Spread the love

प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 के अंतर्गत “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत शिक्षा में भारतीय ज्ञान परम्परा एवं भारतीय भाषाओं का समावेश” विषय पर हिमालयी पुरातत्व एवं नृवंशीय संग्रहालय चौरास परिसर में प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्री प्रकाश सिंह ने प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य विभिन्न संस्कृतियों परंपराओं जीवनशैली और जीवन मूल्यों को समझना तथा उनसे सीखना है। उन्होंने कहा कि यही भावना भारत की सांस्कृतिक एकता और विविधता को और अधिक सशक्त बनाती है। कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रही है। भारतीय ज्ञान परंपरा केवल प्राचीन ग्रंथों तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें परिवार व्यवस्था स्वस्थ जीवनशैली मानवीय रिश्तों की गरिमा आयुर्वेद एवं पारंपरिक औषधीय ज्ञान प्रकृति के साथ संतुलित जीवन तथा नैतिक मूल्यों का समृद्ध अनुभव भी शामिल है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इन जीवनोपयोगी मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है और विश्वविद्यालय इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। कार्यक्रम में डॉ.अमरजीत सिंह परिहार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ.अनूप सेमवाल ने किया जबकि अंत में डॉ.राकेश नेगी ने सभी अतिथियों प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी संकायाध्यक्ष नियुक्ति एवं प्रोन्नति प्रो.मोहन पवार चौरास परिसर निदेशक प्रो.राजेंद्र सिंह नेगी मुख्य नियंता एस.एस.बिष्ट सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक शोधार्थी विद्यार्थी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Whatsapp