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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा राष्ट्रीय नवोदय नेतृत्व संस्थान नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में जवाहर नवोदय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए चार दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम 2 से 5 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी अतिथियों का पारंपरिक शॉल स्मृति चिह्न एवं तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। शोधार्थी स्नेहलता ने विश्वविद्यालय के कुलगीत की सांकेतिक भाषा में प्रस्तुति दी जो समावेशिता एवं सुलभ शिक्षा का प्रेरक उदाहरण रही। प्रशिक्षण कार्यक्रम की समन्वयक एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की उपनिदेशक प्रो. सीमा धवन ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागी शिक्षकों का स्वागत किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के नवोदय विद्यालयों से आए 44 प्रशिक्षित एवं स्नातकोत्तर शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं। हालांकि कार्यक्रम के समापन संबंधी विवरण में नवोदय विद्यालय समिति के विभिन्न विद्यालयों से आए कुल 46 शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रतिभाग करने का उल्लेख किया गया है। मुख्य अतिथि दून विश्वविद्यालय देहरादून की कुलपति प्रो.सुरेखा डंगवाल ने अपने संबोधन में शिक्षकों के व्यावसायिक विकास भावनात्मक जुड़ाव एवं संस्थागत अपनत्व के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों को समय के साथ अपनी शिक्षण पद्धतियों एवं व्यावसायिक दक्षताओं में निरंतर सुधार करते हुए बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को विकसित करना चाहिए। उन्होंने क्लस्टर सुविधाओं के अधिकतम उपयोग तथा भविष्य में एकल-शिक्षक कक्षाओं की संभावनाओं पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने विशेष रूप से दक्षता आधारित शिक्षक की परिकल्पना को भारतीय पहचान एवं भारतीय शैक्षिक परंपराओं के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा सांस्कृतिक मूल्यों स्थानीय संदर्भों एवं आधुनिक शैक्षिक दृष्टिकोण का समन्वय करते हुए ऐसी शिक्षक व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए जो केवल विषयवस्तु के ज्ञान तक सीमित न हो बल्कि शिक्षकों में व्यावहारिक कौशल रचनात्मकता नवाचार संवेदनशीलता नेतृत्व क्षमता एवं विद्यार्थियों की विविध आवश्यकताओं को समझने की दक्षता भी विकसित करे। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाले नहीं बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास नैतिक मूल्यों के संवर्धन तथा उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने वाले मार्गदर्शक भी हों। इस दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप भारतीय परिवेश में एक सशक्त दक्ष एवं उत्तरदायी शिक्षक की अवधारणा को मूर्त रूप देना आवश्यक है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय इस प्रकार के क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। ऐसे कार्यक्रम न केवल शिक्षकों के व्यावसायिक विकास में सहायक हैं बल्कि विश्वविद्यालय को समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में शिक्षक के लिए केवल विषयगत ज्ञान होना पर्याप्त नहीं है बल्कि तकनीकी दक्षता के साथ व्यावहारिक कौशल एवं नवीन शिक्षण तकनीकों का ज्ञान भी आवश्यक है। शिक्षकों को आधुनिक तकनीक और नवाचारों को कक्षा-कक्ष तक ले जाने के साथ उन्हें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों एवं विद्यार्थियों की आवश्यकताओं से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक शिक्षक केवल ज्ञान का संवाहक नहीं होता बल्कि भावी पीढ़ी के चरित्र विचार दृष्टिकोण एवं सामाजिक चेतना का निर्माण भी करता है। इसलिए शिक्षकों का दायित्व केवल कक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि एक सशक्त जागरूक समावेशी एवं विकसित राष्ट्र के निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने ऐसे क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों को शिक्षकों की दक्षताओं के विकास नवीन शैक्षिक दृष्टिकोण के आदान-प्रदान तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन शिक्षा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। कार्यक्रम समन्वयक प्रो.सीमा धवन ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह के मार्गदर्शन में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप सतत व्यावसायिक विकास की अवधारणा को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। इसमें राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा दक्षता आधारित शिक्षण पद्धतियों तथा समकालीन शैक्षिक आवश्यकताओं को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुभवात्मक शिक्षण तथा डिजिटल लर्निंग जैसी आधुनिक शैक्षिक तकनीकों एवं नवाचारों से परिचित कराया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों की शिक्षण दक्षताओं का विकास करना तथा कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी व्यावहारिक विद्यार्थी-केंद्रित एवं तकनीक आधारित बनाना है। इस अवसर पर डीन नियुक्ति एवं प्रमोशन प्रो.एम.एस.पंवार प्रो.एच.बी.एस.चौहान निदेशक बिरला परिसर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल एवं कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी ने भी अपने विचार साझा किए। इसके पश्चात प्रो.सुनीता गोदियाल ने कुलपति का धन्यवाद किया। उन्होंने चौरास स्थित टिहरी परिसर में बीपीएड पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की पहल के लिए कुलपति का आभार व्यक्त किया। साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों प्रतिभागी शिक्षकों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति विशेष आभार जताया। उन्होंने दिल्ली से आए प्रो.रजनी रंजन सौमित्र का भी विशेष धन्यवाद किया। मंच संचालन डॉ.अनु राही ने किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ उद्घाटन समारोह का समापन हुआ तथा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों को समूह छायाचित्र के लिए आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक एवं शिक्षाविद् प्रो.एम.एम.सेमवाल प्रो.आर.एस.नेगी प्रो.गुड्डी बिष्ट प्रो.वी.आर.पुरोहित डॉ.शंकर सिंह डॉ.सुमन लता तिरुवा डॉ.सपना सेन डॉ.रमेश राणा डॉ. सिद्धार्थ लोहानी एवं डॉ.आलोक सागर गौतम सहित अन्य गणमान्य शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शिक्षाविदों एवं प्रतिभागी शिक्षकों के बीच शिक्षक शिक्षा प्रशिक्षण नवाचार एवं समकालीन शैक्षिक चुनौतियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान भी हुआ। चार दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में एससीईआरटी उत्तराखंड के विशेषज्ञ प्रदीप रावत ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा दक्षता आधारित अधिगम एवं अधिगम प्रतिफल विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख प्रावधानों मातृभाषा प्रौद्योगिकी खेल-एकीकृत शिक्षण तथा विषयों के समेकित दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दक्षता आधारित शिक्षण विद्यार्थियों में ज्ञान कौशल आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करता है। उन्होंने सतत आकलन एवं अनुभवात्मक शिक्षण को प्रभावी शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताया। द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ.ऋषभ कुमार मिश्रा अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली ने शिक्षक दक्षता एवं शिक्षण शास्त्र विषय पर सत्र संचालित किया। वहीं प्रो.रवनीत कौर माता सुंदरी कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय का सत्र भी आयोजित किया गया।

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