प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित स्वरोजगार एवं जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन रही हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाकर किसान और युवा न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर सृजित कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। सरकार के प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ रिवर्स पलायन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। इसका प्रेरणादायक उदाहरण जनपद रुद्रप्रयाग के लदोली गांव निवासी दिनेश सिंह चौधरी हैं। उन्होंने वर्ष 2021 में शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी छोड़कर अपने गांव लौटने का निर्णय लिया और ट्राउट मत्स्य पालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाया। आज वह न केवल सफल ट्राउट उत्पादक हैं बल्कि अपनी स्वयं की हैचरी में ट्राउट मछली की ब्रीडिंग भी कर रहे हैं। दिनेश सिंह चौधरी ने अपनी मत्स्य पालन इकाई की स्थापना में 60 प्रतिशत निवेश स्वयं किया जबकि शेष 40 प्रतिशत वित्तीय सहायता उन्हें मत्स्य विभाग द्वारा विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। विभागीय सहयोग तकनीकी मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने अपने उद्यम को सफल बनाया और आज वह क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। जिला प्रभारी मत्स्य विभाग मंजू भाकुनी ने बताया कि दिनेश सिंह चौधरी को प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत विभागीय सहायता प्रदान की गई थी। योजना का लाभ मिलने के बाद उन्होंने ट्राउट मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाया और वर्तमान में सफलतापूर्वक उत्पादन कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मत्स्य विभाग समय-समय पर किसानों एवं युवाओं को विभागीय योजनाओं की जानकारी तकनीकी प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है ताकि अधिक से अधिक लोग मत्स्य पालन को अपनाकर स्वरोजगार स्थापित करें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। वर्तमान में दिनेश सिंह चौधरी ट्राउट मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष लगभग 4 से 5 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य किया जाए तो गांव में रहकर भी सम्मानजनक आय अर्जित की जा सकती है। उनकी उपलब्धि क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।
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प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित स्वरोजगार एवं जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन रही हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाकर किसान और युवा न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर सृजित कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। सरकार के प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ रिवर्स पलायन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। इसका प्रेरणादायक उदाहरण जनपद रुद्रप्रयाग के लदोली गांव निवासी दिनेश सिंह चौधरी हैं। उन्होंने वर्ष 2021 में शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी छोड़कर अपने गांव लौटने का निर्णय लिया और ट्राउट मत्स्य पालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाया। आज वह न केवल सफल ट्राउट उत्पादक हैं बल्कि अपनी स्वयं की हैचरी में ट्राउट मछली की ब्रीडिंग भी कर रहे हैं। दिनेश सिंह चौधरी ने अपनी मत्स्य पालन इकाई की स्थापना में 60 प्रतिशत निवेश स्वयं किया जबकि शेष 40 प्रतिशत वित्तीय सहायता उन्हें मत्स्य विभाग द्वारा विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। विभागीय सहयोग तकनीकी मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने अपने उद्यम को सफल बनाया और आज वह क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। जिला प्रभारी मत्स्य विभाग मंजू भाकुनी ने बताया कि दिनेश सिंह चौधरी को प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत विभागीय सहायता प्रदान की गई थी। योजना का लाभ मिलने के बाद उन्होंने ट्राउट मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाया और वर्तमान में सफलतापूर्वक उत्पादन कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मत्स्य विभाग समय-समय पर किसानों एवं युवाओं को विभागीय योजनाओं की जानकारी तकनीकी प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है ताकि अधिक से अधिक लोग मत्स्य पालन को अपनाकर स्वरोजगार स्थापित करें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। वर्तमान में दिनेश सिंह चौधरी ट्राउट मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष लगभग 4 से 5 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य किया जाए तो गांव में रहकर भी सम्मानजनक आय अर्जित की जा सकती है। उनकी उपलब्धि क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।