सरस्वती विद्या मंदिर श्रीनगर में सप्तशक्ति संगम सम्मेलन में छात्राओं व महिलाओं के नवरूपों का सम्मान और जागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।आज दिनाँक 16 नवंबर को सरस्वती विद्या मंदिर हाई स्कूल श्रीनगर गढवाल में सप्तशक्ति संगम सम्मेलन बहुत हर्ष-उल्लास के साथ मनाया गया। विश्व भारती महिला संस्था द्वारा महिलाओं में चेतना जागरण के लिए नारी शक्तियों की महिमा विषयक कार्यक्रम देश भर में सप्तशक्ति संगम सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में विद्यालय में सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में 165 से अधिक विद्यालय की छात्राओं को महिला के नवरूपों जैसे संवेदना कोमलता व मातृत्व का सम्मान किया गया। विशेषतः महिलाएँ-अनिता जोशी-पूर्व नगर निगम श्रीनगर की पार्षद,रेखोरी ग्राम पंचायत की लक्ष्मी देवी,आर्थिक वर्ग की महिलायें,महिला सहयोगी समूह की अध्यक्ष महिलायें आदि की उपस्थित रही। मुख्य अतिथि के रूप में सरोजनी जखमोला-पूर्व मुख्य महिला चिकित्साधिकारी रुद्रप्रयाग रही।कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वन्दना से हुआ। सरोजनी जखमोला ने कार्यक्रम की मुख्य वक्ता के रूप में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा-कि सप्त शक्तियों में से संवेदनशीलता,स्मरण शक्ति,तीव्र वाणी,धृति,क्षमा इन्हें ही नारी की शक्ति के रूप में माना जाता है। नारी दया की मूर्ति हैं,मौन(वाणी),स्मृति मेधा,धृति और क्षमा इन स्त्रियों में निहित रहती है। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त भ्रांतियां इस समय व्याप्त कठिनाई का समय है। इस समय महिलाओं की कठिनाई यह है कि समाज महिला-पुरुष समानता की बात तो करता है किन्तु व्यावहारिक रूप में जब समान व्यवहार होता है तब कितने विरोध का स्थितिप्रदान करता है। कहा कि वर्तमान समयाओं को श्रेष्ठ समाधान है। उन्होंने अपने पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संदेश भी दिया। उन्होंने विशेष वक्ता के रूप में महिलाओं का प्रतिभावान स्वरूप की सरोजनी जखमोला-पूर्व नगर निगम श्रीनगर द्वारा देश के विकास में माताओं की भूमिका की विस्तार से बताया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि महिलाओं अपने अंदर श्रीमद्भावनाओं में निहित अद्भुत सप्तशक्तियों का विकास अपने परिवार,समाज और देश की भावना का वृहततर एवं प्रभावित करने वाला है। इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं द्वारा देश और उत्तराखण्ड की प्रेरणादायी महिलाओं तीलू,रैठोली,लक्ष्मीबाई,गोरखा की वीरांगना में उनके देश और समाज को दिया गया स्त्रीत्व अद्वितीय किया गया। उनकी अद्वितीयता ने सभी के मन मोह लिया। सम्मेलन में उपस्थित छात्राओं की अद्वितीय गतिविधियों व कार्यक्रम की सराहना की गई। विद्यालय के प्रधानाचार्य कुशल चन्द्र बहुगुणा के निर्देशन पर मातृशक्ति की विद्यालय इकाई की संयोजिका मोहिनी पण्ड्याय द्वारा किया गया। कार्यक्रम का मुख्य नारा सत्य की वंचित शक्ति बहू बेटियाँ घर घर रानी की भव्यता पर केंद्रित था। छात्राओं द्वारा नाटक,भाषण,रमा पन्त,रजनी बहुगुणा,झूलादेवी सहित 165 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी महिलाओं ने परिवार,समाज,राष्ट्र तथा विश्व कल्याण के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
