राजकीय मेडिकल कॉलेज बेस चिकित्सालय के डॉक्टरों ने किए दो जटिल ऑपरेशन सफल
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय में गायनी विभाग के डॉक्टरों ने चिकित्सा सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए दो अत्यंत जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए हैं। दोनों ही मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल लाई गई थीं,जिन्हें विशेषज्ञ टीम ने कुशलता से उपचार देकर नया जीवन प्रदान किया।रुद्रप्रयाग की निवासी पूजा का लैप्रोस्कोपिक ओवरीयन टॉर्शन ऑपरेशन किया गया। जांच के दौरान मरीज की ओवरी में 8 सेंटीमीटर का सिस्ट पाया गया।उल्लेखनीय है कि मरीज के पहले दो ऑपरेशन पहले ही हो चुके थे,फिर भी इस बार चिकित्सकों ने लैप्रोस्कोपी विधि से सिस्ट को सफलतापूर्वक निकालने में सफलता प्राप्त की।अब मरीज पूर्णतः स्वस्थ है और उसने डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त किया। दूसरे केस में जोशीमठ उर्गम गांव की 48 वर्षीय कमला को असामान्य गर्भाशयी रक्तस्राव की गंभीर समस्या थी। जांच में पाया गया कि उसके गर्भाशय में लगभग 5 किलोग्राम वज़नी फाइब्रॉइड था,जिससे गर्भाशय का आकार 36 सप्ताह के गर्भ के बराबर हो गया था। मरीज को गोपेश्वर से रेफर किया गया था। डॉक्टरों ने टोटल एब्डॉमिनल हिस्टेरेक्टॉमी विथ बिलैटरल सैल्पिंगो-ओओफोरेक्टॉमी प्रक्रिया द्वारा फाइब्रॉइड को सफलतापूर्वक निकाल दिया।ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति सामान्य है। दोनों मरीजों ने स्वस्थ होने के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के डॉक्टरों और चिकित्सा टीम के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की गौरतलब है कि प्रदेश के माननीय चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत जी के निर्देशन में बेस चिकित्सालय डाक्टर से लेकर तमाम चिकित्सीय सुविधाएं बढ़ाई है। महिलाओं से संबंधित जटिल मामलों का इलाज अब श्रीनगर में ही संभव हो रहा है,जिससे दूरदराज़ के क्षेत्रों जैसे रुद्रप्रयाग,पौड़ी,टिहरी,चमोली आदि जिलों की महिलाओं को देहरादून या अन्य महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। ऑपरेशन टीम का नेतृत्व गायनी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.नेहा काकरान ने किया। डॉ.नेहा ने बताया कि गायनी विभाग निरंतर गंभीर और जटिल मामलों का इलाज कर रहा है तथा महिलाओं को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ऑपरेशन टीम में डॉ.निधि,डॉ.पूजा,आकाश,तथा एनेस्थीसिया टीम से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.मोहित कुमार,डॉ.कीर्तन और डॉ..मुस्तकीन शामिल रहे।बेस अस्पताल के गायनी विभाग में महिलाओं के लिए विशेष चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध-गायनी विभाग के एचओडी डॉ.नवज्योति बोरा,असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.दीप्ति शर्मा,डॉ.नेहा काकरान,डॉ.निधि बहुगुणा,डॉ रजनीकांत एवं पीजी,इंटर्न डाक्टर द्वारा बेस अस्पताल में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत विशेष उपचार उपलब्ध हैं,जिसमें उच्च जोखिम गर्भावस्था,स्त्री रोग संबंधी शल्यक्रियाएँ,लैप्रोस्कोपी शल्यक्रियाएँ जैसे गर्भाशय हटाने की सर्जरी,ओपन हिस्टेरेक्टॉमी,लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी,वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी,सिस्ट निकालने की सर्जरी,नसबंदी,हिस्टेरोस्कोपी,स्लिंग सर्जरी,कोल्पोस्कोपी,बांझपन का उपचार होता है। डॉ.नेहा ने कहा कि जो महिलाएँ इन समस्याओं से जूझ रही हैं,वे बेस अस्पताल के गायनी विभाग में परामर्श और उपचार के लिए संपर्क कर सकती हैं।बेस अस्पताल श्रीनगर में लगातार चिकित्सा सेवाओं के स्तर को ऊँचा उठाने की दिशा में कार्य कर रहा है।विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और आधुनिक तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता से अब बेस चिकित्सालय में जटिल ऑपरेशन भी सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि गढ़वाल मंडल के हर मरीज को यहां बेहतर इलाज की सुविधा मिले और किसी को बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।डॉ.आशुतोष सयाना,प्राचार्य,राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर
