Spread the love

प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। प्रदेश में हलाला जैसी कुप्रथा के विरुद्ध साहसिक कदम उठाते हुए पहला मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम शुक्रवार को बुग्गावाला क्षेत्र के बांद्रजूर्द गांव पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने पीड़िता एवं उसके परिजनों से मुलाकात कर विस्तार से बातचीत की उनकी स्थिति की जानकारी ली तथा हर संभव सहयोग और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की सुरक्षा सम्मान और समान अधिकारों पर आधारित होती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्णय ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला है जिससे मुस्लिम महिलाओं को हलाला और तीन तलाक जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि हलाला और तीन तलाक जैसी प्रथाएं महिलाओं के अधिकारों का हनन करने के साथ उनके आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचाती हैं। ऐसे में इन कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाना बेहद जरूरी है। उन्होंने पीड़िता के साहस जागरूकता और दृढ़ता की सराहना करते हुए कहा कि उसका यह कदम अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा और उन्हें अन्याय के खिलाफ खड़े होने की ताकत देगा। फरजाना बेगम ने कहा कि राज्य सरकार और अल्पसंख्यक आयोग पीड़िता के साथ मजबूती से खड़े हैं तथा मामले में निष्पक्ष और त्वरित न्याय सुनिश्चित कराने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला के साथ कुप्रथा या परंपरा के नाम पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रदेश सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण शिक्षा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए लगातार कार्य कर रही है। समान नागरिक संहिता लागू होने से महिलाओं को कानूनी संरक्षण मिलेगा तथा समाज में समानता और न्याय की भावना को मजबूती मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Whatsapp