प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। टिहरी गढ़वाल जनपद के विकासखंड भिलंगना के थाती गांव की निवासी चैतादेवी ने अपनी मेहनत लगन और रीप परियोजना के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। भैरवनाथ स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य चैतादेवी आज सफल महिला उद्यमी के रूप में अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। वह महादेव आजीविका महिला ग्राम संगठन तथा संगम स्वायत्त सहकारी डांगी सीएलएफ से भी जुड़ी हुई हैं। परिवार की सीमित आय के कारण पहले आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था लेकिन आत्मनिर्भर बनने की दृढ़ इच्छा और लगातार मेहनत ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। रीप परियोजना के तहत उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए 22 हजार 500 रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इसके अलावा उन्होंने बैंक से 37 हजार 500 रुपये का ऋण लिया तथा 15 हजार रुपये अपनी बचत से लगाए। इस प्रकार कुल 75 हजार रुपये की लागत से उन्होंने अपने गांव में मदर यूनिट पोल्ट्री फार्म की स्थापना की। आज उनके पोल्ट्री फार्म में लगभग 100 मुर्गियां हैं। आधुनिक तरीके से देखभाल और नियमित प्रबंधन के कारण उनका फार्म सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। फार्म से उन्हें तीन प्रमुख स्रोतों से नियमित आय प्राप्त हो रही है। अंडा उत्पादन के माध्यम से उनके फार्म में प्रति सप्ताह लगभग 400 अंडों का उत्पादन होता है। आठ रुपये प्रति अंडे की दर से उन्हें लगभग 12 हजार 800 रुपये प्रतिमाह की आय प्राप्त होती है। इसके अलावा प्रतिमाह लगभग 25 चूजों की बिक्री से करीब एक हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है। वहीं स्थानीय बाजार और मीट विक्रेताओं को प्रतिमाह लगभग 50 मुर्गियां बेचकर उन्हें करीब 10 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। पोल्ट्री फार्म से मिलने वाली नियमित आय ने चैतादेवी के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। अब वे परिवार की आवश्यकताओं को आसानी से पूरा करने के साथ भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। पशुपालन के प्रति उनकी लगन और व्यवस्थित प्रबंधन ने उनके उद्यम को सफल बनाया है। चैतादेवी की सफलता से उनके गांव और आसपास की कई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि सही मार्गदर्शन वित्तीय सहयोग और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.डी.के.शर्मा ने बताया कि रीप परियोजना और पशुपालन विभाग के सहयोग से पोल्ट्री फार्म स्थापित होने से ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं। साथ ही उन्हें और उनके परिवार को अंडे एवं मांस के माध्यम से कम लागत में प्रोटीनयुक्त आहार भी उपलब्ध हो रहा है जो बेहतर पोषण और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग द्वारा जनपद में बैकयार्ड पोल्ट्री कुक्कुट वैली तथा ब्रायलर फार्म योजनाओं का संचालन किया जा रहा है जिनका लाभ ग्रामीण उठा सकते हैं। विभाग की ओर से सभी कुक्कुट पालकों को पक्षियों के लिए चिकित्सा सुविधा दवाइयां और प्रशिक्षण भी निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनपद में कुक्कुट पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और यह आजीविका का बेहतर माध्यम है। चैतादेवी जैसे सफल कुक्कुट पालक अन्य ग्रामीण किसानों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने सभी पशुपालकों से इस क्षेत्र में आगे आकर बढ़-चढ़कर भागीदारी करने की अपील की। चैतादेवी की यह सफलता केवल एक पोल्ट्री फार्म की सफलता नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका विकास का प्रेरणादायक उदाहरण है। रीप परियोजना के सहयोग और अपने अथक परिश्रम से उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी सफलता का नया मार्ग प्रशस्त किया।
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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। टिहरी गढ़वाल जनपद के विकासखंड भिलंगना के थाती गांव की निवासी चैतादेवी ने अपनी मेहनत लगन और रीप परियोजना के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। भैरवनाथ स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य चैतादेवी आज सफल महिला उद्यमी के रूप में अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। वह महादेव आजीविका महिला ग्राम संगठन तथा संगम स्वायत्त सहकारी डांगी सीएलएफ से भी जुड़ी हुई हैं। परिवार की सीमित आय के कारण पहले आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था लेकिन आत्मनिर्भर बनने की दृढ़ इच्छा और लगातार मेहनत ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। रीप परियोजना के तहत उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए 22 हजार 500 रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इसके अलावा उन्होंने बैंक से 37 हजार 500 रुपये का ऋण लिया तथा 15 हजार रुपये अपनी बचत से लगाए। इस प्रकार कुल 75 हजार रुपये की लागत से उन्होंने अपने गांव में मदर यूनिट पोल्ट्री फार्म की स्थापना की। आज उनके पोल्ट्री फार्म में लगभग 100 मुर्गियां हैं। आधुनिक तरीके से देखभाल और नियमित प्रबंधन के कारण उनका फार्म सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। फार्म से उन्हें तीन प्रमुख स्रोतों से नियमित आय प्राप्त हो रही है। अंडा उत्पादन के माध्यम से उनके फार्म में प्रति सप्ताह लगभग 400 अंडों का उत्पादन होता है। आठ रुपये प्रति अंडे की दर से उन्हें लगभग 12 हजार 800 रुपये प्रतिमाह की आय प्राप्त होती है। इसके अलावा प्रतिमाह लगभग 25 चूजों की बिक्री से करीब एक हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है। वहीं स्थानीय बाजार और मीट विक्रेताओं को प्रतिमाह लगभग 50 मुर्गियां बेचकर उन्हें करीब 10 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। पोल्ट्री फार्म से मिलने वाली नियमित आय ने चैतादेवी के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। अब वे परिवार की आवश्यकताओं को आसानी से पूरा करने के साथ भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। पशुपालन के प्रति उनकी लगन और व्यवस्थित प्रबंधन ने उनके उद्यम को सफल बनाया है। चैतादेवी की सफलता से उनके गांव और आसपास की कई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि सही मार्गदर्शन वित्तीय सहयोग और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.डी.के.शर्मा ने बताया कि रीप परियोजना और पशुपालन विभाग के सहयोग से पोल्ट्री फार्म स्थापित होने से ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं। साथ ही उन्हें और उनके परिवार को अंडे एवं मांस के माध्यम से कम लागत में प्रोटीनयुक्त आहार भी उपलब्ध हो रहा है जो बेहतर पोषण और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग द्वारा जनपद में बैकयार्ड पोल्ट्री कुक्कुट वैली तथा ब्रायलर फार्म योजनाओं का संचालन किया जा रहा है जिनका लाभ ग्रामीण उठा सकते हैं। विभाग की ओर से सभी कुक्कुट पालकों को पक्षियों के लिए चिकित्सा सुविधा दवाइयां और प्रशिक्षण भी निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनपद में कुक्कुट पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और यह आजीविका का बेहतर माध्यम है। चैतादेवी जैसे सफल कुक्कुट पालक अन्य ग्रामीण किसानों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने सभी पशुपालकों से इस क्षेत्र में आगे आकर बढ़-चढ़कर भागीदारी करने की अपील की। चैतादेवी की यह सफलता केवल एक पोल्ट्री फार्म की सफलता नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका विकास का प्रेरणादायक उदाहरण है। रीप परियोजना के सहयोग और अपने अथक परिश्रम से उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी सफलता का नया मार्ग प्रशस्त किया।