प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में भारतीय भाषाओं में पुस्तक लेखन के लिए शिक्षकों की क्षमता विकास पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का 16 अक्टूबर 2026 को समापन हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय और शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार की भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र का शुभारंभ डॉ.चंदन श्रीवास्तव एकेडमिक कोऑर्डिनेटर डॉ.अलका सूरी स्टेट कोऑर्डिनेटर तथा डॉ.आलोक सागर गौतम कोऑर्डिनेटर ने किया। इस सत्र में विभिन्न विषयों के शिक्षाविदों और प्रतिभागियों ने अपने-अपने विषयों के अनुरूप समूह बनाकर पावरपॉइंट प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय भाषाओं में पुस्तक लेखन की संभावनाओं आवश्यकताओं और अवसरों पर चर्चा की। समूह प्रस्तुतियों का प्रमुख केंद्र विषय मानचित्रण और संस्थान मानचित्रण रहा। प्रतिभागियों ने पुस्तक लेखन के लिए विषयों की पहचान उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों तथा संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। भारतीय भाषा समिति से जुड़े कोऑर्डिनेटर डॉ.अलका सूरी डॉ.आलोक सागर गौतम और डॉ.चंदन श्रीवास्तव के साथ डॉ.रचना विश्वकर्मा डॉ.सुधांशु भूषण तथा प्रोफेसर नारायण दत्त ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों और विचारों को सुना। उन्होंने प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण सुझाव और फीडबैक प्रदान किया। साथ ही भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक साहित्य के सृजन की दिशा में सामूहिक प्रयासों के महत्व पर बल दिया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में समापन समारोह आयोजित किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर वाई पी रैवानीउपस्थित रहे। इस दौरान डॉ. रचना विश्वकर्मा की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों का स्वागत डॉ.आलोक सागर गौतम ने किया। मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों ने विश्वविद्यालय में निरंतर आयोजित हो रही शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने भारतीय भाषाओं में शैक्षणिक पुस्तकों के लेखन और प्रकाशन को प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं को महत्वपूर्ण बताया। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के अंत में डॉ.आलोक सागर गौतम ने कार्यशाला के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले विश्वविद्यालय के सभी संबंधित हितधारकों तथा भारतीय भाषा समिति के समन्वयकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक संचालन दर्शनशास्त्र विभाग की प्रोफेसर कविता भट्ट ने किया। उन्होंने सभी सत्रों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य भी किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर प्रोफेसर दीपक कुमार भी उपस्थित रहे।
