रेनबो पब्लिक स्कूल में हैलोवीन उत्सव: नन्हे-मुन्नों ने रचनात्मक वेशभूषा से बिखेरी रंगत
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।31 अक्टूबर
रेनबो पब्लिक स्कूल में हैलोवीन उत्सव बड़ी उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में किंडरगार्टन के नन्हे-मुन्ने बच्चे प्यारे-प्यारे भूत,जादूगरनी,कद्दू और परियों के रूप में सजकर आए,जिससे पूरा विद्यालय उल्लास और रंग-बिरंगे परिधानों से खिल उठा।कार्यक्रम में हैलोवीन ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया,जिसमें बच्चों ने अपनी रचनात्मकता का सुंदर प्रदर्शन किया। विद्यालय प्रबंधन की ओर से सभी बच्चों को मिठाइयाँ और उपहार वितरित किए गए,जिससे उनके चेहरों पर खुशी झलक उठी।हैलोवीन का मूल भाव आत्माओं और पूर्वजों के प्रति सम्मान गढ़वाल की प्राचीन जगार परंपरा से मेल खाता है।जगार में भी लोग रातभर ढोल-दमाऊ की थाप पर देवी-देवताओं और पूर्वज आत्माओं को आमंत्रित करते हैं,जो मनुष्य और आध्यात्मिक जगत के बीच सेतु का कार्य करती है।विद्यालय प्रशासन ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में आनंद के साथ सांस्कृतिक समझ भी बढ़ाते हैं। चाहे गढ़वाल की जगार हो या पश्चिम का हैलोवीन दोनों परंपराएँ एक ही संदेश देती हैं पूर्वजों का आदर करो और जीवन का उत्सव मनाओ।
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रेनबो पब्लिक स्कूल में हैलोवीन उत्सव: नन्हे-मुन्नों ने रचनात्मक वेशभूषा से बिखेरी रंगत
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।31 अक्टूबर
रेनबो पब्लिक स्कूल में हैलोवीन उत्सव बड़ी उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में किंडरगार्टन के नन्हे-मुन्ने बच्चे प्यारे-प्यारे भूत,जादूगरनी,कद्दू और परियों के रूप में सजकर आए,जिससे पूरा विद्यालय उल्लास और रंग-बिरंगे परिधानों से खिल उठा।कार्यक्रम में हैलोवीन ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया,जिसमें बच्चों ने अपनी रचनात्मकता का सुंदर प्रदर्शन किया। विद्यालय प्रबंधन की ओर से सभी बच्चों को मिठाइयाँ और उपहार वितरित किए गए,जिससे उनके चेहरों पर खुशी झलक उठी।हैलोवीन का मूल भाव आत्माओं और पूर्वजों के प्रति सम्मान गढ़वाल की प्राचीन जगार परंपरा से मेल खाता है।जगार में भी लोग रातभर ढोल-दमाऊ की थाप पर देवी-देवताओं और पूर्वज आत्माओं को आमंत्रित करते हैं,जो मनुष्य और आध्यात्मिक जगत के बीच सेतु का कार्य करती है।विद्यालय प्रशासन ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में आनंद के साथ सांस्कृतिक समझ भी बढ़ाते हैं। चाहे गढ़वाल की जगार हो या पश्चिम का हैलोवीन दोनों परंपराएँ एक ही संदेश देती हैं पूर्वजों का आदर करो और जीवन का उत्सव मनाओ।