जिलाधिकारी के निर्देश पर 5 से 8 दिसंबर तक प्रभावित आंगनवाड़ी केंद्रों में एहतियाती अवकाश
प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल।गुलदार की गतिविधि के बीच बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के निर्देश पर पौड़ी और कोट विकासखंड के उन आंगनवाड़ी केंद्रों में 05 से 08 दिसंबर तक एहतियातन अवकाश घोषित किया गया है,जहां गुलदार की चहलकदमी अधिक दर्ज की गयी है। विकासखंड पौड़ी के ग्राम गजल्ड में गुलदार के हमले और क्षेत्र में उसकी सक्रियता का संज्ञान लेते हुए बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र कौडला,कफलना,बाड़ा,सिरोली,पिसोली,डोभा तथा वजली में बच्चों की सुरक्षा हेतु जिला प्रशासन ने त्वरित निर्णय लेते हुए उक्त केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी है। इसके अलावा विकासखंड कोट के देवार क्षेत्र में बच्चे पर हुए हमले के बाद देवार-1,देवार,उडडा,बुरांसी,देवल (चमना),काण्डा और नवन आंगनवाड़ी केंद्रों में भी समान अवधि के लिए अवकाश लागू किया गया है।जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह संवेदनशील और तत्पर है। प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से निगरानी बढ़ा रहा है तथा ग्रामीणों को वन्यजीवों से सुरक्षित रहने के लिए जागरुक भी किया जा रहा है।
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जिलाधिकारी के निर्देश पर 5 से 8 दिसंबर तक प्रभावित आंगनवाड़ी केंद्रों में एहतियाती अवकाश
प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल।गुलदार की गतिविधि के बीच बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के निर्देश पर पौड़ी और कोट विकासखंड के उन आंगनवाड़ी केंद्रों में 05 से 08 दिसंबर तक एहतियातन अवकाश घोषित किया गया है,जहां गुलदार की चहलकदमी अधिक दर्ज की गयी है। विकासखंड पौड़ी के ग्राम गजल्ड में गुलदार के हमले और क्षेत्र में उसकी सक्रियता का संज्ञान लेते हुए बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र कौडला,कफलना,बाड़ा,सिरोली,पिसोली,डोभा तथा वजली में बच्चों की सुरक्षा हेतु जिला प्रशासन ने त्वरित निर्णय लेते हुए उक्त केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी है। इसके अलावा विकासखंड कोट के देवार क्षेत्र में बच्चे पर हुए हमले के बाद देवार-1,देवार,उडडा,बुरांसी,देवल (चमना),काण्डा और नवन आंगनवाड़ी केंद्रों में भी समान अवधि के लिए अवकाश लागू किया गया है।जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह संवेदनशील और तत्पर है। प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से निगरानी बढ़ा रहा है तथा ग्रामीणों को वन्यजीवों से सुरक्षित रहने के लिए जागरुक भी किया जा रहा है।