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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन और सीमित रोजगार की चुनौती के बीच बागवानी आज आजीविका का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित बागवानी एवं किसान हितैषी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय बढ़ाने का नया आधार तैयार कर रही हैं। पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड थलीसैंण के सुकई (बंज्वाड़) गांव निवासी दीनदयाल बिष्ट इसकी प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आए हैं। दीनदयाल बिष्ट वर्तमान में विकासखंड बीरोंखाल स्थित राजकीय इंटर कॉलेज बैंजरो में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता हैं। कोविड लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने गांव की अनुपयोगी भूमि का सदुपयोग करने का निर्णय लिया और वैज्ञानिक पद्धति से सेब एवं कीवी की बागवानी शुरू की। छोटे स्तर से शुरू हुआ उनका यह प्रयास आज उनकी अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत बन चुका है। बाग के विकास के लिए उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ उठाया। मनरेगा के माध्यम से बाग की घेरबाड़ कराई गई। कृषि विभाग की सहायता से जियोटैंक और हाइड्रो प्रोजेक्ट पाइपलाइन के जरिए सिंचाई व्यवस्था विकसित की गई। वहीं उद्यान विभाग ने पौध चयन पौधरोपण रखरखाव तथा वैज्ञानिक प्रबंधन संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया। इन प्रयासों से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ। आज दीनदयाल बिष्ट आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक बागवानी की बदौलत प्रत्येक सीजन में लगभग तीन से चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर पर्वतीय क्षेत्रों में भी बागवानी को लाभकारी एवं टिकाऊ स्वरोजगार का माध्यम बनाया जा सकता है। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि जनपद में सेब कीवी सहित उच्च मूल्य वाली फल बागवानी को बढ़ावा देने के लिए किसानों को तकनीकी परामर्श प्रशिक्षण तथा विभागीय योजनाओं के माध्यम से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु इन फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल है और किसान वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन एवं अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर बागवानी अपनाने का आह्वान किया। दीनदयाल बिष्ट की सफलता आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है। उनकी उपलब्धि प्रदेश के युवाओं और किसानों को यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं आधुनिक तकनीक और सतत परिश्रम के बल पर गांव में रहकर भी सम्मानजनक आय अर्जित की जा सकती है तथा पलायन जैसी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।

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