प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नगर निगम श्रीनगर के सभागार में ठोस कूड़ा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) नियम-2026 के अंतर्गत जनजागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में नगर निगम के सभी पार्षदों को नए कूड़ा प्रबंधन नियमों की जानकारी दी गई तथा उन्हें अपने-अपने वार्डों में जनजागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पूर्व में गीले एवं सूखे कूड़े के लिए हरे और नीले कूड़ेदान का उपयोग किया जाता था जबकि अब दो नए कूड़ेदान लाल और काले रंग के भी व्यवस्था में शामिल किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार लाल कूड़ेदान में सेनेटरी वेस्ट डायपर एवं अन्य जैव-स्वास्थ्य संबंधी अपशिष्ट एकत्र किए जाएंगे जबकि काले कूड़ेदान में ब्लेड कांच बल्ब और अन्य खतरनाक अपशिष्ट डाले जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि कूड़े के स्रोत स्तर पर पृथक्करण से उसके वैज्ञानिक निस्तारण में आसानी होगी तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। कार्यशाला में पार्षदों को नए नियमों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा गया कि वे अपने-अपने वार्डों में नागरिकों को कूड़ा पृथक्करण के प्रति जागरूक करें और प्रत्येक वार्ड को निर्मल वार्ड के रूप में विकसित करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। वक्ताओं ने कहा कि स्वच्छ शहर का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक कूड़े को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर निगम के पर्यावरण मित्रों को सौंपेगा। इस अवसर पर नगर आयुक्त नुपुर वर्मा सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी गायत्री बिष्ट मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक शशि पंवार निगम के पार्षदगण अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। महापौर आरती भंडारी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लागू किए जा रहे नए नियम शहर में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि कूड़ा पृथक्करण केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। यदि लोग घरों से ही कूड़े को अलग-अलग करके देंगे तो कूड़ा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया अधिक सरल प्रभावी और पर्यावरण हितैषी बन सकेगी। उन्होंने सभी पार्षदों और नागरिकों से नए नियमों का पालन करते हुए स्वच्छ एवं सुंदर श्रीनगर के निर्माण में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल श्रीनगर का निर्माण तभी संभव है जब जनप्रतिनिधि और नागरिक मिलकर कूड़ा प्रबंधन के नियमों को व्यवहार में उतारें। हमारा लक्ष्य प्रत्येक वार्ड को निर्मल वार्ड और पूरे शहर को स्वच्छता की मिसाल बनाना है। नगर आयुक्त नुपुर वर्मा ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों का उद्देश्य कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण को बढ़ावा देना और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करना है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नगर निगम द्वारा कूड़ा पृथक्करण की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा अब केवल गीले और सूखे कूड़े का पृथक्करण पर्याप्त नहीं है। सेनेटरी वेस्ट और खतरनाक अपशिष्ट को भी अलग-अलग एकत्रित करना आवश्यक होगा। इसके लिए लाल और काले कूड़ेदानों की व्यवस्था लागू की जाएगी। यदि नागरिक घर से ही कूड़े को निर्धारित श्रेणियों में अलग करके देंगे तो उसके संग्रहण परिवहन और निस्तारण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुरक्षित होगी। नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम आने वाले दिनों में वार्ड स्तर पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएगा ताकि प्रत्येक नागरिक नए नियमों को समझे और उनका पालन करे। उन्होंने पार्षदों से भी अपने-अपने वार्डों में लोगों को जागरूक करने की अपील करते हुए कहा कि जनसहभागिता के बिना स्वच्छता अभियान सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा हमारा लक्ष्य केवल कूड़ा उठाना नहीं बल्कि श्रीनगर में ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन हो और शहर स्वच्छ स्वस्थ एवं पर्यावरण-अनुकूल
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नगर निगम श्रीनगर के सभागार में ठोस कूड़ा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) नियम-2026 के अंतर्गत जनजागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में नगर निगम के सभी पार्षदों को नए कूड़ा प्रबंधन नियमों की जानकारी दी गई तथा उन्हें अपने-अपने वार्डों में जनजागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पूर्व में गीले एवं सूखे कूड़े के लिए हरे और नीले कूड़ेदान का उपयोग किया जाता था जबकि अब दो नए कूड़ेदान लाल और काले रंग के भी व्यवस्था में शामिल किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार लाल कूड़ेदान में सेनेटरी वेस्ट डायपर एवं अन्य जैव-स्वास्थ्य संबंधी अपशिष्ट एकत्र किए जाएंगे जबकि काले कूड़ेदान में ब्लेड कांच बल्ब और अन्य खतरनाक अपशिष्ट डाले जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि कूड़े के स्रोत स्तर पर पृथक्करण से उसके वैज्ञानिक निस्तारण में आसानी होगी तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। कार्यशाला में पार्षदों को नए नियमों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा गया कि वे अपने-अपने वार्डों में नागरिकों को कूड़ा पृथक्करण के प्रति जागरूक करें और प्रत्येक वार्ड को निर्मल वार्ड के रूप में विकसित करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। वक्ताओं ने कहा कि स्वच्छ शहर का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक कूड़े को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर निगम के पर्यावरण मित्रों को सौंपेगा। इस अवसर पर नगर आयुक्त नुपुर वर्मा सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी गायत्री बिष्ट मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक शशि पंवार निगम के पार्षदगण अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। महापौर आरती भंडारी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लागू किए जा रहे नए नियम शहर में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि कूड़ा पृथक्करण केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। यदि लोग घरों से ही कूड़े को अलग-अलग करके देंगे तो कूड़ा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया अधिक सरल प्रभावी और पर्यावरण हितैषी बन सकेगी। उन्होंने सभी पार्षदों और नागरिकों से नए नियमों का पालन करते हुए स्वच्छ एवं सुंदर श्रीनगर के निर्माण में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल श्रीनगर का निर्माण तभी संभव है जब जनप्रतिनिधि और नागरिक मिलकर कूड़ा प्रबंधन के नियमों को व्यवहार में उतारें। हमारा लक्ष्य प्रत्येक वार्ड को निर्मल वार्ड और पूरे शहर को स्वच्छता की मिसाल बनाना है। नगर आयुक्त नुपुर वर्मा ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों का उद्देश्य कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण को बढ़ावा देना और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करना है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नगर निगम द्वारा कूड़ा पृथक्करण की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा अब केवल गीले और सूखे कूड़े का पृथक्करण पर्याप्त नहीं है। सेनेटरी वेस्ट और खतरनाक अपशिष्ट को भी अलग-अलग एकत्रित करना आवश्यक होगा। इसके लिए लाल और काले कूड़ेदानों की व्यवस्था लागू की जाएगी। यदि नागरिक घर से ही कूड़े को निर्धारित श्रेणियों में अलग करके देंगे तो उसके संग्रहण परिवहन और निस्तारण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुरक्षित होगी। नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम आने वाले दिनों में वार्ड स्तर पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएगा ताकि प्रत्येक नागरिक नए नियमों को समझे और उनका पालन करे। उन्होंने पार्षदों से भी अपने-अपने वार्डों में लोगों को जागरूक करने की अपील करते हुए कहा कि जनसहभागिता के बिना स्वच्छता अभियान सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा हमारा लक्ष्य केवल कूड़ा उठाना नहीं बल्कि श्रीनगर में ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन हो और शहर स्वच्छ स्वस्थ एवं पर्यावरण-अनुकूल