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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। नरेन्द्र संगीत पर केन्द्रित सात दिवसीय कार्यशाला के पांचवें दिन का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि रंगकर्मी और वरिष्ठ पत्रकार दीपक डोभाल ने कहा कि नरेन्द्र सिंह नेगी जिनके संगीत पर केन्द्रित यह कार्यक्रम है वे उत्तराखण्ड की संस्कृति के सबसे बड़े आलोक स्तम्भ हैं। जिस स्तम्भ पर उत्तराखण्ड की पूरी संस्कृति घूम रही है उस स्तम्भ का नाम है नरेन्द्र सिंह नेगी।वे यहां की लोक-संस्कृति के एकमात्र स्तम्भ है उनके इर्द-गिर्द कोई दूसरा नही है इस बात को स्वीकार करने में गुरेज नहीं होना चाहिए। देश की संसद टीवी में लम्बे समय तक काम करने वाले पत्रकार दीपक डोभाल इसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने इस प्रेक्षागृह की एक-एक ईंट को चिनते हुए देखा है और आज उसी प्रेक्षागृह के मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में खड़ा होना सौभाग्य की बात है। आज तक जीवन में मैंने जो पाया वह एक तरफ और आज का यह पुनीत अवसर एक तरफ है। डोभाल ने कहा कि लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र के इस प्रेक्षागृह ने श्रीनगर को उत्तराखण्ड के रंगमंच के नक्शे पर स्थापित किया। इसको लेकर हमारी अपनी संकल्पनाएं रहीं हैं। उत्तराखण्ड का रंगमंच समृद्ध रंगमंच है। यहां का चक्रव्यूह पाण्डव नृत्य मुखौटा शैली अनुपम है। लोगों ने महाभारत को शब्दों में देखा है लेकिन उत्तराखंड में तो महाभारत के जीते-जागते प्रतीक हैं। यहां के लिए पाण्डव किंवदंती नहीं हैं। डोभाल अपने अभिनय के लिए भी खूब पहचाने जाते हैं उन्होंने कहा कि नरेन्द्र सिंह नेगी जी के गीतों में अभिनय से हम स्टारडम बने। साहित्य के मंच पर पहली बार नेगी जी के सानिध्य में ही प्रवेश करने का सौभाग्य मिला और उनके संगीत पर केन्द्रित इस कार्यक्रम में सम्मिलित होना गौरव की बात है। संगीत कार्यशाला के पांचवे दिन कलाकारों ने लोक संस्कृति पर केन्द्रित नेगी जी के लिखे गीतों की विविधता से सतरंगी छटा बिखेरी। अखिलेश कोहली ने अबरि दौं तू लम्बी छुट्टि ल्हेकी ऐई गीत गाकर जलमग्न टिहरी की यादों को ताजा कर दिया। प्रिया ठक्कर ने घौरै रौ घौरै रौ राणी बलम्पा अंशिका पंवार ने तेरी पिड़ा मा द्वी आंसु मेरा भी तौरी जाला अंजलि रावत ने ओटूवा बेलेण ओटूवा बेलेण हार्दिक कण्डारी ने त्यारा रूप की झौळ मा नौणी सि ज्यू म्यारु राजेन्द्र जोशी ने मेळा खौळों मा रौळा थौळौं मा कुसुम खत्री ने छान्यूं मा कर्यूं डेरू घर गौंउ छोड़्यूं चा किरन जोशी ने जै अम्बा जगदम्बा जै माता राणी शालिनी डालिया ने तेरो भाग त्वे दगड़ीमेरो भाग मैं दगड़ी प्रमीत कुमार ने मेरा औण से हर्ष हो कै त ह्वे ल्यो न हो मेरा जाणा को दुख कै न हो गाया। दिव्यांग कलाकार जो दृष्टि विहीन हैं सौरभ थपलियाल ने मुल-मुल केकू हैंसणी छै तू हे कुळैं की डाळी” गाकर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम में चम्बा से आए कलाकार राजेन्द्र जोशी ने पर्वतीय अंचल में मिलने वाले पक्षियों जिनका लोक गीतों में खूब वर्णन होता है जैसे-हिलांस घुघूती कागा की आवाजें सुनाकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। डॉ.राहुल बहुगुणा ने प्रतिभागी गायकों को प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह प्रदान किए। कार्यक्रम का संचालन उपनिदेशक डॉ.संजय पाण्डेय और गणेश खुगशाल गणी ने संयुक्त रूप से किया।

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