प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। महिला सुरक्षा एवं बाल संरक्षण को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे की पहल पर जनपद स्तर पर टीम गौरा का गठन किया गया है। इस विशेष टीम का उद्देश्य महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में त्वरित संवेदनशील प्रभावी और विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करना महिलाओं और बच्चों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करना तथा उन्हें आवश्यक सहायता एवं संरक्षण उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में बुधवार 1 जुलाई 2026 को पुलिस लाइन चंबा में जनपद के सभी थानों से चयनित महिला उपनिरीक्षकों महिला मुख्य आरक्षियों एवं महिला आरक्षियों के लिए एक दिवसीय "ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी)" प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान आत्मरक्षा विशेषज्ञ प्रशिक्षक कल्याण सिंह एवं मुकेश नैनवाल ने प्रतिभागी महिला पुलिसकर्मियों को आधुनिक आत्मरक्षा तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इस दौरान विषम परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए आवश्यक कौशल का अभ्यास कराया गया। इसके बाद सहायक लोक अभियोजक अधिकारी परवाज़ अख्तर ने महिला एवं बाल अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों महिलाओं के अधिकारों प्रभावी विवेचना एवं अभियोजन प्रक्रिया तथा महिला उत्पीड़न घरेलू हिंसा और लैंगिक अपराधों के मामलों में पुलिस की भूमिका एवं वैधानिक दायित्वों की विस्तृत जानकारी दी। किशोर न्याय बोर्ड की सदस्या अमिता रावत ने बाल अधिकारों किशोर न्याय अधिनियम बाल संरक्षण बाल अपराधों की रोकथाम तथा बाल पीड़ितों से जुड़े मामलों में पुलिस की संवेदनशील भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी। जिला चिकित्सालय टिहरी गढ़वाल की मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता मालती रावत ने मानसिक स्वास्थ्य तनाव प्रबंधन भावनात्मक संतुलन तथा मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ एवं संतुलित पुलिस बल ही समाज को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं दे सकता है। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे ने कहा कि 'टीम गौरा' केवल एक विशेष पुलिस टीम नहीं बल्कि जनपद की प्रत्येक महिला और बच्चे के लिए सुरक्षा विश्वास और संवेदनशील पुलिसिंग का सशक्त माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए महिला बीट व्यवस्था को अधिक सक्रिय किया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों विद्यालयों महाविद्यालयों बाजारों सार्वजनिक स्थलों तथा अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाई जाएगी तथा महिला पुलिस की प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी ताकि महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित एवं विश्वासपूर्ण वातावरण मिल सके। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण प्राप्त महिला अधिकारी अपने-अपने थाना क्षेत्रों में विद्यालयों महाविद्यालयों कोचिंग संस्थानों कार्यस्थलों तथा ग्राम स्तर तक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएंगी। साथ ही महिलाओं और बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उनमें आत्मविश्वास सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से महिला अपराधों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पॉक्सो अधिनियम कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (पॉश) अधिनियम शी-बॉक्स साइबर सुरक्षा गौरा शक्ति ऐप महिला एवं बाल हेल्पलाइन सेवाओं तथा अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाएगी। साथ ही कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित सम्मानजनक एवं लैंगिक रूप से संवेदनशील वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण से महिला पुलिसकर्मियों का आत्मविश्वास कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता और अधिक मजबूत होगी। प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागी महिला सुरक्षा कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाते हुए जनपद में महिलाओं एवं बालिकाओं के बीच सुरक्षा आत्मरक्षा और कानून के प्रति व्यापक जागरूकता का वातावरण तैयार करेंगी जिससे महिला एवं बाल सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।
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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। महिला सुरक्षा एवं बाल संरक्षण को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे की पहल पर जनपद स्तर पर टीम गौरा का गठन किया गया है। इस विशेष टीम का उद्देश्य महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में त्वरित संवेदनशील प्रभावी और विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करना महिलाओं और बच्चों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करना तथा उन्हें आवश्यक सहायता एवं संरक्षण उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में बुधवार 1 जुलाई 2026 को पुलिस लाइन चंबा में जनपद के सभी थानों से चयनित महिला उपनिरीक्षकों महिला मुख्य आरक्षियों एवं महिला आरक्षियों के लिए एक दिवसीय “ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी)” प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान आत्मरक्षा विशेषज्ञ प्रशिक्षक कल्याण सिंह एवं मुकेश नैनवाल ने प्रतिभागी महिला पुलिसकर्मियों को आधुनिक आत्मरक्षा तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इस दौरान विषम परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए आवश्यक कौशल का अभ्यास कराया गया। इसके बाद सहायक लोक अभियोजक अधिकारी परवाज़ अख्तर ने महिला एवं बाल अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों महिलाओं के अधिकारों प्रभावी विवेचना एवं अभियोजन प्रक्रिया तथा महिला उत्पीड़न घरेलू हिंसा और लैंगिक अपराधों के मामलों में पुलिस की भूमिका एवं वैधानिक दायित्वों की विस्तृत जानकारी दी। किशोर न्याय बोर्ड की सदस्या अमिता रावत ने बाल अधिकारों किशोर न्याय अधिनियम बाल संरक्षण बाल अपराधों की रोकथाम तथा बाल पीड़ितों से जुड़े मामलों में पुलिस की संवेदनशील भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी। जिला चिकित्सालय टिहरी गढ़वाल की मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता मालती रावत ने मानसिक स्वास्थ्य तनाव प्रबंधन भावनात्मक संतुलन तथा मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ एवं संतुलित पुलिस बल ही समाज को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं दे सकता है। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे ने कहा कि ‘टीम गौरा’ केवल एक विशेष पुलिस टीम नहीं बल्कि जनपद की प्रत्येक महिला और बच्चे के लिए सुरक्षा विश्वास और संवेदनशील पुलिसिंग का सशक्त माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए महिला बीट व्यवस्था को अधिक सक्रिय किया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों विद्यालयों महाविद्यालयों बाजारों सार्वजनिक स्थलों तथा अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाई जाएगी तथा महिला पुलिस की प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी ताकि महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित एवं विश्वासपूर्ण वातावरण मिल सके। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण प्राप्त महिला अधिकारी अपने-अपने थाना क्षेत्रों में विद्यालयों महाविद्यालयों कोचिंग संस्थानों कार्यस्थलों तथा ग्राम स्तर तक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएंगी। साथ ही महिलाओं और बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उनमें आत्मविश्वास सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से महिला अपराधों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पॉक्सो अधिनियम कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (पॉश) अधिनियम शी-बॉक्स साइबर सुरक्षा गौरा शक्ति ऐप महिला एवं बाल हेल्पलाइन सेवाओं तथा अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाएगी। साथ ही कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित सम्मानजनक एवं लैंगिक रूप से संवेदनशील वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण से महिला पुलिसकर्मियों का आत्मविश्वास कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता और अधिक मजबूत होगी। प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागी महिला सुरक्षा कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाते हुए जनपद में महिलाओं एवं बालिकाओं के बीच सुरक्षा आत्मरक्षा और कानून के प्रति व्यापक जागरूकता का वातावरण तैयार करेंगी जिससे महिला एवं बाल सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।