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राजकीय मेडिकल कॉलेज बेस चिकित्सालय के डॉक्टरों ने किए दो जटिल ऑपरेशन सफल
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय में गायनी विभाग के डॉक्टरों ने चिकित्सा सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए दो अत्यंत जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए हैं। दोनों ही मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल लाई गई थीं,जिन्हें विशेषज्ञ टीम ने कुशलता से उपचार देकर नया जीवन प्रदान किया।रुद्रप्रयाग की निवासी पूजा का लैप्रोस्कोपिक ओवरीयन टॉर्शन ऑपरेशन किया गया। जांच के दौरान मरीज की ओवरी में 8 सेंटीमीटर का सिस्ट पाया गया।उल्लेखनीय है कि मरीज के पहले दो ऑपरेशन पहले ही हो चुके थे,फिर भी इस बार चिकित्सकों ने लैप्रोस्कोपी विधि से सिस्ट को सफलतापूर्वक निकालने में सफलता प्राप्त की।अब मरीज पूर्णतः स्वस्थ है और उसने डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त किया। दूसरे केस में जोशीमठ उर्गम गांव की 48 वर्षीय कमला को असामान्य गर्भाशयी रक्तस्राव की गंभीर समस्या थी। जांच में पाया गया कि उसके गर्भाशय में लगभग 5 किलोग्राम वज़नी फाइब्रॉइड था,जिससे गर्भाशय का आकार 36 सप्ताह के गर्भ के बराबर हो गया था। मरीज को गोपेश्वर से रेफर किया गया था। डॉक्टरों ने टोटल एब्डॉमिनल हिस्टेरेक्टॉमी विथ बिलैटरल सैल्पिंगो-ओओफोरेक्टॉमी प्रक्रिया द्वारा फाइब्रॉइड को सफलतापूर्वक निकाल दिया।ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति सामान्य है। दोनों मरीजों ने स्वस्थ होने के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के डॉक्टरों और चिकित्सा टीम के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की गौरतलब है कि प्रदेश के माननीय चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत जी के निर्देशन में बेस चिकित्सालय डाक्टर से लेकर तमाम चिकित्सीय सुविधाएं बढ़ाई है। महिलाओं से संबंधित जटिल मामलों का इलाज अब श्रीनगर में ही संभव हो रहा है,जिससे दूरदराज़ के क्षेत्रों जैसे रुद्रप्रयाग,पौड़ी,टिहरी,चमोली आदि जिलों की महिलाओं को देहरादून या अन्य महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। ऑपरेशन टीम का नेतृत्व गायनी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.नेहा काकरान ने किया। डॉ.नेहा ने बताया कि गायनी विभाग निरंतर गंभीर और जटिल मामलों का इलाज कर रहा है तथा महिलाओं को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ऑपरेशन टीम में डॉ.निधि,डॉ.पूजा,आकाश,तथा एनेस्थीसिया टीम से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.मोहित कुमार,डॉ.कीर्तन और डॉ..मुस्तकीन शामिल रहे।बेस अस्पताल के गायनी विभाग में महिलाओं के लिए विशेष चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध-गायनी विभाग के एचओडी डॉ.नवज्योति बोरा,असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.दीप्ति शर्मा,डॉ.नेहा काकरान,डॉ.निधि बहुगुणा,डॉ रजनीकांत एवं पीजी,इंटर्न डाक्टर द्वारा बेस अस्पताल में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत विशेष उपचार उपलब्ध हैं,जिसमें उच्च जोखिम गर्भावस्था,स्त्री रोग संबंधी शल्यक्रियाएँ,लैप्रोस्कोपी शल्यक्रियाएँ जैसे गर्भाशय हटाने की सर्जरी,ओपन हिस्टेरेक्टॉमी,लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी,वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी,सिस्ट निकालने की सर्जरी,नसबंदी,हिस्टेरोस्कोपी,स्लिंग सर्जरी,कोल्पोस्कोपी,बांझपन का उपचार होता है। डॉ.नेहा ने कहा कि जो महिलाएँ इन समस्याओं से जूझ रही हैं,वे बेस अस्पताल के गायनी विभाग में परामर्श और उपचार के लिए संपर्क कर सकती हैं।बेस अस्पताल श्रीनगर में लगातार चिकित्सा सेवाओं के स्तर को ऊँचा उठाने की दिशा में कार्य कर रहा है।विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और आधुनिक तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता से अब बेस चिकित्सालय में जटिल ऑपरेशन भी सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि गढ़वाल मंडल के हर मरीज को यहां बेहतर इलाज की सुविधा मिले और किसी को बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।डॉ.आशुतोष सयाना,प्राचार्य,राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर