प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में विश्व क्षय रोग दिवस (World Tuberculosis Day) के अवसर पर इस गंभीर बीमारी की रोकथाम एवं बचाव हेतु संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन एवं रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग द्वारा मेडिकल कॉलेज परिसर के ऑडिटोरियम में एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में क्षय रोग (टीबी) के प्रति जागरूकता बढ़ाना इसके समय पर निदान एवं उपचार के महत्व को समझाना तथा इससे जुड़े सामाजिक मिथकों को दूर करना था। इस अवसर पर क्षय रोग नियंत्रण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले टीबी चैंपियंस एवं स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानित भी किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि क्षय रोग आज भी देश के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है लेकिन जागरूकता समय पर जांच उचित उपचार और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में स्वास्थ्यकर्मियों विद्यार्थियों और आम जनता की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि पोषण स्वच्छता और जीवनशैली में सुधार के माध्यम से इस बीमारी से बचाव संभव है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे समाज में जागरूकता फैलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम के दौरान एमबीबीएस छात्रा श्रेया ने भारत में क्षय रोग नियंत्रण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत विश्व में टीबी के सर्वाधिक मामलों वाले देशों में शामिल है इसलिए इसके नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं और उनके प्रभावों की भी जानकारी दी। इसके पश्चात एमबीबीएस छात्र वाशु सिंह ने टीबी चैंपियंस की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि वे मरीजों के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं और उपचार के दौरान उन्हें मानसिक एवं सामाजिक सहयोग प्रदान करते हैं जिससे उपचार की सफलता दर में वृद्धि होती है। कार्यक्रम में एमबीबीएस छात्रों द्वारा ई-पोस्टर प्रस्तुति भी दी गई जिसमें टीबी के लक्षण बचाव उपचार और जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। डॉ.जानकी बर्तवाल ने मेडिकल कॉलेज द्वारा वर्ष भर में किए गए टीबी से संबंधित कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान ने स्क्रीनिंग उपचार और जनजागरूकता के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किए हैं। सोनाली अधिकारी ने टीबी से लड़ने में पोषण की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संतुलित आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और मरीज के शीघ्र स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। डॉ.आयुषी बेनीवाल ने भारत में टीबी के सामाजिक-आर्थिक निर्धारकों पर चर्चा करते हुए बताया कि गरीबी कुपोषण भीड़भाड़ और जागरूकता की कमी जैसे कारक इस बीमारी के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ.विक्की बक्शी ने टीबी से संबंधित नवीनतम अपडेट साझा करते हुए आधुनिक जांच तकनीकों नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के बारे में जानकारी दी जो इस रोग के प्रभावी नियंत्रण में सहायक हैं। डॉ.चैतन्य शाह ने नव-निदानित टीबी मरीजों में सह-रोगों एवं उनके जोखिम कारकों पर किए गए इंट्राम्यूरल अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि मधुमेह धूम्रपान और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसे कारक टीबी के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि द्वारा संबोधन दिया गया जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की तथा टीबी उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का संदेश दिया। इसके पश्चात टीबी स्वास्थ्य कर्मियों राजेन्एद्र थपलियाल शैलेंद्र चमोली सहित अन्य टीबी चैंपियंस को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अंत में डॉ.हरप्रीत सिंह डॉ.सुरेंद्र सिंह नेगी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम में संस्थान के समस्त संकाय सदस्य रेजिडेंट चिकित्सक इंटर्न पी.जी. छात्र-छात्राएं एमबीबीएस के सभी वर्ष के छात्र-छात्राएं एवं पैरामेडिकल छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में विश्व क्षय रोग दिवस (World Tuberculosis Day) के अवसर पर इस गंभीर बीमारी की रोकथाम एवं बचाव हेतु संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन एवं रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग द्वारा मेडिकल कॉलेज परिसर के ऑडिटोरियम में एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में क्षय रोग (टीबी) के प्रति जागरूकता बढ़ाना इसके समय पर निदान एवं उपचार के महत्व को समझाना तथा इससे जुड़े सामाजिक मिथकों को दूर करना था। इस अवसर पर क्षय रोग नियंत्रण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले टीबी चैंपियंस एवं स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानित भी किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि क्षय रोग आज भी देश के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है लेकिन जागरूकता समय पर जांच उचित उपचार और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में स्वास्थ्यकर्मियों विद्यार्थियों और आम जनता की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि पोषण स्वच्छता और जीवनशैली में सुधार के माध्यम से इस बीमारी से बचाव संभव है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे समाज में जागरूकता फैलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम के दौरान एमबीबीएस छात्रा श्रेया ने भारत में क्षय रोग नियंत्रण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत विश्व में टीबी के सर्वाधिक मामलों वाले देशों में शामिल है इसलिए इसके नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं और उनके प्रभावों की भी जानकारी दी। इसके पश्चात एमबीबीएस छात्र वाशु सिंह ने टीबी चैंपियंस की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि वे मरीजों के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं और उपचार के दौरान उन्हें मानसिक एवं सामाजिक सहयोग प्रदान करते हैं जिससे उपचार की सफलता दर में वृद्धि होती है। कार्यक्रम में एमबीबीएस छात्रों द्वारा ई-पोस्टर प्रस्तुति भी दी गई जिसमें टीबी के लक्षण बचाव उपचार और जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। डॉ.जानकी बर्तवाल ने मेडिकल कॉलेज द्वारा वर्ष भर में किए गए टीबी से संबंधित कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान ने स्क्रीनिंग उपचार और जनजागरूकता के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किए हैं। सोनाली अधिकारी ने टीबी से लड़ने में पोषण की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संतुलित आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और मरीज के शीघ्र स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। डॉ.आयुषी बेनीवाल ने भारत में टीबी के सामाजिक-आर्थिक निर्धारकों पर चर्चा करते हुए बताया कि गरीबी कुपोषण भीड़भाड़ और जागरूकता की कमी जैसे कारक इस बीमारी के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ.विक्की बक्शी ने टीबी से संबंधित नवीनतम अपडेट साझा करते हुए आधुनिक जांच तकनीकों नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के बारे में जानकारी दी जो इस रोग के प्रभावी नियंत्रण में सहायक हैं। डॉ.चैतन्य शाह ने नव-निदानित टीबी मरीजों में सह-रोगों एवं उनके जोखिम कारकों पर किए गए इंट्राम्यूरल अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि मधुमेह धूम्रपान और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसे कारक टीबी के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि द्वारा संबोधन दिया गया जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की तथा टीबी उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का संदेश दिया। इसके पश्चात टीबी स्वास्थ्य कर्मियों राजेन्एद्र थपलियाल शैलेंद्र चमोली सहित अन्य टीबी चैंपियंस को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अंत में डॉ.हरप्रीत सिंह डॉ.सुरेंद्र सिंह नेगी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम में संस्थान के समस्त संकाय सदस्य रेजिडेंट चिकित्सक इंटर्न पी.जी. छात्र-छात्राएं एमबीबीएस के सभी वर्ष के छात्र-छात्राएं एवं पैरामेडिकल छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।