सतत पर्वतीय विकास के लिए आर्किड परागण संरक्षण पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।रुद्रप्रयाग 28 अक्टूबर सतत पारिस्थितिकी और जैव विविधता अनुसंधान केंद्र (सीएसईबीआर),ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय द्वारा अपनी पहली सामुदायिक सहभागिता गतिविधि के रूप में जैव विज्ञान विभाग के सहयोग से घिमतोली,रुद्रप्रयाग में दो दिवसीय सतत पर्वतीय विकास के लिए आर्किड परागण संरक्षण विषयक समुदाय आधारित फील्ड कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 27 और 28 अक्टूबर 2025 को आयोजित हुई।कार्यशाला का संयोजन प्रो.वी.पी.उनियाल और प्रो.मनु पंत,विभागाध्यक्ष,जैव विज्ञान विभाग,ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय द्वारा किया गया, जबकि इसे भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर),भारत सरकार एवं जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान,अल्मोड़ा द्वारा प्रायोजित किया गया।कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ.एस.पी.सुबुद्धि (आईएफएस),अध्यक्ष, उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड,उत्तराखंड सरकार ने किया।इस अवसर पर रजत सुमन (आईएफएस,प्रभागीय वनाधिकारी,रुद्रप्रयाग),डॉ.दिवाकर पंत,देवेंद्र सिंह पुंडीर (सहायक वन संरक्षक,रुद्रप्रयाग),प्रो.आर.के.मैखुरी (विभागाध्यक्ष,पर्यावरण विज्ञान,एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय,श्रीनगर) तथा श्रीमती कविता देवी,ग्राम प्रधान,घिमतोली उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने मिलकर केंद्र में एक आर्किड पॉलीहाउस का उद्घाटन किया।कार्यशाला का उद्देश्य समुदाय में आर्किड और परागणकर्ताओं के बीच संबंध,उनके संरक्षण और आजीविका के लिए उनके उपयोग के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाना था। इस आयोजन में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया,जिनमें महिला किसान,सामुदायिक कार्यकर्ता,एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शामिल थे।मुख्य अतिथि प्रो.आर.के.मैखुरी ने आत्मनिर्भरता,कृषि और जैव विविधता के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया,जबकि रजत सुमन (आईएफएस) ने कहा कि वन पंचायतों के माध्यम से समुदाय द्वारा आर्किड की खेती ग्रामीण विकास और सतत प्रगति के लिए एक प्रभावी कदम साबित होगी।डॉ.एस.पी.सुबुद्धि (आईएफएस) ने स्थानीय समुदायों से आग्रह किया कि वे स्वदेशी ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझें और उद्यमिता के माध्यम से आय सृजन के लिए इनका उपयोग करें। उन्होंने आयोजन टीम और ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय की इस अनोखी पहल की सराहना की।पहले दिन विशेषज्ञ वक्ताओं-प्रो.डी.एस.चौहान,डॉ.बी.पी.चमोला (एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय),प्रो.वी.पी.उनियाल,प्रो.मनु पंत (जीईयू),हरिराज सिंह और नवदीप द्वारा जैव विविधता संरक्षण पर व्याख्यान दिए गए। छात्रों द्वारा पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई तथा विशेषज्ञों,विद्यार्थियों,महिला किसानों और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच खुली चर्चा भी हुई।आर्किड पौधों के प्रसार पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र कार्यशाला की एक विशेष उपलब्धि रही,जिसमें महिला किसानों और छात्रों को कम लागत में आर्किड की देखभाल और प्रसार तकनीक सिखाई गई।कार्यक्रम का समापन किसानों,समुदाय प्रतिनिधियों और छात्रों के अनुभव साझा करने तथा पोस्टर प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण के साथ हुआ। इस दो दिवसीय आयोजन ने स्थानीय समुदायों में जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सतत पर्वतीय विकास के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रखा।
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सतत पर्वतीय विकास के लिए आर्किड परागण संरक्षण पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।रुद्रप्रयाग 28 अक्टूबर सतत पारिस्थितिकी और जैव विविधता अनुसंधान केंद्र (सीएसईबीआर),ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय द्वारा अपनी पहली सामुदायिक सहभागिता गतिविधि के रूप में जैव विज्ञान विभाग के सहयोग से घिमतोली,रुद्रप्रयाग में दो दिवसीय सतत पर्वतीय विकास के लिए आर्किड परागण संरक्षण विषयक समुदाय आधारित फील्ड कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 27 और 28 अक्टूबर 2025 को आयोजित हुई।कार्यशाला का संयोजन प्रो.वी.पी.उनियाल और प्रो.मनु पंत,विभागाध्यक्ष,जैव विज्ञान विभाग,ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय द्वारा किया गया, जबकि इसे भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर),भारत सरकार एवं जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान,अल्मोड़ा द्वारा प्रायोजित किया गया।कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ.एस.पी.सुबुद्धि (आईएफएस),अध्यक्ष, उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड,उत्तराखंड सरकार ने किया।इस अवसर पर रजत सुमन (आईएफएस,प्रभागीय वनाधिकारी,रुद्रप्रयाग),डॉ.दिवाकर पंत,देवेंद्र सिंह पुंडीर (सहायक वन संरक्षक,रुद्रप्रयाग),प्रो.आर.के.मैखुरी (विभागाध्यक्ष,पर्यावरण विज्ञान,एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय,श्रीनगर) तथा श्रीमती कविता देवी,ग्राम प्रधान,घिमतोली उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने मिलकर केंद्र में एक आर्किड पॉलीहाउस का उद्घाटन किया।कार्यशाला का उद्देश्य समुदाय में आर्किड और परागणकर्ताओं के बीच संबंध,उनके संरक्षण और आजीविका के लिए उनके उपयोग के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाना था। इस आयोजन में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया,जिनमें महिला किसान,सामुदायिक कार्यकर्ता,एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शामिल थे।मुख्य अतिथि प्रो.आर.के.मैखुरी ने आत्मनिर्भरता,कृषि और जैव विविधता के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया,जबकि रजत सुमन (आईएफएस) ने कहा कि वन पंचायतों के माध्यम से समुदाय द्वारा आर्किड की खेती ग्रामीण विकास और सतत प्रगति के लिए एक प्रभावी कदम साबित होगी।डॉ.एस.पी.सुबुद्धि (आईएफएस) ने स्थानीय समुदायों से आग्रह किया कि वे स्वदेशी ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझें और उद्यमिता के माध्यम से आय सृजन के लिए इनका उपयोग करें। उन्होंने आयोजन टीम और ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय की इस अनोखी पहल की सराहना की।पहले दिन विशेषज्ञ वक्ताओं-प्रो.डी.एस.चौहान,डॉ.बी.पी.चमोला (एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय),प्रो.वी.पी.उनियाल,प्रो.मनु पंत (जीईयू),हरिराज सिंह और नवदीप द्वारा जैव विविधता संरक्षण पर व्याख्यान दिए गए। छात्रों द्वारा पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई तथा विशेषज्ञों,विद्यार्थियों,महिला किसानों और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच खुली चर्चा भी हुई।आर्किड पौधों के प्रसार पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र कार्यशाला की एक विशेष उपलब्धि रही,जिसमें महिला किसानों और छात्रों को कम लागत में आर्किड की देखभाल और प्रसार तकनीक सिखाई गई।कार्यक्रम का समापन किसानों,समुदाय प्रतिनिधियों और छात्रों के अनुभव साझा करने तथा पोस्टर प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण के साथ हुआ। इस दो दिवसीय आयोजन ने स्थानीय समुदायों में जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सतत पर्वतीय विकास के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रखा।