प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली के आदेश के क्रम में जनपद स्तर पर उच्च शिक्षण शैक्षणिक एवं कोचिंग संस्थानों में छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने विभिन्न शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर विस्तृत चर्चा करते हुए सुझाव लिए और एक्शन प्लान पर विचार किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संस्थान पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों का भी संचालन करें ताकि विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके। उन्होंने कहा कि यह समझना आवश्यक है कि छात्र-छात्राओं को किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पढ़ाई का दबाव पारिवारिक समस्याएं या अन्य कारणों से यदि कोई छात्र मानसिक रूप से परेशान है तो उसकी समय रहते पहचान कर समाधान किया जाना चाहिए।इसके लिए सभी संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य के लिए दो-दो व्यक्तियों को नामित कर उनका विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए ताकि उन्हें विशेष मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जा सके और काउंसलिंग के माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान किया जा सके। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की घटती उपस्थिति चिंता का विषय है। काउंसलिंग के माध्यम से बच्चों की समस्याओं को समझकर उन्हें पढ़ाई के प्रति प्रेरित किया जा सकता है। इसके लिए सभी संस्थानों को सामूहिक प्रयास करने होंगे जिससे विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य मिल सके। बैठक में डीपीओ संजय गौरव श्रम प्रवर्तन अधिकारी आइशा प्रोफेसर ए.के.सिंह डॉ.के.एस.जौहरी छाया चतुर्वेदी डॉ.बीना रानी डॉ.बी.आर.भद्री डॉ.मनोज कुमार विजेंद्र लिंगवाल मयंक मुकेश प्रसाद सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रोफेसर उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली के आदेश के क्रम में जनपद स्तर पर उच्च शिक्षण शैक्षणिक एवं कोचिंग संस्थानों में छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने विभिन्न शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर विस्तृत चर्चा करते हुए सुझाव लिए और एक्शन प्लान पर विचार किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संस्थान पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों का भी संचालन करें ताकि विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके। उन्होंने कहा कि यह समझना आवश्यक है कि छात्र-छात्राओं को किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पढ़ाई का दबाव पारिवारिक समस्याएं या अन्य कारणों से यदि कोई छात्र मानसिक रूप से परेशान है तो उसकी समय रहते पहचान कर समाधान किया जाना चाहिए।इसके लिए सभी संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य के लिए दो-दो व्यक्तियों को नामित कर उनका विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए ताकि उन्हें विशेष मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जा सके और काउंसलिंग के माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान किया जा सके। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की घटती उपस्थिति चिंता का विषय है। काउंसलिंग के माध्यम से बच्चों की समस्याओं को समझकर उन्हें पढ़ाई के प्रति प्रेरित किया जा सकता है। इसके लिए सभी संस्थानों को सामूहिक प्रयास करने होंगे जिससे विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य मिल सके। बैठक में डीपीओ संजय गौरव श्रम प्रवर्तन अधिकारी आइशा प्रोफेसर ए.के.सिंह डॉ.के.एस.जौहरी छाया चतुर्वेदी डॉ.बीना रानी डॉ.बी.आर.भद्री डॉ.मनोज कुमार विजेंद्र लिंगवाल मयंक मुकेश प्रसाद सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रोफेसर उपस्थित रहे।