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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दे रही है। सरकार की योजनाओं विभागीय सहयोग और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को रोजगार के अवसरों में बदल रही हैं। पौड़ी विकासखंड के ग्राम भैंसवाड़ा और पैडुल में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कदम बढ़ाया है। भैंसवाड़ा की जय मंगला देवी स्वयं सहायता समूह की पांच महिलाओं ने वर्ष 2021 में मुर्गी पालन की शुरुआत की थी। आज समूह के पास अंडा देने वाली करीब 300 मुर्गियां हैं जिनसे प्रतिदिन लगभग 150 अंडों की आपूर्ति की जा रही है। इसके साथ ही करीब 500 ब्रॉयलर मुर्गियों का भी पालन किया जा रहा है। समूह द्वारा स्थानीय बाजार के साथ श्रीनगर स्थित एसएसबी को भी मुर्गियों की आपूर्ति की जाती है। प्रत्येक बुधवार को एसएसबी की ओर से समूह से करीब 80 से 100 किलोग्राम मुर्गियां खरीदी जाती हैं। इस गतिविधि से समूह की महिलाओं को प्रतिमाह करीब 25 से 30 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। पैडुल में नैना देवी स्वयं सहायता समूह की तीन महिलाओं ने करीब छह माह पहले ब्रॉयलर मुर्गी पालन शुरू किया। समूह के पास वर्तमान में करीब 1000 मुर्गियां हैं और प्रतिदिन लगभग 150 किलोग्राम मुर्गियों की स्थानीय बाजार में आपूर्ति की जा रही है। इससे समूह की महिलाओं को प्रतिमाह करीब 17 से 20 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा ने बताया कि पैडुल में नैना देवी स्वयं सहायता समूह की तीन महिलाओं को ब्रॉयलर फार्म योजना के तहत 60 हजार रुपये का सहयोग दिया गया है। इसमें 45 हजार रुपये ब्रॉयलर मुर्गियों के लिए तथा 15 हजार रुपये मुर्गी बाड़े की मरम्मत के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। विभागीय सहयोग से समूह की महिलाएं मुर्गी पालन को व्यवस्थित एवं व्यावसायिक रूप से आगे बढ़ा रही हैं। हिमोत्थान के ब्लॉक मिशन मैनेजर विजय बिष्ट ने बताया कि भैंसवाड़ा में हिमोत्थान के सहयोग से हैचरी मशीन और ब्रूडिंग के लिए सोलर प्लांट स्थापित किया गया है। पैडुल में भी स्वयं सहायता समूह की तीन महिलाओं को 20-20 हजार रुपये का सहयोग दिया गया है। उन्होंने बताया कि समूह द्वारा एक दिन के चूजे खरीदे जाते हैं जिन्हें तैयार होने में करीब 32 दिन लगते हैं। तैयार होने पर एक ब्रॉयलर मुर्गी का वजन करीब दो किलोग्राम तक हो जाता है। पहाड़ की इन महिलाओं की कहानी इस बात की मिसाल है कि स्थानीय संसाधनों सरकारी योजनाओं और सामूहिक प्रयासों को रोजगार से जोड़कर गांव में ही आय के स्थायी अवसर तैयार किए जा सकते हैं। मुर्गी पालन के माध्यम से महिलाएं अपने परिवार की आय में योगदान देने के साथ ही आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। स्वयं सहायता समूहों को मिल रहा विभागीय एवं तकनीकी सहयोग इस प्रयास को और मजबूती दे रहा है। मुख्यमंत्री की महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की नीति के तहत ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के साधनों से जोड़ने के प्रयासों से पौड़ी जैसे पर्वतीय जनपदों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। भैंसवाड़ा और पैडुल की महिलाएं इसका उदाहरण हैं जहां मुर्गी पालन अब केवल पशुपालन गतिविधि नहीं बल्कि परिवार की आय और आत्मनिर्भरता का आधार बन रहा है।

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