प्रदीप कुमार
केदारनाथ-रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान जिला प्रशासन की तत्परता संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया जहां समय रहते की गई कार्रवाई से 10 माह की एक मासूम बच्ची की जान बचाई गई। वाराणसी निवासी श्रद्धालु विवेक पांडेय की 10 माह की पुत्री विलीका पांडेय 02 मई 2026 को यात्रा से वापसी के दौरान अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गई। जानकारी के अनुसार बच्ची को कंडी के माध्यम से सामान के साथ नीचे लाया जा रहा था जबकि उसके माता-पिता दूसरे बच्चे के साथ घोड़े पर आगे निकल गए थे। इसी दौरान मौसम बदलने हल्की बारिश और ठंड के कारण बच्ची लगातार रोती रही और उसकी हालत बिगड़ने लगी। भैरव ग्लेशियर के पास तैनात प्रशासनिक टीम और सतर्क यात्रियों ने बच्ची की स्थिति को देखते हुए तुरंत कंडी रुकवाई और उसे तत्काल भैरव ग्लेशियर स्थित अस्पताल पहुंचाया गया। जांच में पाया गया कि बच्ची हाइपोथर्मिया ऑक्सीजन की कमी और भूख से प्रभावित थी। चिकित्सक डॉ.नरेश और उनकी टीम ने तत्परता दिखाते हुए बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट आवश्यक उपचार और फीडिंग उपलब्ध कराई जिससे उसकी स्थिति में सुधार हुआ और उसे सुरक्षित किया गया। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत बच्ची के माता-पिता को मौके पर बुलाया और बच्ची को सुरक्षित उनके सुपुर्द किया। साथ ही उन्हें भविष्य में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.रामप्रकाश ने इस घटना को गंभीर चेतावनी बताते हुए श्रद्धालुओं से अपील की कि केदारनाथ जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम अत्यंत कठोर और अनिश्चित होता है जो छोटे बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को ऐसी यात्रा पर लाने से बचना चाहिए। जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा सतर्कता और जिम्मेदारी का पालन जरूरी है। श्रद्धालुओं को मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यात्रा करनी चाहिए और बच्चों व बुजुर्गों की विशेष देखभाल सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि यात्रा सुरक्षित और सुगम बनी रहे।
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प्रदीप कुमार
केदारनाथ-रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान जिला प्रशासन की तत्परता संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया जहां समय रहते की गई कार्रवाई से 10 माह की एक मासूम बच्ची की जान बचाई गई। वाराणसी निवासी श्रद्धालु विवेक पांडेय की 10 माह की पुत्री विलीका पांडेय 02 मई 2026 को यात्रा से वापसी के दौरान अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गई। जानकारी के अनुसार बच्ची को कंडी के माध्यम से सामान के साथ नीचे लाया जा रहा था जबकि उसके माता-पिता दूसरे बच्चे के साथ घोड़े पर आगे निकल गए थे। इसी दौरान मौसम बदलने हल्की बारिश और ठंड के कारण बच्ची लगातार रोती रही और उसकी हालत बिगड़ने लगी। भैरव ग्लेशियर के पास तैनात प्रशासनिक टीम और सतर्क यात्रियों ने बच्ची की स्थिति को देखते हुए तुरंत कंडी रुकवाई और उसे तत्काल भैरव ग्लेशियर स्थित अस्पताल पहुंचाया गया। जांच में पाया गया कि बच्ची हाइपोथर्मिया ऑक्सीजन की कमी और भूख से प्रभावित थी। चिकित्सक डॉ.नरेश और उनकी टीम ने तत्परता दिखाते हुए बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट आवश्यक उपचार और फीडिंग उपलब्ध कराई जिससे उसकी स्थिति में सुधार हुआ और उसे सुरक्षित किया गया। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत बच्ची के माता-पिता को मौके पर बुलाया और बच्ची को सुरक्षित उनके सुपुर्द किया। साथ ही उन्हें भविष्य में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.रामप्रकाश ने इस घटना को गंभीर चेतावनी बताते हुए श्रद्धालुओं से अपील की कि केदारनाथ जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम अत्यंत कठोर और अनिश्चित होता है जो छोटे बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को ऐसी यात्रा पर लाने से बचना चाहिए। जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा सतर्कता और जिम्मेदारी का पालन जरूरी है। श्रद्धालुओं को मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यात्रा करनी चाहिए और बच्चों व बुजुर्गों की विशेष देखभाल सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि यात्रा सुरक्षित और सुगम बनी रहे।