प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे के नेतृत्व में टिहरी पुलिस को साइबर अपराध के खिलाफ एक और बड़ी सफलता मिली है। साइबर सेल टिहरी और थाना मुनि की रेती पुलिस की संयुक्त टीम ने डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 4.35 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को महाराष्ट्र के सतारा जिले से गिरफ्तार किया है। मामले में शामिल अन्य आरोपियों और पूरे साइबर नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार ढालवाला निवासी एक व्यक्ति ने 12 फरवरी 2026 को थाना मुनि की रेती में शिकायत दर्ज कराई थी कि 9 जनवरी 2026 को उसे व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने बताया कि उसके नाम से मुंबई स्थित कैनरा बैंक की शाखा में बैंक खाता खोला गया है जिसका इस्तेमाल धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया गया है। साइबर अपराधियों ने वीडियो कॉल के दौरान पुलिस थाना वर्दीधारी अधिकारियों और कार्यालय जैसे दृश्य दिखाकर शिकायतकर्ता का विश्वास जीत लिया। इसके बाद गिरफ्तारी कानूनी कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा का भय दिखाते हुए लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। भयभीत होकर शिकायतकर्ता ने 13 जनवरी 2026 को आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खाते में 4.35 लाख रुपये चेक के माध्यम से जमा कर दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विवेचना साइबर सेल को सौंपी गई। जांच के दौरान साइबर सेल ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों व्हाट्सएप कॉल बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन का गहन तकनीकी विश्लेषण किया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त कर साइबर सेल और थाना मुनि की रेती की संयुक्त टीम महाराष्ट्र रवाना की गई। तकनीकी सर्विलांस पतारसी और सुरागरसी के आधार पर पुलिस टीम ने 23 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के ग्राम कोले निवासी अंकुश राजेन्द्र गाडगे को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) की ऑनलाइन ट्रेडिंग करता है तथा विभिन्न म्यूल खातों में प्राप्त साइबर ठगी की धनराशि को यूएसडीटी में परिवर्तित कर अन्य वॉलेट और खातों में स्थानांतरित करता था। इसके बदले उसे कमीशन मिलता था। गिरफ्तार आरोपी को आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के बाद न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस पूरे साइबर नेटवर्क और मामले में शामिल अन्य आरोपियों के संबंध में विस्तृत जांच कर रही है। टिहरी पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस सीबीआई प्रवर्तन निदेशालय आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाए धनराशि ट्रांसफर करने का दबाव बनाए या गोपनीय जानकारी मांगे तो सतर्क रहें। किसी भी स्थिति में धनराशि स्थानांतरित न करें बैंक खाता ओटीपी आधार या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें तथा तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर निकटतम पुलिस स्टेशन को सूचना दें। पुलिस टीम उपनिरीक्षक संजीव थपलियाल सहायक उपनिरीक्षक हरिमोहन तथा हेड कांस्टेबल विजय प्रताप उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे के नेतृत्व में टिहरी पुलिस को साइबर अपराध के खिलाफ एक और बड़ी सफलता मिली है। साइबर सेल टिहरी और थाना मुनि की रेती पुलिस की संयुक्त टीम ने डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 4.35 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को महाराष्ट्र के सतारा जिले से गिरफ्तार किया है। मामले में शामिल अन्य आरोपियों और पूरे साइबर नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार ढालवाला निवासी एक व्यक्ति ने 12 फरवरी 2026 को थाना मुनि की रेती में शिकायत दर्ज कराई थी कि 9 जनवरी 2026 को उसे व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने बताया कि उसके नाम से मुंबई स्थित कैनरा बैंक की शाखा में बैंक खाता खोला गया है जिसका इस्तेमाल धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया गया है। साइबर अपराधियों ने वीडियो कॉल के दौरान पुलिस थाना वर्दीधारी अधिकारियों और कार्यालय जैसे दृश्य दिखाकर शिकायतकर्ता का विश्वास जीत लिया। इसके बाद गिरफ्तारी कानूनी कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा का भय दिखाते हुए लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। भयभीत होकर शिकायतकर्ता ने 13 जनवरी 2026 को आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खाते में 4.35 लाख रुपये चेक के माध्यम से जमा कर दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विवेचना साइबर सेल को सौंपी गई। जांच के दौरान साइबर सेल ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों व्हाट्सएप कॉल बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन का गहन तकनीकी विश्लेषण किया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त कर साइबर सेल और थाना मुनि की रेती की संयुक्त टीम महाराष्ट्र रवाना की गई। तकनीकी सर्विलांस पतारसी और सुरागरसी के आधार पर पुलिस टीम ने 23 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के ग्राम कोले निवासी अंकुश राजेन्द्र गाडगे को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) की ऑनलाइन ट्रेडिंग करता है तथा विभिन्न म्यूल खातों में प्राप्त साइबर ठगी की धनराशि को यूएसडीटी में परिवर्तित कर अन्य वॉलेट और खातों में स्थानांतरित करता था। इसके बदले उसे कमीशन मिलता था। गिरफ्तार आरोपी को आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के बाद न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस पूरे साइबर नेटवर्क और मामले में शामिल अन्य आरोपियों के संबंध में विस्तृत जांच कर रही है। टिहरी पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस सीबीआई प्रवर्तन निदेशालय आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाए धनराशि ट्रांसफर करने का दबाव बनाए या गोपनीय जानकारी मांगे तो सतर्क रहें। किसी भी स्थिति में धनराशि स्थानांतरित न करें बैंक खाता ओटीपी आधार या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें तथा तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर निकटतम पुलिस स्टेशन को सूचना दें। पुलिस टीम उपनिरीक्षक संजीव थपलियाल सहायक उपनिरीक्षक हरिमोहन तथा हेड कांस्टेबल विजय प्रताप उपस्थित रहे।