प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। स्वास्थ्य विभाग पौड़ी द्वारा 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उच्च जोखिम वाले विकासखंड रिखणीखाल के ग्राम उमेदुबाखल जुई चनियालीडोबर और बडियारगांव में विशेष जागरूकता एवं एक्स-रे स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा संभावित मरीजों की समय पर पहचान सुनिश्चित करना था। इस अवसर पर ग्रामीणों को टीबी के लक्षण बचाव एवं उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। एसटीएस महेंद्र ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए बताया कि टीबी सबसे अधिक फेफड़ों को प्रभावित करती है। सक्रिय टीबी रोग से ग्रसित व्यक्ति इस बीमारी को अन्य लोगों तक भी फैला सकता है विशेषकर उन लोगों में संक्रमण की संभावना अधिक होती है जो रोगी के निकट संपर्क में रहते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार मरीज अपने लक्षणों को छिपा लेते हैं लेकिन टीबी की समय पर जांच और नियमित दवा सेवन से इस बीमारी का सफल उपचार संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मरीज स्वास्थ्य में सुधार महसूस होने पर बीच में ही दवाएं लेना बंद कर देते हैं जो उपचार के लिए हानिकारक है और बीमारी को गंभीर बना सकता है। उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मरीजों को निशुल्क जांच चिकित्सकीय परामर्श दवाएं तथा पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाती है। लोगों से अपील की गई कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं और उपचार को बीच में न छोड़ें। शिविर के दौरान कुल 112 लोगों के टीबी एक्स-रे किए गए जबकि संदिग्ध पाए गए 9 लोगों के स्पूटम सैंपल जांच के लिए लिए गए। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान कमल रावत एक्स-रे टेक्नीशियन प्रशांत सूरी देवी अनीता देवी मदन नाथ कमला देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। स्वास्थ्य विभाग पौड़ी द्वारा 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उच्च जोखिम वाले विकासखंड रिखणीखाल के ग्राम उमेदुबाखल जुई चनियालीडोबर और बडियारगांव में विशेष जागरूकता एवं एक्स-रे स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा संभावित मरीजों की समय पर पहचान सुनिश्चित करना था। इस अवसर पर ग्रामीणों को टीबी के लक्षण बचाव एवं उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। एसटीएस महेंद्र ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए बताया कि टीबी सबसे अधिक फेफड़ों को प्रभावित करती है। सक्रिय टीबी रोग से ग्रसित व्यक्ति इस बीमारी को अन्य लोगों तक भी फैला सकता है विशेषकर उन लोगों में संक्रमण की संभावना अधिक होती है जो रोगी के निकट संपर्क में रहते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार मरीज अपने लक्षणों को छिपा लेते हैं लेकिन टीबी की समय पर जांच और नियमित दवा सेवन से इस बीमारी का सफल उपचार संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मरीज स्वास्थ्य में सुधार महसूस होने पर बीच में ही दवाएं लेना बंद कर देते हैं जो उपचार के लिए हानिकारक है और बीमारी को गंभीर बना सकता है। उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मरीजों को निशुल्क जांच चिकित्सकीय परामर्श दवाएं तथा पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाती है। लोगों से अपील की गई कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं और उपचार को बीच में न छोड़ें। शिविर के दौरान कुल 112 लोगों के टीबी एक्स-रे किए गए जबकि संदिग्ध पाए गए 9 लोगों के स्पूटम सैंपल जांच के लिए लिए गए। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान कमल रावत एक्स-रे टेक्नीशियन प्रशांत सूरी देवी अनीता देवी मदन नाथ कमला देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।