जनहित को देखते हुये ग्राम प्रधान ने आदिबद्रीधाम में एलोपैथिक चिकित्सालय निर्माण की मांग की
प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल।आदिबद्रीधाम क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव को लेकर ग्राम पंचायत आदिबद्री की प्रधान आरती बहुगुणा ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत उत्तराखंड सरकार को पत्र लिखकर 30 बैड के एलोपैथिक चिकित्सालय निर्माण की मांग की है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल न होने से आमजन को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। ग्रामीणों द्वारा दान की गई भूमि पर वर्तमान में आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय संचालित हैं,किंतु बढ़ती जनसंख्या और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए एलोपैथिक अस्पताल क्षेत्र की अत्यंत आवश्यक जरूरत बन गया है। प्रधान ने पत्र में उल्लेख किया कि कर्णप्रयाग–हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर अक्सर वाहन दुर्घटनाएं होती रहती हैं,लेकिन दुर्घटना स्थल से करीब 30 किलोमीटर तक कोई एलोपैथिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। उपचार में देरी के कारण कई बार घायलों की जान तक चली जाती है। आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर में दो मंजिला,30 बैड क्षमता वाला एलोपैथिक चिकित्सालय निर्माण हेतु पर्याप्त भूमि उपलब्ध है,जो ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) आने-जाने वाले व्यक्तियों,स्थानीय जनता तथा चारधाम यात्रा के यात्रियों के लिए जीवनरक्षक सिद्ध हो सकता है। ज्ञापन के माध्यम से प्रधान आरती बहुगुणा ने यह भी अवगत कराया कि आदिबद्रीधाम को नगर पंचायत घोषित किया जा चुका है,जिसके अनुसार इस क्षेत्र में एलोपैथिक चिकित्सालय की स्थापना अनिवार्य हो जाती है। लगभग 20 हजार की जनसंख्या वाले इस क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर मरीजों को उपचार के अभाव में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मानवता एवं जनहित के आधार पर आदिबद्री आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर में एलोपैथिक चिकित्सालय निर्माण की घोषणा जल्द से जल्द करने की मांग की है।
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जनहित को देखते हुये ग्राम प्रधान ने आदिबद्रीधाम में एलोपैथिक चिकित्सालय निर्माण की मांग की
प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल।आदिबद्रीधाम क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव को लेकर ग्राम पंचायत आदिबद्री की प्रधान आरती बहुगुणा ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत उत्तराखंड सरकार को पत्र लिखकर 30 बैड के एलोपैथिक चिकित्सालय निर्माण की मांग की है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल न होने से आमजन को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। ग्रामीणों द्वारा दान की गई भूमि पर वर्तमान में आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय संचालित हैं,किंतु बढ़ती जनसंख्या और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए एलोपैथिक अस्पताल क्षेत्र की अत्यंत आवश्यक जरूरत बन गया है। प्रधान ने पत्र में उल्लेख किया कि कर्णप्रयाग–हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर अक्सर वाहन दुर्घटनाएं होती रहती हैं,लेकिन दुर्घटना स्थल से करीब 30 किलोमीटर तक कोई एलोपैथिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। उपचार में देरी के कारण कई बार घायलों की जान तक चली जाती है। आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर में दो मंजिला,30 बैड क्षमता वाला एलोपैथिक चिकित्सालय निर्माण हेतु पर्याप्त भूमि उपलब्ध है,जो ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) आने-जाने वाले व्यक्तियों,स्थानीय जनता तथा चारधाम यात्रा के यात्रियों के लिए जीवनरक्षक सिद्ध हो सकता है। ज्ञापन के माध्यम से प्रधान आरती बहुगुणा ने यह भी अवगत कराया कि आदिबद्रीधाम को नगर पंचायत घोषित किया जा चुका है,जिसके अनुसार इस क्षेत्र में एलोपैथिक चिकित्सालय की स्थापना अनिवार्य हो जाती है। लगभग 20 हजार की जनसंख्या वाले इस क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर मरीजों को उपचार के अभाव में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मानवता एवं जनहित के आधार पर आदिबद्री आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर में एलोपैथिक चिकित्सालय निर्माण की घोषणा जल्द से जल्द करने की मांग की है।