उत्तराखंड पारिस्थितिकी पर्यटन सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष ने किया जनपद दौरा
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।उत्तराखंड के पारिस्थिकीय पर्यटन सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष श्री ओमप्रकाश जमदग्नि के रुद्रप्रयाग दौरे के दौरान जनपद में पारिस्थितिकी और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।यह बैठक वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ संयुक्त रूप से संपन्न हुई,जिसमें क्षेत्रीय पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने और पर्यटन के सतत विकास पर गहन मंथन किया गयज्ञं बैठक की शुरुआत में उप प्रभागीय वनाधिकारी डीएस पुंडीर द्वारा प्रभाग स्तर पर संचालित ईको-टूरिज्म गतिविधियों का एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस प्रस्तुतीकरण में जनपद में ईको-टूरिज्म की संभावनाओं,अब तक की उपलब्धियों,चुनौतियों और आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी साझा की गई। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार ईको-टूरिज्म स्थानीय रोजगार,पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन स्थापित करता है।इस दौरान पारिस्थिकीय पर्यटन सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष ओमप्रकाश जमदग्नि ने ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को देखते हुए राज्य में ईको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं,जिन्हें उचित नीति और योजनाओं के माध्यम से स्थानीय समुदायों के हित में बदला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईको-टूरिज्म केवल पर्यटन तक सीमित न रहकर पर्यावरण संरक्षण,सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का भी एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।जमदग्नि ने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय लोगों को इस प्रक्रिया में भागीदार बनाकर ही स्थायी विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।बैठक में वनाग्नि की रोकथाम,संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में मानव गतिविधियों को संतुलित करने,और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि पारिस्थितिकी पर्यटन के विकास में सबसे अहम भूमिका विभागीय समन्वय,स्थानीय सहभागिता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण की होती है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में पारिस्थितिकी पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर एक उदाहरण के रूप में स्थापित किया जाएगा।बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी कल्याणी,उप प्रभागीय वनाधिकारी जखोली डॉ.दिवाकर पंत,उप प्रभागीय वनाधिकारी रुद्रप्रयाग उप वन प्रभाग देवेंद्र पुंडीर सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और फील्ड स्तर के कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित अनुभव साझा किए और भविष्य की रणनीतियों पर अपने सुझाव दिए।
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उत्तराखंड पारिस्थितिकी पर्यटन सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष ने किया जनपद दौरा
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।उत्तराखंड के पारिस्थिकीय पर्यटन सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष श्री ओमप्रकाश जमदग्नि के रुद्रप्रयाग दौरे के दौरान जनपद में पारिस्थितिकी और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।यह बैठक वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ संयुक्त रूप से संपन्न हुई,जिसमें क्षेत्रीय पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने और पर्यटन के सतत विकास पर गहन मंथन किया गयज्ञं बैठक की शुरुआत में उप प्रभागीय वनाधिकारी डीएस पुंडीर द्वारा प्रभाग स्तर पर संचालित ईको-टूरिज्म गतिविधियों का एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस प्रस्तुतीकरण में जनपद में ईको-टूरिज्म की संभावनाओं,अब तक की उपलब्धियों,चुनौतियों और आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी साझा की गई। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार ईको-टूरिज्म स्थानीय रोजगार,पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन स्थापित करता है।इस दौरान पारिस्थिकीय पर्यटन सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष ओमप्रकाश जमदग्नि ने ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को देखते हुए राज्य में ईको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं,जिन्हें उचित नीति और योजनाओं के माध्यम से स्थानीय समुदायों के हित में बदला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईको-टूरिज्म केवल पर्यटन तक सीमित न रहकर पर्यावरण संरक्षण,सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का भी एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।जमदग्नि ने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय लोगों को इस प्रक्रिया में भागीदार बनाकर ही स्थायी विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।बैठक में वनाग्नि की रोकथाम,संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में मानव गतिविधियों को संतुलित करने,और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि पारिस्थितिकी पर्यटन के विकास में सबसे अहम भूमिका विभागीय समन्वय,स्थानीय सहभागिता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण की होती है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में पारिस्थितिकी पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर एक उदाहरण के रूप में स्थापित किया जाएगा।बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी कल्याणी,उप प्रभागीय वनाधिकारी जखोली डॉ.दिवाकर पंत,उप प्रभागीय वनाधिकारी रुद्रप्रयाग उप वन प्रभाग देवेंद्र पुंडीर सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और फील्ड स्तर के कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित अनुभव साझा किए और भविष्य की रणनीतियों पर अपने सुझाव दिए।