प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद चमोली में अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष सहायतित ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक सहायता तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है जिससे वे आजीविका के विभिन्न अवसरों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। परियोजना के तहत अब तक जनपद में कुल 880 अति निर्धन लाभार्थियों को प्रति लाभार्थी 35 हजार रुपये की दर से लगभग 3 करोड़ 8 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। यह सहायता लाभार्थियों को अपने उद्यम स्थापित करने और उनके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत महिलाओं को उनकी रुचि और स्थानीय संसाधनों के आधार पर विभिन्न आय सृजन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इनमें डेयरी सिलाई कढ़ाई लौह शिल्प पोल्ट्री बकरी पालन लघु व्यवसाय और अन्य स्वरोजगार गतिविधियां शामिल हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बना रही हैं। परियोजना के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। कई महिलाएं सफल उद्यमी बनकर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं। जिला परियोजना प्रबंधक शशिकांत यादव ने बताया कि ग्रामोत्थान परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं विशेष रूप से अति निर्धन परिवारों को सतत आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। चमोली में महिलाएं इन अवसरों का लाभ उठाकर सफल उद्यम स्थापित कर रही हैं जो सराहनीय है। यह पहल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बना रही है। ग्रामोत्थान परियोजना चमोली जनपद में महिला सशक्तिकरण और सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को साकार करने में सहायक बन रही है।
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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद चमोली में अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष सहायतित ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक सहायता तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है जिससे वे आजीविका के विभिन्न अवसरों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। परियोजना के तहत अब तक जनपद में कुल 880 अति निर्धन लाभार्थियों को प्रति लाभार्थी 35 हजार रुपये की दर से लगभग 3 करोड़ 8 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। यह सहायता लाभार्थियों को अपने उद्यम स्थापित करने और उनके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत महिलाओं को उनकी रुचि और स्थानीय संसाधनों के आधार पर विभिन्न आय सृजन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इनमें डेयरी सिलाई कढ़ाई लौह शिल्प पोल्ट्री बकरी पालन लघु व्यवसाय और अन्य स्वरोजगार गतिविधियां शामिल हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बना रही हैं। परियोजना के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। कई महिलाएं सफल उद्यमी बनकर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं। जिला परियोजना प्रबंधक शशिकांत यादव ने बताया कि ग्रामोत्थान परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं विशेष रूप से अति निर्धन परिवारों को सतत आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। चमोली में महिलाएं इन अवसरों का लाभ उठाकर सफल उद्यम स्थापित कर रही हैं जो सराहनीय है। यह पहल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बना रही है। ग्रामोत्थान परियोजना चमोली जनपद में महिला सशक्तिकरण और सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को साकार करने में सहायक बन रही है।