प्रदीप कुमार
बद्री विशाल-चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। बद्री विशाल के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता और इस बार यह कहावत उस समय साकार हो गई जब चमोली पुलिस ने एक गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार से मिलाकर मानवता की मिसाल पेश की। माणा क्षेत्र की बर्फीली पहाड़ियों की ओर एक व्यक्ति भटकते हुए जा रहा था जिसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं लग रही थी। यह व्यक्ति लगभग पांच साल पहले राजस्थान से लापता हो गया था। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना बद्रीनाथ पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और व्यक्ति को सुरक्षित थाने लाया गया। वह अपनी पहचान स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहा था और काफी समय से परिवार से संपर्क टूट चुका था। पुलिस ने प्राथमिक देखभाल के बाद उससे धीरे-धीरे बातचीत की और मानसिक रूप से सहज करने का प्रयास किया। लगातार पूछताछ और अभिसूचना इकाई की मदद से बातचीत के दौरान उसने राजस्थान से जुड़ा संकेत दिया। इसके बाद पुलिस टीम ने सक्रियता दिखाते हुए विभिन्न माध्यमों से उसके परिजनों का पता लगाया। लंबे प्रयासों के बाद परिवार की पहचान सुनिश्चित हुई और संपर्क स्थापित किया गया। जब पांच साल बाद परिजनों को सूचना मिली कि उनका खोया हुआ सदस्य बद्रीनाथ में सुरक्षित है तो वे पहले विश्वास नहीं कर पाए। परिजन तुरंत उत्तराखंड के लिए रवाना हुए। इस दौरान पुलिस ने उस व्यक्ति की पूरी देखभाल की। उसे नहलाने-धुलाने बाल और दाढ़ी कटवाने की व्यवस्था की गई और नए कपड़े उपलब्ध कराए गए। स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया ताकि उसकी स्थिति सामान्य बनी रहे। इसके बाद उसे भगवान बद्री विशाल के दर्शन कराए गए। जब राजस्थान से परिजन बद्रीनाथ पहुंचे तो दृश्य अत्यंत भावुक था। माता-पिता अपने पुत्र को जीवित देखकर भावुक हो गए और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। वर्षों की पीड़ा और इंतजार उस क्षण में राहत में बदल गया। परिजनों ने बताया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और किसी तरह उधार लेकर यहां पहुंचे थे। उनके पास वापसी के लिए भी पर्याप्त धन नहीं बचा था। इस स्थिति को देखते हुए पुलिस टीम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए स्थानीय सहयोग से आवश्यक धनराशि जुटाई और परिजनों को सहायता प्रदान की। साथ ही उनके सुरक्षित वापस लौटने की पूरी व्यवस्था भी कराई गई। परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे बद्री विशाल ने स्वयं पुलिस के माध्यम से उनकी सहायता की हो। उन्होंने पुलिस के इस मानवीय प्रयास के लिए आभार व्यक्त किया।
Spread the love
प्रदीप कुमार
बद्री विशाल-चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। बद्री विशाल के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता और इस बार यह कहावत उस समय साकार हो गई जब चमोली पुलिस ने एक गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार से मिलाकर मानवता की मिसाल पेश की। माणा क्षेत्र की बर्फीली पहाड़ियों की ओर एक व्यक्ति भटकते हुए जा रहा था जिसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं लग रही थी। यह व्यक्ति लगभग पांच साल पहले राजस्थान से लापता हो गया था। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना बद्रीनाथ पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और व्यक्ति को सुरक्षित थाने लाया गया। वह अपनी पहचान स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहा था और काफी समय से परिवार से संपर्क टूट चुका था। पुलिस ने प्राथमिक देखभाल के बाद उससे धीरे-धीरे बातचीत की और मानसिक रूप से सहज करने का प्रयास किया। लगातार पूछताछ और अभिसूचना इकाई की मदद से बातचीत के दौरान उसने राजस्थान से जुड़ा संकेत दिया। इसके बाद पुलिस टीम ने सक्रियता दिखाते हुए विभिन्न माध्यमों से उसके परिजनों का पता लगाया। लंबे प्रयासों के बाद परिवार की पहचान सुनिश्चित हुई और संपर्क स्थापित किया गया। जब पांच साल बाद परिजनों को सूचना मिली कि उनका खोया हुआ सदस्य बद्रीनाथ में सुरक्षित है तो वे पहले विश्वास नहीं कर पाए। परिजन तुरंत उत्तराखंड के लिए रवाना हुए। इस दौरान पुलिस ने उस व्यक्ति की पूरी देखभाल की। उसे नहलाने-धुलाने बाल और दाढ़ी कटवाने की व्यवस्था की गई और नए कपड़े उपलब्ध कराए गए। स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया ताकि उसकी स्थिति सामान्य बनी रहे। इसके बाद उसे भगवान बद्री विशाल के दर्शन कराए गए। जब राजस्थान से परिजन बद्रीनाथ पहुंचे तो दृश्य अत्यंत भावुक था। माता-पिता अपने पुत्र को जीवित देखकर भावुक हो गए और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। वर्षों की पीड़ा और इंतजार उस क्षण में राहत में बदल गया। परिजनों ने बताया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और किसी तरह उधार लेकर यहां पहुंचे थे। उनके पास वापसी के लिए भी पर्याप्त धन नहीं बचा था। इस स्थिति को देखते हुए पुलिस टीम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए स्थानीय सहयोग से आवश्यक धनराशि जुटाई और परिजनों को सहायता प्रदान की। साथ ही उनके सुरक्षित वापस लौटने की पूरी व्यवस्था भी कराई गई। परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे बद्री विशाल ने स्वयं पुलिस के माध्यम से उनकी सहायता की हो। उन्होंने पुलिस के इस मानवीय प्रयास के लिए आभार व्यक्त किया।