प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। रुद्रप्रयाग जनपद में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियानों के बावजूद समाज में यह कुरीति बनी हुई है लेकिन महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के प्रयासों से इस वर्ष अब तक 26 मामलों में बाल विवाह रुकवाए जा चुके हैं। इसी क्रम में दो दिन के भीतर दूसरी बाल विवाह की घटना को समय रहते रोक दिया गया। मामले में स्वयं नाबालिग बालिका द्वारा अपने परिजनों के माध्यम से गुपचुप विवाह कराए जाने की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन को दी गई। सूचना मिलते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ.अखिलेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर टीम तत्काल सक्रिय हुई। वन स्टॉप सेंटर से केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रंजू खन्ना सदस्य ममता शैली और दलवीर सिंह रावत चाइल्ड हेल्पलाइन से केस वर्कर अखिलेश और सामाजिक कार्यकर्ता पूजा भंडारी साथ ही तिलवाड़ा चौकी से कांस्टेबल डी सी पुरोहित टीम के साथ बालिका द्वारा बताए गए पते पर पहुंचे।
शुरुआत में परिजनों ने टीम को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन सख्ती बरतने पर बालिका की मां ने बताया कि वे देहरादून में रहते हैं और पड़ोस में एक युवक से बालिका का प्रेम संबंध था। परिवार को आशंका थी कि बालिका घर से भाग सकती है इसी कारण उन्होंने जल्दबाजी में विवाह कराने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि बालिका का विवाह उसी रात आयोजित किया जाना था जिसमें सीमित लोगों को आमंत्रित किया गया था। मौके पर पहुंची टीम ने परिजनों को स्पष्ट किया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसमें दो वर्ष तक की सजा तथा एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। टीम की सख्ती और समझाइश के बाद परिजनों ने तुरंत लड़के पक्ष से संपर्क कर बारात न लाने को कहा और विवाह को रद्द कर दिया। इसके साथ ही परिजनों को बाल विवाह से संबंधित कानूनी प्रावधानों और सख्त दंड के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई तथा भविष्य में इस प्रकार की गलती न करने की चेतावनी दी गई। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से एक और बाल विवाह को समय रहते रोका जा सका जिससे नाबालिग बालिका का भविष्य सुरक्षित किया गया।
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प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। रुद्रप्रयाग जनपद में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियानों के बावजूद समाज में यह कुरीति बनी हुई है लेकिन महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के प्रयासों से इस वर्ष अब तक 26 मामलों में बाल विवाह रुकवाए जा चुके हैं। इसी क्रम में दो दिन के भीतर दूसरी बाल विवाह की घटना को समय रहते रोक दिया गया। मामले में स्वयं नाबालिग बालिका द्वारा अपने परिजनों के माध्यम से गुपचुप विवाह कराए जाने की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन को दी गई। सूचना मिलते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ.अखिलेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर टीम तत्काल सक्रिय हुई। वन स्टॉप सेंटर से केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रंजू खन्ना सदस्य ममता शैली और दलवीर सिंह रावत चाइल्ड हेल्पलाइन से केस वर्कर अखिलेश और सामाजिक कार्यकर्ता पूजा भंडारी साथ ही तिलवाड़ा चौकी से कांस्टेबल डी सी पुरोहित टीम के साथ बालिका द्वारा बताए गए पते पर पहुंचे।
शुरुआत में परिजनों ने टीम को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन सख्ती बरतने पर बालिका की मां ने बताया कि वे देहरादून में रहते हैं और पड़ोस में एक युवक से बालिका का प्रेम संबंध था। परिवार को आशंका थी कि बालिका घर से भाग सकती है इसी कारण उन्होंने जल्दबाजी में विवाह कराने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि बालिका का विवाह उसी रात आयोजित किया जाना था जिसमें सीमित लोगों को आमंत्रित किया गया था। मौके पर पहुंची टीम ने परिजनों को स्पष्ट किया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसमें दो वर्ष तक की सजा तथा एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। टीम की सख्ती और समझाइश के बाद परिजनों ने तुरंत लड़के पक्ष से संपर्क कर बारात न लाने को कहा और विवाह को रद्द कर दिया। इसके साथ ही परिजनों को बाल विवाह से संबंधित कानूनी प्रावधानों और सख्त दंड के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई तथा भविष्य में इस प्रकार की गलती न करने की चेतावनी दी गई। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से एक और बाल विवाह को समय रहते रोका जा सका जिससे नाबालिग बालिका का भविष्य सुरक्षित किया गया।