प्रदीप कुमार
अगस्त्यमुनि-रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि अपने हुनर मेहनत और सामूहिक प्रयासों से स्वरोजगार की नई मिसाल भी कायम कर रही हैं। जनपद रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि में सुमतिसुधा स्वयं सहायता समूह की छह महिलाओं ने मिलकर स्वरोजगार की ऐसी ही सफल कहानी लिखी है। वर्ष 2022 से समूह की छह महिलाएं ‘सरस रेस्टोरेंट’ का कुशलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। रेस्टोरेंट के माध्यम से सभी छह महिलाओं को नियमित रोजगार मिल रहा है और वे अपने-अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। समूह की महिलाओं ने अपने हुनर को रोजगार से जोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया है।
*पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों ने बनाई अलग पहचान*
सरस रेस्टोरेंट की खास पहचान यहां परोसे जाने वाले पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन और स्थानीय उत्पाद हैं। रेस्टोरेंट में आने वाले लोगों को मंडुवा झंगोरा तथा विभिन्न प्रकार की पहाड़ी दालों से तैयार स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इससे जहां स्थानीय उत्पादों को बाजार मिल रहा है वहीं पहाड़ की पारंपरिक खान-पान संस्कृति को भी आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। समूह की महिलाओं का यह प्रयास स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उत्पादों को बेहतर तरीके से उपयोग में लाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। पारंपरिक खाद्य पदार्थों को आधुनिक बाजार से जोड़कर महिलाओं ने अपनी आय का स्थायी जरिया तैयार किया है।
*एनआरएलएम से मिला सहयोग और मार्गदर्शन*
महिलाओं के इस प्रयास को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एनआरएलएम के माध्यम से सहयोग और मार्गदर्शन भी प्राप्त हो रहा है। समूह की महिलाओं ने सरकारी सहयोग का लाभ उठाते हुए अपने हुनर और मेहनत को रोजगार के अवसर में बदला। आज वे आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही हैं और अपने प्रयासों से अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
*सालाना 12 से 13 लाख रुपये की आमदनी*
सरस रेस्टोरेंट के सफल संचालन से समूह की छह महिलाओं को वर्षभर में लगभग 12 से 13 लाख रुपये की आमदनी प्राप्त हो रही है। समूह संचालन पूनम पंवार बताती हैं कि रेस्टोरेंट से होने वाली आय से न केवल छह परिवारों की आजीविका मजबूत हुई है बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी अपने हुनर के माध्यम से रोजगार शुरू करने की प्रेरणा मिल रही है। सुमतिसुधा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की यह सफलता इस बात की सकारात्मक मिसाल है कि यदि हुनर मेहनत सामूहिक प्रयास और उचित मार्गदर्शन मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार और समाज की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनका यह प्रयास महिला सशक्तीकरण के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक पहाड़ी खान-पान को बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रेरणादायी कदम है।
