चारधाम यात्रा के दौरान पशु स्वास्थ्य पर विशेष सतर्कता बरतें विभाग-जिलाधिकारी
प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल।जिलाधिकारी डॉ.आशीष चौहान ने जिला कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए की चार धाम यात्रा के दृष्टिगत घोड़ा-खच्चरों को बीमारियों के संबंध में सरकार,शासन से जो भी दिशा निर्देश जारी होते हैं उसका जनपद में अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करवाएं।उन्होंने घोड़ा-खच्चरों में फैलने वाली संक्रामक बीमारी इक्विनफ्लुएंजा को लेकर घोड़ा-खच्चर पालकों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाने को कहा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जैसे ही बीमारी के लक्षण दिखें,तुरंत पशु को आराम दिया जाए,उचित खानपान की व्यवस्था की जाए और तुरंत चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाए।जिलाधिकारी ने बताया कि पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए प्रभावी दवाओं और हड्डी टूटने जैसी आपात स्थितियों में उपयोग होने वाले थॉमस स्प्लिंट जैसे उपकरणों की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने हेतु एक वेटनरी रिसर्च ग्रुप गठित किया गया है। इस समूह को निर्देश दिए गए हैं कि सस्ते,टिकाऊ और एडजस्टेबल उपकरण तैयार किए जाएं,जिससे पशुपालकों को सुलभ इलाज मिल सके। साथ ही,मेडिसिन की प्रभावशीलता पर भी यह समूह शोध करेगा।जिलाधिकारी ने पशु चिकित्सा के क्षेत्र में मौजूद अपार शोध संभावनाओं पर बल देते हुए कहा कि विभागीय दक्षता बढ़ाने के लिए नवाचार आवश्यक हैं।वीसी द्वारा आयोजित इस बैठक में मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा सहित वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी व पशुचिकित्साधिकारी उपस्थित थे।
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चारधाम यात्रा के दौरान पशु स्वास्थ्य पर विशेष सतर्कता बरतें विभाग-जिलाधिकारी
प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल।जिलाधिकारी डॉ.आशीष चौहान ने जिला कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए की चार धाम यात्रा के दृष्टिगत घोड़ा-खच्चरों को बीमारियों के संबंध में सरकार,शासन से जो भी दिशा निर्देश जारी होते हैं उसका जनपद में अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करवाएं।उन्होंने घोड़ा-खच्चरों में फैलने वाली संक्रामक बीमारी इक्विनफ्लुएंजा को लेकर घोड़ा-खच्चर पालकों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाने को कहा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जैसे ही बीमारी के लक्षण दिखें,तुरंत पशु को आराम दिया जाए,उचित खानपान की व्यवस्था की जाए और तुरंत चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाए।जिलाधिकारी ने बताया कि पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए प्रभावी दवाओं और हड्डी टूटने जैसी आपात स्थितियों में उपयोग होने वाले थॉमस स्प्लिंट जैसे उपकरणों की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने हेतु एक वेटनरी रिसर्च ग्रुप गठित किया गया है। इस समूह को निर्देश दिए गए हैं कि सस्ते,टिकाऊ और एडजस्टेबल उपकरण तैयार किए जाएं,जिससे पशुपालकों को सुलभ इलाज मिल सके। साथ ही,मेडिसिन की प्रभावशीलता पर भी यह समूह शोध करेगा।जिलाधिकारी ने पशु चिकित्सा के क्षेत्र में मौजूद अपार शोध संभावनाओं पर बल देते हुए कहा कि विभागीय दक्षता बढ़ाने के लिए नवाचार आवश्यक हैं।वीसी द्वारा आयोजित इस बैठक में मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा सहित वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी व पशुचिकित्साधिकारी उपस्थित थे।