प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। प्रदेश की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी परियोजनाओं के माध्यम से महिलाएं अपना रोजगार स्थापित करने के साथ ही अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रही हैं। इसी दिशा में हरिद्वार जनपद के लालढांग क्षेत्र की आशा ग्राम संगठन की अध्यक्ष हेमा नेगी ने सरकारी सहायता से मसाला यूनिट स्थापित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के मार्गदर्शन में हेमा नेगी ने दिसंबर 2025 में लगभग 10 लाख रुपये की लागत से अपनी मसाला यूनिट की शुरुआत की। इस यूनिट की स्थापना में राज्य सरकार की ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका संवर्धन से संबंधित रिप परियोजना के माध्यम से 6 लाख रुपये की सब्सिडी और 3 लाख रुपये का ऋण मिला। इसके साथ ही हेमा नेगी ने अपनी ओर से 1 लाख रुपये की पूंजी लगाई। सरकारी सहायता और स्वयं के प्रयासों से स्थापित यह यूनिट आज उनके लिए स्वरोजगार का माध्यम बनने के साथ ही क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ा रही है। हेमा नेगी के अनुसार मसाला यूनिट के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 60 हजार रुपये का कारोबार किया जा रहा है। इस पहल से क्षेत्र की महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का अवसर मिला है। स्थानीय स्तर पर मसालों के उत्पादन और कारोबार को बढ़ावा देने वाली यह इकाई ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हेमा नेगी ने बताया कि राज्य सरकार और रिप परियोजना से मिले सहयोग ने उनके सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इस सहायता के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और संबंधित परियोजना का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें अपना उद्यम शुरू करने का अवसर मिला है और अब वह अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के साथ ही महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। सरकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सहायता और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। हेमा नेगी की सफलता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि उचित मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग के साथ दृढ़ संकल्प से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी अपने उद्यम स्थापित कर सकती हैं और दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती हैं। उनकी यह पहल महिला सशक्तीकरण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
