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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत प्रस्तावित सीता सर्किट परियोजना को मूर्त रूप देने की दिशा में जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने फलस्वाड़ी गांव पहुंचकर प्रस्तावित कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को परियोजना को स्थानीय संस्कृति पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला और धार्मिक महत्व के अनुरूप विकसित करने के निर्देश दिए। प्रस्तावित सीता सर्किट में सीता मंदिर के साथ रघुनाथ मंदिर वाल्मीकि मंदिर और लक्ष्मण मंदिर को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों को एकीकृत कर एक समग्र धार्मिक एवं पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित करना है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने क्षेत्र के धार्मिक सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अवलोकन किया। कार्यदायी संस्था के आर्किटेक्ट ने जिलाधिकारी को सीता सर्किट के प्रस्तावित लेआउट और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि परियोजना का विकास स्थानीय पहाड़ी वास्तुकला और पारंपरिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में आधुनिक टाइल्स के स्थान पर स्थानीय पत्थर लकड़ी और पठाल जैसी पारंपरिक निर्माण सामग्री का उपयोग किया जाए जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक सौंदर्य सुरक्षित रह सके। जिलाधिकारी ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं के लिए धर्मशाला प्रतीक्षालय सार्वजनिक सुविधाएं तथा आकर्षक और भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण प्रस्तावित किया जाएगा। इस दौरान ग्रामीणों ने मंदिर तक सड़क निर्माण की मांग रखी। पटवारी ने बताया कि पूर्व में प्रस्तावित सड़क मार्ग के अंतर्गत कुछ निजी कृषि भूमि आ रही है जिसके कारण सड़क निर्माण से पहले भूमि का स्पष्ट चिन्हीकरण और संबंधित ग्रामीणों की सहमति आवश्यक है। इस पर जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि संबंधित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित कर प्रस्तावित सड़क के एलाइनमेंट भूमि की स्थिति और निर्माण कार्य से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाए ताकि परियोजना की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जा सके और क्षेत्रवासियों को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने मंदिर परिसर में प्रस्तावित संरचनाओं के लिए उपयुक्त स्थल चयन करने के निर्देश भी दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि सीता सर्किट को और अधिक आकर्षक तथा धार्मिक दृष्टि से समृद्ध बनाने के लिए रघुनाथ मंदिर वाल्मीकि मंदिर और लक्ष्मण मंदिर को भी सर्किट से जोड़ा जाए। साथ ही पूरे क्षेत्र में धार्मिक थीम आधारित साइनेज स्थापित किए जाएं ताकि आगंतुकों को एक समग्र आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को पेयजल शौचालय विश्राम स्थल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने संस्कृति पर्यटन ग्रामीण निर्माण और अन्य संबंधित विभागों को संयुक्त बैठक आयोजित कर परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर समन्वित कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही ग्रामीण निर्माण विभाग को प्रस्तावित सड़क के एलाइनमेंट का परीक्षण कर शीघ्र विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी ने सीता सर्किट के अंतर्गत आने वाले लक्ष्मण मंदिर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक एमिनिटी सेंटर विकसित करने के निर्देश दिए जिसमें प्रतीक्षालय शेड वॉशरूम तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया। स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क से मंदिर होते हुए गदेरे तक पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए विस्तृत प्राक्कलन तैयार करने को भी कहा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सीता सर्किट परियोजना का प्राक्कलन दो चरणों में तैयार किया जाए ताकि प्राथमिकता के आधार पर कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से परियोजना का अंतिम डिजाइन और प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा। जिलाधिकारी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। निरीक्षण के दौरान प्रधान मीनाक्षी भट्ट खंड विकास अधिकारी अमित बिजल्वाण डीटीडीओ खुशाल सिंह नेगी प्रभारी अधिकारी पुरातत्व अनिरुद्ध सिंह बिष्ट आर्किटेक्ट धीरेंद्र सिंह पटवारी दुर्गेश तथा स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।

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