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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। मेहनत और लगन के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ा जा सकता है। पौड़ी गढ़वाल के ग्राम धुंगसरी निवासी 37 वर्षीय गोविंद जोशी ने डेयरी फार्मिंग को अपनी आजीविका का आधार बनाकर इसे साबित किया है। वर्ष 2017 से डेयरी व्यवसाय से जुड़े गोविंद जोशी आज इस कारोबार से प्रतिमाह करीब 60 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता ने उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गोविंद जोशी ने बताया कि उन्हें शुरू से ही पशुपालन के प्रति रुचि थी। इसी रुचि को स्वरोजगार में बदलने का निर्णय लेते हुए उन्होंने वर्ष 2017 में डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। निरंतर मेहनत और अनुभव के साथ उन्होंने अपने कारोबार को आगे बढ़ाया। व्यवसाय का विस्तार करने और उसे अधिक मजबूत बनाने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लिया। इस योजना के तहत उन्हें 10 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। आर्थिक सहायता मिलने से उनके डेयरी व्यवसाय को मजबूती मिली और आय बढ़ाने के अवसर भी उपलब्ध हुए। गोविंद जोशी की सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को भी सामने लाती है। पशुपालन और डेयरी जैसे व्यवसायों के माध्यम से युवा अपने गांव में रहकर आजीविका के साधन विकसित कर सकते हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है। मेहनत और सही दिशा में किए गए प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं। प्रदेश सरकार की ओर से युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और पशुपालन जैसे व्यवसायों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के निर्देशन में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन योजनाओं के माध्यम से युवाओं और पशुपालकों को अपना व्यवसाय शुरू करने तथा उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा ने बताया कि पशुपालन और डेयरी फार्मिंग ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक अच्छा माध्यम है। पशुपालक विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर अपने व्यवसाय को बढ़ा सकते हैं और आय के बेहतर अवसर विकसित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पशुपालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाएं और विभागीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ उठाएं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ ही युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिल सकती है।

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