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देवप्रयाग में विकास की नई पहल:अलकनंदा नदी पर 84 मीटर स्टील ट्रस पैदल पुल का शिलान्यास

प्रदीप कुमार
देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।देवप्रयाग में विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए आज बाह बाजार क्षेत्र में अलकनंदा नदी पर बनने वाले 84 मीटर लंबे स्टील ट्रस पैदल पुल का शिलान्यास किया गया।यह पुल देवप्रयाग नगर के दोनों तटों को जोड़ेगा,जिससे नागरिकों को न केवल आवागमन में सहूलियत मिलेगी बल्कि व्यापार,पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा।शिलान्यास समारोह में विधायक विनोद कंडारी ने आधारशिला रखी और कहा कि लगभग ₹583.58 लाख की लागत से बनने वाला यह पुल क्षेत्र की जनता के लिए सुविधा,सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक बनेगा।उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि देवप्रयाग जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक नगर को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए,ताकि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र पर्यटन और विकास का केंद्र बने।नगर पालिका अध्यक्ष ममता देवी ने बताया कि इस पुल के निर्माण से न केवल पैदल यात्रियों को अलकनंदा पार करने में आसानी होगी,बल्कि बाजार और मंदिर क्षेत्रों के बीच आवाजाही भी सुरक्षित और सुगम होगी। उन्होंने कहा कि नगर पालिका प्रशासन हर स्तर पर नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहा है।मंडल अध्यक्ष शशि ध्यानी ने कहा कि यह पुल देवप्रयाग की वर्षों पुरानी आवश्यकता को पूरा करेगा।

उन्होंने विधायक और शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस परियोजना से स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता,स्थानीय व्यापारी,सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। मौके पर उपस्थित लोगों ने विधायक का स्वागत करते हुए उनके विकास कार्यों की सराहना की।विधायक कंडारी ने कहा कि देवप्रयाग क्षेत्र में सड़क,पुल और पेयजल जैसी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जल्द ही नगर के अन्य हिस्सों में भी विकास कार्यों की श्रृंखला शुरू की जाएगी।इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने पुल निर्माण कार्य के शीघ्र आरंभ और पारदर्शी निष्पादन की अपेक्षा जताई।कार्यक्रम का समापन क्षेत्रीय जनता के उत्साहपूर्ण नारों और विकास के संकल्प के साथ हुआ।इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे नगर पालिका अध्यक्ष ममता देवी,मंडल अध्यक्ष शशि ध्यानी,भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता,स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक।

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