश्वविद्यालय के हैप्रेक संस्थान और उद्योगिनी संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला शनिवार को शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुई। जड़ी-बूटी के माध्यम से किसानों की आजीविका बढ़ाने के उद्देश्य से हैप्रेक संस्थान के निदेशक डॉ.विजयकांत पुरोहित के निर्देशन में जड़ी-बूटी की खेती से जुड़े ब्लॉक समन्वयकों ने कीर्तिनगर ब्लॉक के धारकोट गांव का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान समन्वयकों ने जड़ी-बूटी की खेती कर रहे किसानों से मुलाकात कर उनके अनुभवों को जाना। इस दौरान उद्योगिनी संस्था से पहुंचे ब्लॉक समन्वयकों ने विशेषज्ञों से जड़ी-बूटी के कृषिकरण की विभिन्न विधियों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही जड़ी-बूटी की खेती में आने वाली चुनौतियों उत्पादन बढ़ाने के उपाय और इसके बेहतर प्रबंधन को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर बलूनी कंपनी के नीरज बलूनी ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए आय का एक बेहतर विकल्प बन सकती है। उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटियों के विपणन की संभावनाओं और बाजार की उपलब्धता को मजबूत बनाकर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। संगठित तरीके से जड़ी-बूटी की खेती करने और उचित विपणन व्यवस्था विकसित होने से किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है। कार्यक्रम के दौरान किसानों को जड़ी-बूटी की वैज्ञानिक खेती संरक्षण और प्रसंस्करण से संबंधित जानकारी भी दी गई। हैप्रेक संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.सुदीप सेमवाल ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के भ्रमण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक किसान जड़ी-बूटी की खेती से जुड़कर अपनी आजीविका को मजबूत बना सकें। इस अवसर पर उद्योगिनी संस्था के प्रबंधक शिवम पंत मनीष पंवार हैप्रेक संस्थान के डॉ.राजीव वशिष्ठ डॉ.प्रदीप डोभाल डॉ.जयदेव चौहान देवेश जंगपांगी शुभम भट्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। विश्वविद्यालय के हैप्रेक संस्थान और उद्योगिनी संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला शनिवार को शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुई। जड़ी-बूटी के माध्यम से किसानों की आजीविका बढ़ाने के उद्देश्य से हैप्रेक संस्थान के निदेशक डॉ.विजयकांत पुरोहित के निर्देशन में जड़ी-बूटी की खेती से जुड़े ब्लॉक समन्वयकों ने कीर्तिनगर ब्लॉक के धारकोट गांव का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान समन्वयकों ने जड़ी-बूटी की खेती कर रहे किसानों से मुलाकात कर उनके अनुभवों को जाना। इस दौरान उद्योगिनी संस्था से पहुंचे ब्लॉक समन्वयकों ने विशेषज्ञों से जड़ी-बूटी के कृषिकरण की विभिन्न विधियों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही जड़ी-बूटी की खेती में आने वाली चुनौतियों उत्पादन बढ़ाने के उपाय और इसके बेहतर प्रबंधन को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर बलूनी कंपनी के नीरज बलूनी ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए आय का एक बेहतर विकल्प बन सकती है। उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटियों के विपणन की संभावनाओं और बाजार की उपलब्धता को मजबूत बनाकर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। संगठित तरीके से जड़ी-बूटी की खेती करने और उचित विपणन व्यवस्था विकसित होने से किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है। कार्यक्रम के दौरान किसानों को जड़ी-बूटी की वैज्ञानिक खेती संरक्षण और प्रसंस्करण से संबंधित जानकारी भी दी गई। हैप्रेक संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.सुदीप सेमवाल ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के भ्रमण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक किसान जड़ी-बूटी की खेती से जुड़कर अपनी आजीविका को मजबूत बना सकें। इस अवसर पर उद्योगिनी संस्था के प्रबंधक शिवम पंत मनीष पंवार हैप्रेक संस्थान के डॉ.राजीव वशिष्ठ डॉ.प्रदीप डोभाल डॉ.जयदेव चौहान देवेश जंगपांगी शुभम भट्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।