प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। वन विभाग के तत्वावधान में मानव-वन्यजीव सह अस्तित्व विषय पर एक दिवसीय हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करना तथा सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना रहा। बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यशाला में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए हितधारकों ने भाग लिया। इस दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।विशेषज्ञों ने बताया कि वन्यजीवों के आवासों के क्षरण और मानव गतिविधियों के विस्तार के कारण यह संघर्ष बढ़ रहा है। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारी स्थानीय समुदाय के सदस्य और अन्य संबंधित पक्षों ने सहभागिता करते हुए संघर्ष को कम करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। विधायक रुद्रप्रयाग भरत सिंह चौधरी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल विज्ञान मीडिया और समुदाय के बीच की दूरी को कम करती है। इससे संरक्षण प्रयासों में लोगों की सुरक्षा और विश्वास को भी प्राथमिकता मिलती है। प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वन्यजीवों के प्रति जनधारणा को सकारात्मक दिशा देने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिम्मेदार और तथ्यपरक प्रस्तुतीकरण से जागरूकता बढ़ाई जा सकती है अनावश्यक भय कम किया जा सकता है और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत किया जा सकता है। कार्यशाला में उत्तराखंड के परिदृश्यों में मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रति सूचित सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने तथा प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए वन विभाग संरक्षण संगठनों मीडिया और स्थानीय समुदायों के बीच सतत सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी जनप्रतिनिधि स्कूली छात्र-छात्राएं वन विभाग के कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। वन विभाग के तत्वावधान में मानव-वन्यजीव सह अस्तित्व विषय पर एक दिवसीय हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करना तथा सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना रहा। बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यशाला में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए हितधारकों ने भाग लिया। इस दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।विशेषज्ञों ने बताया कि वन्यजीवों के आवासों के क्षरण और मानव गतिविधियों के विस्तार के कारण यह संघर्ष बढ़ रहा है। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारी स्थानीय समुदाय के सदस्य और अन्य संबंधित पक्षों ने सहभागिता करते हुए संघर्ष को कम करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। विधायक रुद्रप्रयाग भरत सिंह चौधरी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल विज्ञान मीडिया और समुदाय के बीच की दूरी को कम करती है। इससे संरक्षण प्रयासों में लोगों की सुरक्षा और विश्वास को भी प्राथमिकता मिलती है। प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वन्यजीवों के प्रति जनधारणा को सकारात्मक दिशा देने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिम्मेदार और तथ्यपरक प्रस्तुतीकरण से जागरूकता बढ़ाई जा सकती है अनावश्यक भय कम किया जा सकता है और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत किया जा सकता है। कार्यशाला में उत्तराखंड के परिदृश्यों में मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रति सूचित सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने तथा प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए वन विभाग संरक्षण संगठनों मीडिया और स्थानीय समुदायों के बीच सतत सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी जनप्रतिनिधि स्कूली छात्र-छात्राएं वन विभाग के कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।