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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय श्रीनगर के बाल रोग विभाग ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं का परिचय देते हुए जहरीले सांप के डंसने से गंभीर रूप से बीमार हुई 12 वर्षीय बालिका को नया जीवन दिया है। सर्पदंश के बाद पूरे शरीर में जहर फैलने से बालिका की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई थी। उसे डिसेमिनेटेड इंट्रावस्कुलर कोएग्यूलेशन (DIC) जैसी गंभीर अवस्था हो गई थी जिसमें शरीर की रक्त के थक्के बनने की प्रणाली प्रभावित हो जाती है और अनियंत्रित रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन डॉक्टरों की सतर्कता लगातार निगरानी और समय पर दिए गए उपचार से बालिका को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया। रुद्रप्रयाग जिले की बच्छणस्यूं पट्टी के दूरस्थ गांव भराणसैंण निवासी विक्रम सिंह और सरिता देवी की 12 वर्षीय पुत्री प्रतिज्ञा 17 जून को अपने घर के पास घास काट रही थी। इसी दौरान दीवार पर छिपे एक जहरीले सांप ने उसके हाथ पर डंस लिया। सांप के काटते ही बालिका चीख पड़ी। परिजन तत्काल उसे लेकर हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल श्रीनगर पहुंचे जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए तत्काल बाल रोग विभाग में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ.सी.एम.शर्मा के नेतृत्व में उपचार की पूरी जिम्मेदारी संभाली गई। उनके मार्गदर्शन में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अंकिता गिरी तथा विभाग के चिकित्सकों ने लगातार बालिका की निगरानी करते हुए इलाज किया। जांच में सामने आया कि सांप का जहर तेजी से पूरे शरीर में फैल चुका था और रक्त जमने की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थी। हालत इतनी गंभीर थी कि बालिका के नाक सहित शरीर के अन्य हिस्सों से भी रक्तस्राव होने लगा था। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.अंकिता गिरी ने बताया कि बालिका को बचाने के लिए 40 एंटी स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन 17 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) तथा 4 यूनिट क्रायोप्रेसिपिटेट चढ़ाए गए। यह उपचार ब्लड सेंटर के सहयोग से संभव हो पाया। समय पर इतनी बड़ी मात्रा में रक्त अवयव उपलब्ध होने और विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वित प्रयासों से बालिका की जान बचाई जा सकी। इस दौरान जिस हाथ पर सांप ने काटा था वहां तेजी से सूजन बढ़ गई थी। स्थिति को देखते हुए सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ.लक्ष्मण यादव ने प्रभावित हिस्से पर आवश्यक शल्य प्रक्रिया (चीरा) की जिससे सूजन कम हुई और मरीज को काफी राहत मिली। 12 दिनों तक चले उपचार गहन निगरानी और चिकित्सकीय प्रयासों के बाद बालिका की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। अंततः उसे पूर्णतः खतरे से बाहर निकाल लिया गया। चिकित्सकों के अनुसार समय पर अस्पताल पहुंचना और बिना देरी उपचार शुरू होना बालिका के जीवन को बचाने में सबसे महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस सफल उपचार में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ.अजय गोस्वामी तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ.ज्योति डॉ.दीपांशु डॉ.आकाश डॉ.रोहित डॉ.अभिलाषा के साथ ही वार्ड में नर्सिंग अधिकारियों ब्लड सेंटर और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने भी पूरी निष्ठा के साथ सहयोग किया। यह सफल उपचार न केवल हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता का उदाहरण है बल्कि यह भी साबित करता है कि पहाड़ी क्षेत्रों में भी गंभीर से गंभीर मरीजों का उच्चस्तरीय उपचार संभव है यदि समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो और चिकित्सकों की टीम पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करे। डॉक्टरों ने हमारी बेटी को दूसरा जीवन दिया घर की खुशियां लौट आई 12 वर्षीय प्रतिज्ञा को नया जीवन मिलने के बाद उसके पिता विक्रम सिंह और माता सरिता देवी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि जिस समय उनकी बेटी की हालत लगातार बिगड़ रही थी उस समय पूरा परिवार गहरे सदमे में था और उम्मीदें टूटने लगी थीं। लेकिन हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल के डॉक्टरों ने दिन-रात अथक मेहनत समर्पण और उच्च स्तरीय चिकित्सा के बल पर उनकी बेटी को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। परिजनों ने बताया कि उनके परिवार में 15 वर्षीय बेटा और 12 वर्षीय बेटी प्रतिज्ञा है। बेटी के स्वस्थ होकर घर लौटने से परिवार की खुशियां वापस आ गई हैं। उन्होंने बेस अस्पताल के बाल रोग विभाग सर्जरी विभाग ब्लड सेंटर नर्सिंग स्टाफ और उपचार में जुटे सभी चिकित्सकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। साथ ही उत्तराखंड सरकार का धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें समय पर उत्कृष्ट और निःशुल्क उपचार मिला।

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