प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष सहायतित ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत संचालित सामूहिक आजीविका सुदृढ़ीकरण योजना ग्रामीण महिलाओं की आय का मजबूत आधार बन रही है। योजना के तहत जनपद में विभिन्न उद्यमों के साथ दुग्ध उत्पादन और विपणन की व्यवस्थित व्यवस्था तैयार की गई है जिससे पशुपालकों की आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है। दशोली विकासखंड में समुदाय आधारित उद्यम के तहत हरियाली क्लस्टर लेवल फेडरेशन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और विपणन का कार्य किया जा रहा है। फेडरेशन से जुड़े 57 महिला स्वयं सहायता समूहों की 59 महिलाएं दुग्ध उत्पादन कर रही हैं। परियोजना के सहयोग से विपणन की व्यवस्था भी विकसित की गई है जिसके तहत गोपेश्वर में एक आउटलेट स्थापित किया गया है। यहां से प्रतिदिन लगभग 120 लीटर दूध का विपणन किया जा रहा है जिससे क्लस्टर को प्रतिमाह 1 लाख 65 हजार से अधिक की आय हो रही है। इसके साथ ही दही छाछ पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों का भी विपणन किया जा रहा है जिससे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ रहा और उन्हें घर पर ही बेहतर आय प्राप्त हो रही है। कौंज पोथनी गांव की ममता देवी ने बताया कि पहले उन्हें दूध बेचने के लिए बाजार जाना पड़ता था जिससे समय की अधिक खपत होती थी और आय भी नियमित नहीं रहती थी। अब परियोजना द्वारा तैयार की गई व्यवस्था से समय की बचत के साथ बेहतर और नियमित आय मिल रही है। रौली ग्वाड़ गांव की नीलम देवी ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद दूध के विपणन में काफी सुविधा हुई है। क्लस्टर के स्वयंसेवक घर से ही दूध खरीद लेते हैं और उन्हें नियमित मासिक आय मिल रही है जिससे आजीविका में सुधार हुआ है। जनपद में इस परियोजना के तहत 5 समुदाय आधारित उद्यमों के माध्यम से 82 महिला स्वयं सहायता समूहों की 410 महिलाओं को जोड़ा गया है। इनके माध्यम से आउटलेट संचालन दुग्ध उत्पादन और रेस्टोरेंट जैसे उद्यम संचालित किए जा रहे हैं। बीते वर्ष इन समूहों ने मिलकर 1 करोड़ 39 लाख की आय अर्जित की है। वर्तमान में 26 नए उद्यमों की स्थापना की प्रक्रिया भी जारी है। जिला परियोजना प्रबंधक शशिकांत यादव ने बताया कि ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष सहायतित ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत संचालित सामूहिक आजीविका सुदृढ़ीकरण योजना ग्रामीण महिलाओं की आय का मजबूत आधार बन रही है। योजना के तहत जनपद में विभिन्न उद्यमों के साथ दुग्ध उत्पादन और विपणन की व्यवस्थित व्यवस्था तैयार की गई है जिससे पशुपालकों की आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है। दशोली विकासखंड में समुदाय आधारित उद्यम के तहत हरियाली क्लस्टर लेवल फेडरेशन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और विपणन का कार्य किया जा रहा है। फेडरेशन से जुड़े 57 महिला स्वयं सहायता समूहों की 59 महिलाएं दुग्ध उत्पादन कर रही हैं। परियोजना के सहयोग से विपणन की व्यवस्था भी विकसित की गई है जिसके तहत गोपेश्वर में एक आउटलेट स्थापित किया गया है। यहां से प्रतिदिन लगभग 120 लीटर दूध का विपणन किया जा रहा है जिससे क्लस्टर को प्रतिमाह 1 लाख 65 हजार से अधिक की आय हो रही है। इसके साथ ही दही छाछ पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों का भी विपणन किया जा रहा है जिससे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ रहा और उन्हें घर पर ही बेहतर आय प्राप्त हो रही है। कौंज पोथनी गांव की ममता देवी ने बताया कि पहले उन्हें दूध बेचने के लिए बाजार जाना पड़ता था जिससे समय की अधिक खपत होती थी और आय भी नियमित नहीं रहती थी। अब परियोजना द्वारा तैयार की गई व्यवस्था से समय की बचत के साथ बेहतर और नियमित आय मिल रही है। रौली ग्वाड़ गांव की नीलम देवी ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद दूध के विपणन में काफी सुविधा हुई है। क्लस्टर के स्वयंसेवक घर से ही दूध खरीद लेते हैं और उन्हें नियमित मासिक आय मिल रही है जिससे आजीविका में सुधार हुआ है। जनपद में इस परियोजना के तहत 5 समुदाय आधारित उद्यमों के माध्यम से 82 महिला स्वयं सहायता समूहों की 410 महिलाओं को जोड़ा गया है। इनके माध्यम से आउटलेट संचालन दुग्ध उत्पादन और रेस्टोरेंट जैसे उद्यम संचालित किए जा रहे हैं। बीते वर्ष इन समूहों ने मिलकर 1 करोड़ 39 लाख की आय अर्जित की है। वर्तमान में 26 नए उद्यमों की स्थापना की प्रक्रिया भी जारी है। जिला परियोजना प्रबंधक शशिकांत यादव ने बताया कि ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।