प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने गुरुवार को विकासखंड कोट के अंतर्गत कोट और देवल गांव का भ्रमण कर पॉलीहाउस आधारित खेती सब्जी उत्पादन तथा लिलियम पुष्प उत्पादन गतिविधियों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और उत्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलें पुष्प उत्पादन और संरक्षित खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्पादन भंडारण और विपणन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है जिससे युवाओं के लिए भी स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कोट गांव में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पॉलीहाउस में उगाई जा रही विभिन्न सब्जियों तथा लिलियम पुष्प उत्पादन का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ मशरूम उत्पादन औषधीय एवं सुगंधित पौधों तथा अन्य लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृषि में विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने किसानों से उनकी वार्षिक आय उत्पादन बाजार व्यवस्था तथा खेती से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि किसानों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। महिला कृषकों ने जिलाधिकारी को बताया कि यदि क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो लिलियम फूलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और उन्हें उचित समय पर बेहतर मूल्य पर बाजार में बेचा जा सकता है। इस पर जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि क्षेत्र में उपलब्ध किसी अनुपयोगी सरकारी भवन का चिन्हीकरण कर वहां कोल्ड स्टोरेज विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज की सुविधा मिलने से किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। किसानों ने यह भी बताया कि परिवहन के सीमित साधनों के कारण उनके उत्पाद समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाते हैं। उन्होंने समूह आधारित यूटिलिटी वाहन की व्यवस्था की मांग रखी जिससे कृषि एवं पुष्प उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बड़े व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचाया जा सके। इस पर जिलाधिकारी ने किसानों के उपयोग के लिए यूटिलिटी वाहन उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्पादन के साथ-साथ समय पर विपणन भी किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बाद जिलाधिकारी देवल गांव पहुंचीं जहां उन्होंने प्रगतिशील कृषक नरेश द्वारा संचालित पॉलीहाउस, सब्जी उत्पादन और लिलियम खेती का निरीक्षण किया। उन्होंने खेती में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों की सराहना करते हुए अन्य किसानों को भी ऐसे नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों को सब्जी उत्पादन के साथ-साथ पुष्प उत्पादन मशरूम फलोत्पादन तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जुड़ने की सलाह दी। जिलाधिकारी ने उद्यान एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र के दस प्रमुख कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों की विस्तृत बुकलेट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसमें उत्पादों की विशेषताएं उत्पादन क्षमता बाजार संभावनाएं और ब्रांडिंग संबंधी जानकारी शामिल की जाए। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने के साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। उन्होंने क्षेत्र में नए पॉलीहाउस विकसित करने के भी निर्देश दिए। जल संरक्षण को कृषि विकास का आधार बताते हुए जिलाधिकारी ने वाटर हार्वेस्टिंग टैंक निर्माण के प्रस्तावों को जिला योजना में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षा जल संरक्षण से सिंचाई सुविधाएं मजबूत होंगी और किसानों को वर्षभर खेती करने में सहायता मिलेगी। देवल गांव में जिलाधिकारी ने लिलियम उत्पादन से जुड़ी महिला कृषकों से भी संवाद किया। उन्होंने महिलाओं की समस्याएं सुनीं तथा सिंचाई पेयजल और विपणन से संबंधित आवश्यकताओं की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला कृषकों को कृषि एवं उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने उद्यान विभाग को निर्देश दिए कि सब्जी लहसुन लिलियम और अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए बेहतर विपणन तंत्र विकसित किया जाए ताकि किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके। जिलाधिकारी ने कहा कि आधुनिक खेती वैज्ञानिक भंडारण प्रभावी विपणन व्यवस्था और मूल्य संवर्धन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है। निरीक्षण के दौरान जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी खंड विकास अधिकारी अमित बिजल्वाण नायब तहसीलदार झबर सिंह असवाल सहायक कृषि अधिकारी अमित पंत कानूनगो संजय सिंह नेगी सहित अन्य अधिकारी और स्थानीय कृषक उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने गुरुवार को विकासखंड कोट के अंतर्गत कोट और देवल गांव का भ्रमण कर पॉलीहाउस आधारित खेती सब्जी उत्पादन तथा लिलियम पुष्प उत्पादन गतिविधियों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और उत्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलें पुष्प उत्पादन और संरक्षित खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उत्पादन भंडारण और विपणन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है जिससे युवाओं के लिए भी स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कोट गांव में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पॉलीहाउस में उगाई जा रही विभिन्न सब्जियों तथा लिलियम पुष्प उत्पादन का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ मशरूम उत्पादन औषधीय एवं सुगंधित पौधों तथा अन्य लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृषि में विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने किसानों से उनकी वार्षिक आय उत्पादन बाजार व्यवस्था तथा खेती से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि किसानों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। महिला कृषकों ने जिलाधिकारी को बताया कि यदि क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो लिलियम फूलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और उन्हें उचित समय पर बेहतर मूल्य पर बाजार में बेचा जा सकता है। इस पर जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि क्षेत्र में उपलब्ध किसी अनुपयोगी सरकारी भवन का चिन्हीकरण कर वहां कोल्ड स्टोरेज विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज की सुविधा मिलने से किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। किसानों ने यह भी बताया कि परिवहन के सीमित साधनों के कारण उनके उत्पाद समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाते हैं। उन्होंने समूह आधारित यूटिलिटी वाहन की व्यवस्था की मांग रखी जिससे कृषि एवं पुष्प उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बड़े व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचाया जा सके। इस पर जिलाधिकारी ने किसानों के उपयोग के लिए यूटिलिटी वाहन उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्पादन के साथ-साथ समय पर विपणन भी किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बाद जिलाधिकारी देवल गांव पहुंचीं जहां उन्होंने प्रगतिशील कृषक नरेश द्वारा संचालित पॉलीहाउस, सब्जी उत्पादन और लिलियम खेती का निरीक्षण किया। उन्होंने खेती में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों की सराहना करते हुए अन्य किसानों को भी ऐसे नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों को सब्जी उत्पादन के साथ-साथ पुष्प उत्पादन मशरूम फलोत्पादन तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जुड़ने की सलाह दी। जिलाधिकारी ने उद्यान एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र के दस प्रमुख कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों की विस्तृत बुकलेट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसमें उत्पादों की विशेषताएं उत्पादन क्षमता बाजार संभावनाएं और ब्रांडिंग संबंधी जानकारी शामिल की जाए। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने के साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। उन्होंने क्षेत्र में नए पॉलीहाउस विकसित करने के भी निर्देश दिए। जल संरक्षण को कृषि विकास का आधार बताते हुए जिलाधिकारी ने वाटर हार्वेस्टिंग टैंक निर्माण के प्रस्तावों को जिला योजना में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षा जल संरक्षण से सिंचाई सुविधाएं मजबूत होंगी और किसानों को वर्षभर खेती करने में सहायता मिलेगी। देवल गांव में जिलाधिकारी ने लिलियम उत्पादन से जुड़ी महिला कृषकों से भी संवाद किया। उन्होंने महिलाओं की समस्याएं सुनीं तथा सिंचाई पेयजल और विपणन से संबंधित आवश्यकताओं की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला कृषकों को कृषि एवं उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने उद्यान विभाग को निर्देश दिए कि सब्जी लहसुन लिलियम और अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए बेहतर विपणन तंत्र विकसित किया जाए ताकि किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके। जिलाधिकारी ने कहा कि आधुनिक खेती वैज्ञानिक भंडारण प्रभावी विपणन व्यवस्था और मूल्य संवर्धन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है। निरीक्षण के दौरान जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी खंड विकास अधिकारी अमित बिजल्वाण नायब तहसीलदार झबर सिंह असवाल सहायक कृषि अधिकारी अमित पंत कानूनगो संजय सिंह नेगी सहित अन्य अधिकारी और स्थानीय कृषक उपस्थित रहे।