प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया की अध्यक्षता में शुक्रवार को अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न पेयजल परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न नगर क्षेत्रों में चल रही पेयजल योजनाओं की प्रगति सर्वेक्षण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जलापूर्ति व्यवस्था तथा तकनीकी कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने जल स्रोतों के संरक्षण फिल्ट्रेशन वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने योजनाओं के सर्वेक्षण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ग्रैविटी सिस्टम इंटेक वेल पंप हाउस और अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमृत 2.0 योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल की पहुंच सुनिश्चित करते हुए शहरों को जल सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि दुगड्डा पंपिंग पेयजल योजना का कार्य शुरू हो चुका है। इसके पूरा होने पर नगर पंचायत दुगड्डा क्षेत्र में नियमित और सुचारु पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अलावा स्वर्गाश्रम-जोंक पेयजल आपूर्ति योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि थलीसैंण पेयजल योजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है जबकि सतपुली पेयजल योजना के शेष कार्यों में तेजी लाई जा रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि अमृत 2.0 के अंतर्गत संचालित पेयजल योजनाएं नगरीय क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी योजनाओं के जल स्रोतों का भूजल वैज्ञानिकों से निरीक्षण कराया जाए तथा दीर्घकालिक जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोत संरक्षण स्रोत संवर्धन और भूजल पुनर्भरण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाए। उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया। पौड़ी पंपिंग पेयजल योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि योजना को आगामी 31 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पेयजल वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वितरण लाइनों के क्लस्टर का वैज्ञानिक तरीके से सुधार किया जाए। उन्होंने कहा कि वितरण लाइनों को प्राथमिकता के आधार पर सुव्यवस्थित किया जाए ताकि अंतिम छोर तक रहने वाले लोगों को भी निर्बाध और समान रूप से पेयजल उपलब्ध हो सके। जिलाधिकारी ने जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि नगर क्षेत्रों से सटे ऐसे गांव जिन्हें अमृत 2.0 योजना से जोड़ा जा सकता है वहां आपसी समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को स्वच्छ पेयजल योजना का लाभ मिल सके। बैठक में अपर जिलाधिकारी एफ.आर.चौहान अधीक्षण अभियंता मो.मिशम प्रवीण सैनी अधिशासी अभियंता टी.एस.रावत सुभाष चंद्र भट्ट सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया की अध्यक्षता में शुक्रवार को अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न पेयजल परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न नगर क्षेत्रों में चल रही पेयजल योजनाओं की प्रगति सर्वेक्षण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जलापूर्ति व्यवस्था तथा तकनीकी कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने जल स्रोतों के संरक्षण फिल्ट्रेशन वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने योजनाओं के सर्वेक्षण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ग्रैविटी सिस्टम इंटेक वेल पंप हाउस और अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमृत 2.0 योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल की पहुंच सुनिश्चित करते हुए शहरों को जल सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि दुगड्डा पंपिंग पेयजल योजना का कार्य शुरू हो चुका है। इसके पूरा होने पर नगर पंचायत दुगड्डा क्षेत्र में नियमित और सुचारु पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अलावा स्वर्गाश्रम-जोंक पेयजल आपूर्ति योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि थलीसैंण पेयजल योजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है जबकि सतपुली पेयजल योजना के शेष कार्यों में तेजी लाई जा रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि अमृत 2.0 के अंतर्गत संचालित पेयजल योजनाएं नगरीय क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी योजनाओं के जल स्रोतों का भूजल वैज्ञानिकों से निरीक्षण कराया जाए तथा दीर्घकालिक जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोत संरक्षण स्रोत संवर्धन और भूजल पुनर्भरण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाए। उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया। पौड़ी पंपिंग पेयजल योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि योजना को आगामी 31 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पेयजल वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वितरण लाइनों के क्लस्टर का वैज्ञानिक तरीके से सुधार किया जाए। उन्होंने कहा कि वितरण लाइनों को प्राथमिकता के आधार पर सुव्यवस्थित किया जाए ताकि अंतिम छोर तक रहने वाले लोगों को भी निर्बाध और समान रूप से पेयजल उपलब्ध हो सके। जिलाधिकारी ने जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि नगर क्षेत्रों से सटे ऐसे गांव जिन्हें अमृत 2.0 योजना से जोड़ा जा सकता है वहां आपसी समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को स्वच्छ पेयजल योजना का लाभ मिल सके। बैठक में अपर जिलाधिकारी एफ.आर.चौहान अधीक्षण अभियंता मो.मिशम प्रवीण सैनी अधिशासी अभियंता टी.एस.रावत सुभाष चंद्र भट्ट सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।