प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। विकासखंड पोखड़ा क्षेत्र में बढ़ती मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने त्वरित और कड़े कदम उठाए हैं। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा जनसुरक्षा विशेष रूप से स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में सक्रिय गुलदार को पकड़ने के साथ आवश्यकता पड़ने पर उसे नष्ट करने की अनुमति प्रदान की गई है। डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव ने बताया कि संवेदनशील स्थिति को देखते हुए अनुमति का अनुरोध किया गया था जिस पर वन संरक्षक की संस्तुति के आधार पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गुलदार को पिंजरे में कैद करने और ट्रैंक्युलाईज कर पकड़ने की अनुमति दी गई है। उन्होंने बताया कि यदि सभी प्रयास विफल रहते हैं तो अंतिम विकल्प के रूप में उसे नष्ट करने की भी अनुमति दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल चिन्हित गुलदार पर लागू होगा और एक माह तक प्रभावी रहेगा। निगरानी के लिए क्षेत्र में तीन पिंजरे और बीस ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही दो लाइसेंसधारी शिकारियों की तैनाती की गई है और ड्रोन सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। डीएफओ ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में 6 अप्रैल तक विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है। विद्यालय खुलने के बाद वन और राजस्व विभाग की टीमें बच्चों को घर से स्कूल और वापस सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था करेंगी। साथ ही ग्रामीणों के लिए पशुओं के चारा-पत्ती की व्यवस्था भी की जा रही है। यह व्यवस्थाएं तब तक जारी रहेंगी जब तक गुलदार को पकड़ा या मार गिराया नहीं जाता।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। विकासखंड पोखड़ा क्षेत्र में बढ़ती मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने त्वरित और कड़े कदम उठाए हैं। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा जनसुरक्षा विशेष रूप से स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में सक्रिय गुलदार को पकड़ने के साथ आवश्यकता पड़ने पर उसे नष्ट करने की अनुमति प्रदान की गई है। डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव ने बताया कि संवेदनशील स्थिति को देखते हुए अनुमति का अनुरोध किया गया था जिस पर वन संरक्षक की संस्तुति के आधार पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गुलदार को पिंजरे में कैद करने और ट्रैंक्युलाईज कर पकड़ने की अनुमति दी गई है। उन्होंने बताया कि यदि सभी प्रयास विफल रहते हैं तो अंतिम विकल्प के रूप में उसे नष्ट करने की भी अनुमति दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल चिन्हित गुलदार पर लागू होगा और एक माह तक प्रभावी रहेगा। निगरानी के लिए क्षेत्र में तीन पिंजरे और बीस ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही दो लाइसेंसधारी शिकारियों की तैनाती की गई है और ड्रोन सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। डीएफओ ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में 6 अप्रैल तक विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है। विद्यालय खुलने के बाद वन और राजस्व विभाग की टीमें बच्चों को घर से स्कूल और वापस सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था करेंगी। साथ ही ग्रामीणों के लिए पशुओं के चारा-पत्ती की व्यवस्था भी की जा रही है। यह व्यवस्थाएं तब तक जारी रहेंगी जब तक गुलदार को पकड़ा या मार गिराया नहीं जाता।