14 जून रक्तदान महादान: पौड़ी गढ़वाल में रक्तदान शिविरों का आयोजन स्वस्थ व्यक्ति बन सकता है किसी की जान का सहारा
प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल।अगर आप स्वस्थ हैं तो आपका एक यूनिट रक्त किसी ज़रूरतमंद की धड़कती सांसों को थाम सकता है। यही संदेश लेकर हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग,रेडक्रॉस सोसायटी और कई सामाजिक संगठन मिलकर समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन करते हैं। जिले में वर्तमान में चार प्रमुख ब्लड बैंक संचालित हैं,जिनमें बेस अस्पताल श्रीकोट में 400 यूनिट,जिला चिकित्सालय पौड़ी में 50 यूनिट,कोटद्वार में 250 यूनिट और हंस फाउंडेशन सतपुली में 100 यूनिट रक्त संग्रह की क्षमता है। इन ब्लड बैंकों से आपात स्थिति में मरीजों को रक्त की आपूर्ति की जाती है।जनपद में कई युवा और स्वयंसेवी संगठन नियमित रक्तदान कर समाज में सेवा का उदाहरण पेश कर रहे हैं। रक्तदान करने वालों को प्रमाण पत्र,हेल्थ चेकअप जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं,ताकि वे इस सेवा से जुड़ने के लिए और अधिक प्रेरित हों।मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.पारुल गोयल का कहना है कि गंभीर बीमारियों,बड़े ऑपरेशन,सड़क हादसों और गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के दौरान रक्त की जरूरत आम होती जा रही है। अगर हर स्वस्थ व्यक्ति साल में कम से कम एक बार भी रक्तदान करें तो यह संकट काफी हद तक टल सकता है। उन्होंने बताया कि 17 से 66 वर्ष तक के स्वस्थ पुरुष और महिलाएं,जिनका वजन 45 किलोग्राम से अधिक है,वह आसानी से रक्तदान कर सकते हैं। शरीर में 24 घंटे के भीतर नया रक्त बन जाता है। रक्तदान से कोई कमज़ोरी नहीं आती,बल्कि यह शरीर के लिए लाभप्रद ही होता है।सीएमओ ने बताया कि ई-रक्तकोष पोर्टल के माध्यम से रक्तदाताओं का पंजीकरण किया जाता है,जिससे आवश्यकता पड़ने पर तत्काल संपर्क किया जा सके। साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ब्लड बैंक में रक्त अधिकतम तीन माह तक ही भंडारण किया जा सकता है। इसके बाद उसका उपयोग नहीं हो पाता। उन्होंने यह भी कहा कि एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचायी जा सकती है।इसलिए रक्तदान सिर्फ ज़रूरत नहीं, ज़िम्मेदारी भी है।
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14 जून रक्तदान महादान: पौड़ी गढ़वाल में रक्तदान शिविरों का आयोजन स्वस्थ व्यक्ति बन सकता है किसी की जान का सहारा
प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल।अगर आप स्वस्थ हैं तो आपका एक यूनिट रक्त किसी ज़रूरतमंद की धड़कती सांसों को थाम सकता है। यही संदेश लेकर हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग,रेडक्रॉस सोसायटी और कई सामाजिक संगठन मिलकर समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन करते हैं। जिले में वर्तमान में चार प्रमुख ब्लड बैंक संचालित हैं,जिनमें बेस अस्पताल श्रीकोट में 400 यूनिट,जिला चिकित्सालय पौड़ी में 50 यूनिट,कोटद्वार में 250 यूनिट और हंस फाउंडेशन सतपुली में 100 यूनिट रक्त संग्रह की क्षमता है। इन ब्लड बैंकों से आपात स्थिति में मरीजों को रक्त की आपूर्ति की जाती है।जनपद में कई युवा और स्वयंसेवी संगठन नियमित रक्तदान कर समाज में सेवा का उदाहरण पेश कर रहे हैं। रक्तदान करने वालों को प्रमाण पत्र,हेल्थ चेकअप जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं,ताकि वे इस सेवा से जुड़ने के लिए और अधिक प्रेरित हों।मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.पारुल गोयल का कहना है कि गंभीर बीमारियों,बड़े ऑपरेशन,सड़क हादसों और गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के दौरान रक्त की जरूरत आम होती जा रही है। अगर हर स्वस्थ व्यक्ति साल में कम से कम एक बार भी रक्तदान करें तो यह संकट काफी हद तक टल सकता है। उन्होंने बताया कि 17 से 66 वर्ष तक के स्वस्थ पुरुष और महिलाएं,जिनका वजन 45 किलोग्राम से अधिक है,वह आसानी से रक्तदान कर सकते हैं। शरीर में 24 घंटे के भीतर नया रक्त बन जाता है। रक्तदान से कोई कमज़ोरी नहीं आती,बल्कि यह शरीर के लिए लाभप्रद ही होता है।सीएमओ ने बताया कि ई-रक्तकोष पोर्टल के माध्यम से रक्तदाताओं का पंजीकरण किया जाता है,जिससे आवश्यकता पड़ने पर तत्काल संपर्क किया जा सके। साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ब्लड बैंक में रक्त अधिकतम तीन माह तक ही भंडारण किया जा सकता है। इसके बाद उसका उपयोग नहीं हो पाता। उन्होंने यह भी कहा कि एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचायी जा सकती है।इसलिए रक्तदान सिर्फ ज़रूरत नहीं, ज़िम्मेदारी भी है।