प्रदीप कुमार
कोटद्वार-पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। स्वास्थ्य विभाग पौड़ी की ओर से विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नगर क्षेत्र कोटद्वार में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की थीम समुदायों से लेकर कक्षाओं तक सभी के लिए श्रवण देखभाल पर आधारित रही जिसमें बच्चों और शिक्षकों को श्रवण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों के मुख एवं कान की जांच भी की गई। कार्यक्रम में ऑडियोलॉजिस्ट संजय ने बच्चों को कानों की सुरक्षा और श्रवण शक्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी।उन्होंने बताया कि 90 डेसिबल से अधिक ध्वनि स्तर सुनने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और लगातार तेज शोर के संपर्क में रहने से बहरापन भी हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि अधिक शोर वाले स्थानों पर ईयर प्लग या ईयर प्रोटेक्टर का उपयोग करें तेज आवाज में संगीत सुनने से बचें तथा कान के अंदर रूई बड्स तेल माचिस की तीली या किसी नुकीली वस्तु से सफाई न करें। गंदे पानी में नहाने या तैरने से बचने और दूसरों के ईयरफोन या प्लग का उपयोग न करने की भी सलाह दी गई। साथ ही नियमित श्रवण जांच कराने और किसी भी समस्या होने पर तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेने को कहा गया। एनसीडी कंसलटेंट श्वेता गुसाईं ने कहा कि बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर ही जागरूक करना आवश्यक है ताकि श्रवण संबंधी समस्याओं के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा या विकास की दौड़ में पीछे न रह जाए। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य नफीस अहमद हुकम सिंह नेगी डॉ.सुधा रावत राखी सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित यह पहल विद्यार्थियों में श्रवण स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।
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प्रदीप कुमार
कोटद्वार-पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। स्वास्थ्य विभाग पौड़ी की ओर से विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नगर क्षेत्र कोटद्वार में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की थीम समुदायों से लेकर कक्षाओं तक सभी के लिए श्रवण देखभाल पर आधारित रही जिसमें बच्चों और शिक्षकों को श्रवण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों के मुख एवं कान की जांच भी की गई। कार्यक्रम में ऑडियोलॉजिस्ट संजय ने बच्चों को कानों की सुरक्षा और श्रवण शक्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी।उन्होंने बताया कि 90 डेसिबल से अधिक ध्वनि स्तर सुनने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और लगातार तेज शोर के संपर्क में रहने से बहरापन भी हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि अधिक शोर वाले स्थानों पर ईयर प्लग या ईयर प्रोटेक्टर का उपयोग करें तेज आवाज में संगीत सुनने से बचें तथा कान के अंदर रूई बड्स तेल माचिस की तीली या किसी नुकीली वस्तु से सफाई न करें। गंदे पानी में नहाने या तैरने से बचने और दूसरों के ईयरफोन या प्लग का उपयोग न करने की भी सलाह दी गई। साथ ही नियमित श्रवण जांच कराने और किसी भी समस्या होने पर तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेने को कहा गया। एनसीडी कंसलटेंट श्वेता गुसाईं ने कहा कि बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर ही जागरूक करना आवश्यक है ताकि श्रवण संबंधी समस्याओं के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा या विकास की दौड़ में पीछे न रह जाए। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य नफीस अहमद हुकम सिंह नेगी डॉ.सुधा रावत राखी सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित यह पहल विद्यार्थियों में श्रवण स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।