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सरस्वती विद्या मंदिर श्रीनगर में सप्तशक्ति संगम सम्मेलन में छात्राओं व महिलाओं के नवरूपों का सम्मान और जागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।आज दिनाँक 16 नवंबर को सरस्वती विद्या मंदिर हाई स्कूल श्रीनगर गढवाल में सप्तशक्ति संगम सम्मेलन बहुत हर्ष-उल्लास के साथ मनाया गया। विश्व भारती महिला संस्था द्वारा महिलाओं में चेतना जागरण के लिए नारी शक्तियों की महिमा विषयक कार्यक्रम देश भर में सप्तशक्ति संगम सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में विद्यालय में सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में 165 से अधिक विद्यालय की छात्राओं को महिला के नवरूपों जैसे संवेदना कोमलता व मातृत्व का सम्मान किया गया। विशेषतः महिलाएँ-अनिता जोशी-पूर्व नगर निगम श्रीनगर की पार्षद,रेखोरी ग्राम पंचायत की लक्ष्मी देवी,आर्थिक वर्ग की महिलायें,महिला सहयोगी समूह की अध्यक्ष महिलायें आदि की उपस्थित रही। मुख्य अतिथि के रूप में सरोजनी जखमोला-पूर्व मुख्य महिला चिकित्साधिकारी रुद्रप्रयाग रही।कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वन्दना से हुआ। सरोजनी जखमोला ने कार्यक्रम की मुख्य वक्ता के रूप में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा-कि सप्त शक्तियों में से संवेदनशीलता,स्मरण शक्ति,तीव्र वाणी,धृति,क्षमा इन्हें ही नारी की शक्ति के रूप में माना जाता है। नारी दया की मूर्ति हैं,मौन(वाणी),स्मृति मेधा,धृति और क्षमा इन स्त्रियों में निहित रहती है। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त भ्रांतियां इस समय व्याप्त कठिनाई का समय है। इस समय महिलाओं की कठिनाई यह है कि समाज महिला-पुरुष समानता की बात तो करता है किन्तु व्यावहारिक रूप में जब समान व्यवहार होता है तब कितने विरोध का स्थितिप्रदान करता है। कहा कि वर्तमान समयाओं को श्रेष्ठ समाधान है। उन्होंने अपने पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संदेश भी दिया। उन्होंने विशेष वक्ता के रूप में महिलाओं का प्रतिभावान स्वरूप की सरोजनी जखमोला-पूर्व नगर निगम श्रीनगर द्वारा देश के विकास में माताओं की भूमिका की विस्तार से बताया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि महिलाओं अपने अंदर श्रीमद्भावनाओं में निहित अद्भुत सप्तशक्तियों का विकास अपने परिवार,समाज और देश की भावना का वृहततर एवं प्रभावित करने वाला है। इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं द्वारा देश और उत्तराखण्ड की प्रेरणादायी महिलाओं तीलू,रैठोली,लक्ष्मीबाई,गोरखा की वीरांगना में उनके देश और समाज को दिया गया स्त्रीत्व अद्वितीय किया गया। उनकी अद्वितीयता ने सभी के मन मोह लिया। सम्मेलन में उपस्थित छात्राओं की अद्वितीय गतिविधियों व कार्यक्रम की सराहना की गई। विद्यालय के प्रधानाचार्य कुशल चन्द्र बहुगुणा के निर्देशन पर मातृशक्ति की विद्यालय इकाई की संयोजिका मोहिनी पण्ड्याय द्वारा किया गया। कार्यक्रम का मुख्य नारा सत्य की वंचित शक्ति बहू बेटियाँ घर घर रानी की भव्यता पर केंद्रित था। छात्राओं द्वारा नाटक,भाषण,रमा पन्त,रजनी बहुगुणा,झूलादेवी सहित 165 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी महिलाओं ने परिवार,समाज,राष्ट्र तथा विश्व कल्याण के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।