गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से शोधार्थियों का दल लैंसडौन रवाना कुलपति ने हरी झंडी दिखाकर किया प्रस्थान
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय,श्रीनगर गढ़वाल की एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल के अंतर्गत दिनांक 24 सितंबर 2025 को विश्वविद्यालय के चौरास परिसर से 42 शोधार्थियों के शैक्षणिक दल को कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल केंद्र,लैंसडौन के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कार्यक्रम भारतीय सेना एवं अकादमिक संस्थानों के मध्य सहयोग एवं ज्ञान के परस्पर आदान-प्रदान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। शोधार्थियों के इस दल का नेतृत्व विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक डॉ.मोहित बिष्ट एवं कार्यक्रम के संयोजक प्रो.एम.पी.एस.बिष्ट द्वारा किया जा रहा है। इस पहल के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल केंद्र,लैंसडौन में किया जाएगा,जिसमें हिमालयी क्षेत्रों,विशेषकर उत्तराखंड की सीमावर्ती अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के सामाजिक-आर्थिक,शैक्षणिक,स्वास्थ्य एवं पर्यटन क्षेत्र में संभावनाओं पर विस्तृत संवाद किया जाएगा। इस शैक्षणिक-सैन्य संवाद श्रृंखला के माध्यम से विश्वविद्यालय का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी विकास और शांति के लिए ज्ञान आधारित समाधान विकसित करना है।
Spread the love
गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से शोधार्थियों का दल लैंसडौन रवाना कुलपति ने हरी झंडी दिखाकर किया प्रस्थान
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय,श्रीनगर गढ़वाल की एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल के अंतर्गत दिनांक 24 सितंबर 2025 को विश्वविद्यालय के चौरास परिसर से 42 शोधार्थियों के शैक्षणिक दल को कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल केंद्र,लैंसडौन के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कार्यक्रम भारतीय सेना एवं अकादमिक संस्थानों के मध्य सहयोग एवं ज्ञान के परस्पर आदान-प्रदान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। शोधार्थियों के इस दल का नेतृत्व विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक डॉ.मोहित बिष्ट एवं कार्यक्रम के संयोजक प्रो.एम.पी.एस.बिष्ट द्वारा किया जा रहा है। इस पहल के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल केंद्र,लैंसडौन में किया जाएगा,जिसमें हिमालयी क्षेत्रों,विशेषकर उत्तराखंड की सीमावर्ती अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के सामाजिक-आर्थिक,शैक्षणिक,स्वास्थ्य एवं पर्यटन क्षेत्र में संभावनाओं पर विस्तृत संवाद किया जाएगा। इस शैक्षणिक-सैन्य संवाद श्रृंखला के माध्यम से विश्वविद्यालय का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी विकास और शांति के लिए ज्ञान आधारित समाधान विकसित करना है।