प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। थराली पुलिस ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अकेलेपन और जीवन से निराशा से जूझ रही 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मदद की। डायल-112 के माध्यम से सूचना मिलने पर पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और महिला से आत्मीयता के साथ बातचीत कर उसकी परेशानी को समझा। इसके बाद पुलिस ने महिला को सुरक्षित थाने लाकर उसके परिजनों को बुलाया और सकुशल उनकी सुपुर्दगी में दिया। थराली पुलिस को डायल-112 के माध्यम से एक बुजुर्ग महिला के संबंध में सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची जहां 85 वर्षीय महिला परेशान अवस्था में मिली। पुलिस कर्मियों ने महिला से बेहद संवेदनशीलता और आत्मीयता के साथ बातचीत की। बातचीत के दौरान महिला ने जीवन से निराशा और अकेलेपन से परेशान होने की बात कही। महिला की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम उसे सुरक्षित थाने लेकर आई। यहां थानाध्यक्ष ने भी महिला से बातचीत कर उसकी परेशानी को समझने का प्रयास किया। बातचीत के दौरान बुजुर्ग महिला ने बताया कि उसकी उम्र के अधिकांश लोग अब जीवित नहीं हैं और वह स्वयं को अकेला महसूस करती है। महिला ने अपने परिजनों के प्रति कोई शिकायत नहीं जताई। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए महिला की पुत्री और अन्य परिजनों को थाने बुलाया। पुलिस ने परिजनों से भी बातचीत की। इस दौरान परिजनों ने बताया कि महिला वृद्धावस्था के चलते शारीरिक और मानसिक परेशानियों से गुजर रही है। पुलिस ने परिजनों को बुजुर्ग महिला की भावनाओं को समझने और उसके साथ अधिक समय बिताने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उसकी देखभाल और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की बात कही। पुलिस ने समझाया कि वृद्धावस्था में बुजुर्गों को शारीरिक देखभाल के साथ भावनात्मक सहारे और अपनों के साथ की भी जरूरत होती है। इसके बाद थराली पुलिस ने बुजुर्ग महिला को उसकी पुत्री और दामाद के सुपुर्द कर दिया। पुलिस की तत्परता और संवेदनशील व्यवहार से महिला को समय पर सहायता मिली और उसे सुरक्षित रूप से परिजनों के साथ भेजा गया। चमोली पुलिस ने आमजन से अपील की है कि उम्र के इस पड़ाव पर बुजुर्गों को केवल देखभाल ही नहीं बल्कि अपनों के साथ और भावनात्मक सहारे की भी आवश्यकता होती है। कभी-कभी किसी की परेशानी को धैर्यपूर्वक सुन लेना और उसके साथ कुछ पल बिता लेना भी उसके लिए बड़ा सहारा बन सकता है। इसलिए अपने घर-परिवार के बुजुर्गों की भावनाओं को समझें और उनसे लगातार संवाद बनाए रखें। उन्हें यह एहसास कराएं कि वे अकेले नहीं हैं और परिवार उनके साथ खड़ा है।
